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Kaithal News: श्रावणी पर्व पर तर्पण अनुष्ठान
Sun, 10 Aug 2025 12:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 10 Aug 2025 12:48 AM IST
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32 राजौंद। नदी तर्पण में भाग लेते हुए ब्राह्मण। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। नगर के जींद रोड स्थित नहर किनारे तर्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर आचार्य पंडित राम भगत हरित ने बताया कि श्रावणी पर्व मनुष्य को देव, ऋषि और पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है। दोष निवारण के लिए तर्पण अनुष्ठान में शामिल होने मात्र से व्यक्ति दोषमुक्त हो जाता है।
कार्यक्रम के संयोजक आचार्यों ने बताया कि यह आयोजन पिछले लगभग 72 वर्षों से प्रतिवर्ष किया जा रहा है। तर्पण के उपरांत विधिवत सप्तऋषि पूजा, यज्ञोपवीत पूजा तथा हवन यज्ञ संपन्न हुआ, जिसमें उपस्थित सभी लोगों ने पूर्ण आहुतियां डालकर पुण्य अर्जित किया।
आचार्यों ने बताया कि यज्ञोपवीत धारण करने वाले व्यक्ति को यज्ञ में आहुति देने और धर्म-कर्म अनुष्ठान करने का अधिकार प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत धारण से गायत्री मंत्र की दीक्षा मिलती है और उसके जप का फल प्राप्त होता है। श्रावणी कर्म को मन, वचन और
काया से किए गए पाप कर्मों का प्रायश्चित माना गया है।
इस मौके पर आचार्य राम भगत हरित, राजेंद्र शर्मा, सोनू दीक्षित, सतबीर शास्त्री, संजीव हरित, जयदेव कौशल, रमेश कुमार, सतीश कौशल, अमित
करोड़ा, धर्मवीर दीक्षित, सतबीर बस्सी सहित अन्य लोगों ने तर्पण और ऋषि पूजन में भाग लिया।
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राजौंद। नगर के जींद रोड स्थित नहर किनारे तर्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर आचार्य पंडित राम भगत हरित ने बताया कि श्रावणी पर्व मनुष्य को देव, ऋषि और पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है। दोष निवारण के लिए तर्पण अनुष्ठान में शामिल होने मात्र से व्यक्ति दोषमुक्त हो जाता है।
कार्यक्रम के संयोजक आचार्यों ने बताया कि यह आयोजन पिछले लगभग 72 वर्षों से प्रतिवर्ष किया जा रहा है। तर्पण के उपरांत विधिवत सप्तऋषि पूजा, यज्ञोपवीत पूजा तथा हवन यज्ञ संपन्न हुआ, जिसमें उपस्थित सभी लोगों ने पूर्ण आहुतियां डालकर पुण्य अर्जित किया।
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आचार्यों ने बताया कि यज्ञोपवीत धारण करने वाले व्यक्ति को यज्ञ में आहुति देने और धर्म-कर्म अनुष्ठान करने का अधिकार प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत धारण से गायत्री मंत्र की दीक्षा मिलती है और उसके जप का फल प्राप्त होता है। श्रावणी कर्म को मन, वचन और
काया से किए गए पाप कर्मों का प्रायश्चित माना गया है।
इस मौके पर आचार्य राम भगत हरित, राजेंद्र शर्मा, सोनू दीक्षित, सतबीर शास्त्री, संजीव हरित, जयदेव कौशल, रमेश कुमार, सतीश कौशल, अमित
करोड़ा, धर्मवीर दीक्षित, सतबीर बस्सी सहित अन्य लोगों ने तर्पण और ऋषि पूजन में भाग लिया।