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पशुपालक ने भैंस की मौत पर दिया मृत्युभोज
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कैथल। इंसान की मौत पर मृत्युभोज देना तो जरूर सुना होगा लेकिन अब हरियाणा में पशुओं की मौत पर भी मृत्युभोज दिया जाने लगा है। पशु की मृत्यु होने पर परिवार के एक सदस्य की तरह उसकी मौत पर दुख भी मनाया जाने लगा है। पिछले दिनों बुढाखेड़ा गांव में एक झोटे की मौत से पूरा परिवार इतना दुखी हुआ था कि संबंधित परिवार ने लगातार 13 दिनों तक शोक मनाया गया था। अब इसी तर्ज पर गांव गढ़ी में एक पशुपालक द्वारा उस भैंस की मौत पर मृत्युभोज का आयोजन किया गया, जिसने हर साल ब्यांत के माध्यम से परिवार को दूध से निहाल कर रखा था।
परिवार वालों ने बकायदा इस भैंस का नाम भी रखा गया था। परिजन उसे मूर्ति कहकर बुलाते थे। भैंस के मालिक रामकरण ने बताया कि उसकी भैंस मूर्ति की पांच मार्च को मौत हो गई। मूर्ति को वह 2005 में पड़ोस के गांव छौत से लेकर आया था। 18 साल तक उसने मूर्ति का घर के सदस्यों की तरह पालन पोषण किया। मूर्ति 18 साल में यह हर साल कटड़े या कटड़ी को जन्म देती थी। पांच से छह कटड़ियां इस भैंस ने दी हैं। उसने कई अवार्ड भी जीते।
एक बार में 11 लीटर से ज्यादा दूध देने का भी रिकॉर्ड बनाया था। वह उनके परिवार के सदस्य की भांति थी। पूरे परिवार को उससे लगाव था। गत पांच मार्च को उसकी मौत होने पर परिवार के सदस्यों को काफी दुख हुआ। उसकी मौत के बाद रविवार को मृत्यु भोज का आयोजन किया गया है। इसमें गांव के साथ-साथ रिश्तेदारी सहित अन्य गांव के ग्रामीणों को भोजन खिलाया गया।
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परिवार वालों ने बकायदा इस भैंस का नाम भी रखा गया था। परिजन उसे मूर्ति कहकर बुलाते थे। भैंस के मालिक रामकरण ने बताया कि उसकी भैंस मूर्ति की पांच मार्च को मौत हो गई। मूर्ति को वह 2005 में पड़ोस के गांव छौत से लेकर आया था। 18 साल तक उसने मूर्ति का घर के सदस्यों की तरह पालन पोषण किया। मूर्ति 18 साल में यह हर साल कटड़े या कटड़ी को जन्म देती थी। पांच से छह कटड़ियां इस भैंस ने दी हैं। उसने कई अवार्ड भी जीते।
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एक बार में 11 लीटर से ज्यादा दूध देने का भी रिकॉर्ड बनाया था। वह उनके परिवार के सदस्य की भांति थी। पूरे परिवार को उससे लगाव था। गत पांच मार्च को उसकी मौत होने पर परिवार के सदस्यों को काफी दुख हुआ। उसकी मौत के बाद रविवार को मृत्यु भोज का आयोजन किया गया है। इसमें गांव के साथ-साथ रिश्तेदारी सहित अन्य गांव के ग्रामीणों को भोजन खिलाया गया।
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