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छात्राएं बोलीं-सिटी बस सेवा शुरू नहीं होने से बढ़ रही छात्राओं की मुश्किलें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Feb 2022 01:27 AM IST
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The girls said that the problems of the girl students are increasing due to the non-start of the city bus service
लगभग छह साल पूर्व बस अड्डे से कैथल शहर में एक सिटी बस चलती थी। इससे शहर में विभिन्न संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राएं आसानी से जाती थीं लेकिन बीते छह वर्षों से बस का संचालन बंद है। इसके कारण बस अड्डे से विभिन्न स्कूल, कॉलेजों, आईटीआई और अन्य शिक्षण संस्थानों तक जाने-आने के लिए छात्राओं को भटकना पड़ता है। 40 से 50 रुपये प्रतिदिन किराया खर्च करना पड़ता है। एक बार विद्या वाहिनी बस छात्राओं के लिए विशेष रूप से चलवाई गई थी जो सुबह-शाम छात्राओं को बस अड्डे से शिक्षण संस्थानों तक शिक्षण संस्थानों से बस अड्डे तक लेकर और छोड़कर जाती थी। कोरोना काल के बाद से यह बस सेवा भी बंद पड़ी है। बेटियों ने एक बार फिर से सिटी बस सेवा चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें सड़क पर पैदल चलते हुए दिक्कतें होती हैं। पूर्व की भांति यह बस सेवा शुरू की जाए। रोडवेज महाप्रबंधक अजय गर्ग ने कहा कि उसके ज्वाइन करने से पहले भी सिटी बस सेवा बंद थी। बस का राजस्व नहीं आया होगा, इसलिए बंद है।
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डीसी प्रदीप दहिया ने कहा कि छात्राओं की समस्या वाजिब है। इस बारे में रोडवेज के अधिकारियों से बातचीत कर शहर में सिटी बस सेवा शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
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पैदल तय करना पड़ता है सफर
आईजी कॉलेज की छात्रा काजल ने कहा कि वे कॉलेज से बस अड्डे तक का सफर पैदल तय करते हैं। इससे वह सुबह देर से कक्षा में पहुंचती है। उसने कहा यदि सुबह सिटी बस चले तो बस अड्डे से कॉलेज और दोपहर बाद कॉलेज से बस अड्डे तक जल्द पहुंच सकेंगे।
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कॉलेज छात्रा कोमल का कहना है कि शिक्षण संस्थानों में पहुंचने के लिए साधन नहीं हैं। यदि वह ऑटो में आते हैं तो पहले तो ऑटो वाले थोड़ी दूरी के भी 15 रुपये लेते हैं। ऊपर से सवारियों से ऑटो फुल करने के बाद ऑटो चलाते हैं। इससे कक्षाओं में देरी से पहुंचते हैं और पढ़ाई प्रभावित होती है।
कॉलेज छात्रा शीतल ने कहा कि सर्दियों के मौसम में ज्यादा समस्या हो रही है। एक तो गांवों में भी बसों की सुविधा नहीं दूसरा बस अड्डे से कॉलेज तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। अधिक समस्या सर्दी के मौसम में होती है।

आरकेएसडी कॉलेज की छात्रा प्रियंका ने कहा कि वे गांव से शहर तक एक ऑटो में आती है और कॉलेज पहुंचने के लिए भी ऑटो का सहारा लिया जाता है। इस दौरान उन्हें दोगुना किराया देना पड़ता है। यदि शहर में बस सेवा शुरू हो जाए तो उनका आधा किराया बच सकेगा। छात्रा नेहा ने कहा कि सुबह कॉलेज के लिए घर से निकलती हैं तो उन्हें यह चिंता रहती है कि वह कॉलेज कब पहुंचेंगी। कैथल बस अड्डे पर पहुंचने के बाद कॉलेज तक पैदल ही जाना पड़ता है। यदि ऑटो में आए तो वह भी पूरी तरह से सवारियों से भरे बिना नहीं चलता। छात्रा नेहा, रुपाली, प्रीति और सोनम ने कहा कि कॉलेज पहुंचने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सुबह घर से आ जाते हैं लेकिन वापस जाने की चिंता रहती है। क्योंकि बस अड्डे से कॉलेज तक और कॉलेज से बस अड्डे तक का सफर पैदल ही तय करना पड़ता है।
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