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Kaithal News: तीज की रौनक से महका बाजार, कोथली की मिठाइयों की धूम
Sun, 20 Jul 2025 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 20 Jul 2025 12:12 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। सावन माह के पावन आगमन के साथ ही नगर में धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक उल्लास का वातावरण बन गया है। विशेषकर तीज त्योहार की तैयारियों और भाई-बहन के स्नेह की प्रतीक कोथली परंपरा ने बाजारों में उत्सव जैसा माहौल पैदा कर दिया है।
कोथली में मिठास और परंपरा का संगम ः उत्तर भारत की परंपरा के अनुसार तीज और रक्षाबंधन से पूर्व भाई अपनी बहनों को कोथली—यानी उपहारों और मिठाइयों से सजी टोकरी—भेजते हैं। इसमें घेवर, फिरनी, मावे और केसर वाला घेवर, मट्ठी, सुहाली, खुरमे, बिस्किट जैसी पारंपरिक मिठाइयों के साथ मेंहदी, चूड़ियां, वस्त्र और अन्य उपहार भी शामिल किए जाते हैं।
इन दिनों मिठाई की दुकानों पर खासा रौनक और चहल-पहल दिखाई दे रही है। डिब्बों को सजावटी पैकिंग में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे कोथली सुंदर, भावपूर्ण और उत्सवोपयुक्त दिखे।
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महिलाओं की खरीदारियों से गुलजार बाज़ार ः सावन की हरियाली और तीज के पारंपरिक उल्लास से सजे बाजार में कंगन, चूड़ी, मेहंदी, राखी और पूजा सामग्री की दुकानों पर भी भीड़ उमड़ रही है। महिलाएं पारंपरिक परिधान पहन कर उत्साह से खरीदारी में जुटी हैं।
स्थानीय व्यापारी गोलू कामरा ने बताया कि वे हर वर्ष सावन और तीज के लिए विशेष तैयारी करते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार ग्राहकों की पसंद के अनुसार हमने फिरनी, केसर-मावे वाला घेवर, और पारंपरिक मट्ठी, सुहाली, खुर्मी जैसी मिठाइयों की खास श्रृंखला तैयार की है। उन्होंने बताया कि ग्राहक अपनी पसंद और बहनों की पसंद के अनुसार ऑर्डर पर कोथली तैयार करवा रहे हैं, जिनमें मिठाइयों के साथ मेंहदी, चूड़ियां, वस्त्र और गिफ्ट आइटम्स भी शामिल किए जा रहे हैं।
क्या होती है कोथली
कोथली एक टोकरी या थैला है जिसमें विभिन्न प्रकार के पकवान, कपड़े, और अन्य उपहार होते हैं, जो विवाहित महिला के मायके से ससुराल भेजे जाते हैं। आमतौर पर, कोथली में घेवर, फिरनी, मिठाई, और अन्य पारंपरिक पकवान शामिल होते हैं, साथ ही कपड़े और अन्य उपहार भी होते हैं।
इसका महत्व
कोथली का मुख्य उद्देश्य विवाहित महिला के मायके और ससुराल के बीच प्रेम और स्नेह का बंधन बनाए रखना है। यह त्योहारों और विशेष अवसरों पर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और स्नेह व्यक्त करने का एक तरीका है।
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सीवन। सावन माह के पावन आगमन के साथ ही नगर में धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक उल्लास का वातावरण बन गया है। विशेषकर तीज त्योहार की तैयारियों और भाई-बहन के स्नेह की प्रतीक कोथली परंपरा ने बाजारों में उत्सव जैसा माहौल पैदा कर दिया है।
कोथली में मिठास और परंपरा का संगम ः उत्तर भारत की परंपरा के अनुसार तीज और रक्षाबंधन से पूर्व भाई अपनी बहनों को कोथली—यानी उपहारों और मिठाइयों से सजी टोकरी—भेजते हैं। इसमें घेवर, फिरनी, मावे और केसर वाला घेवर, मट्ठी, सुहाली, खुरमे, बिस्किट जैसी पारंपरिक मिठाइयों के साथ मेंहदी, चूड़ियां, वस्त्र और अन्य उपहार भी शामिल किए जाते हैं।
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इन दिनों मिठाई की दुकानों पर खासा रौनक और चहल-पहल दिखाई दे रही है। डिब्बों को सजावटी पैकिंग में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे कोथली सुंदर, भावपूर्ण और उत्सवोपयुक्त दिखे।
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महिलाओं की खरीदारियों से गुलजार बाज़ार ः सावन की हरियाली और तीज के पारंपरिक उल्लास से सजे बाजार में कंगन, चूड़ी, मेहंदी, राखी और पूजा सामग्री की दुकानों पर भी भीड़ उमड़ रही है। महिलाएं पारंपरिक परिधान पहन कर उत्साह से खरीदारी में जुटी हैं।
स्थानीय व्यापारी गोलू कामरा ने बताया कि वे हर वर्ष सावन और तीज के लिए विशेष तैयारी करते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार ग्राहकों की पसंद के अनुसार हमने फिरनी, केसर-मावे वाला घेवर, और पारंपरिक मट्ठी, सुहाली, खुर्मी जैसी मिठाइयों की खास श्रृंखला तैयार की है। उन्होंने बताया कि ग्राहक अपनी पसंद और बहनों की पसंद के अनुसार ऑर्डर पर कोथली तैयार करवा रहे हैं, जिनमें मिठाइयों के साथ मेंहदी, चूड़ियां, वस्त्र और गिफ्ट आइटम्स भी शामिल किए जा रहे हैं।
क्या होती है कोथली
कोथली एक टोकरी या थैला है जिसमें विभिन्न प्रकार के पकवान, कपड़े, और अन्य उपहार होते हैं, जो विवाहित महिला के मायके से ससुराल भेजे जाते हैं। आमतौर पर, कोथली में घेवर, फिरनी, मिठाई, और अन्य पारंपरिक पकवान शामिल होते हैं, साथ ही कपड़े और अन्य उपहार भी होते हैं।
इसका महत्व
कोथली का मुख्य उद्देश्य विवाहित महिला के मायके और ससुराल के बीच प्रेम और स्नेह का बंधन बनाए रखना है। यह त्योहारों और विशेष अवसरों पर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और स्नेह व्यक्त करने का एक तरीका है।