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Kaithal News: स्वामी विज्ञानानंद ने दिया भरत-राम प्रेम का संदेश
Sun, 07 Dec 2025 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 07 Dec 2025 12:00 AM IST
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गुहला चीका। मुख्यातिथि जजपा पार्टी के प्रदेश प्रधान महासचिव प्रोफेसर रणधीर सिंह चीका को स्मृति
संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला चीका। अग्रवाल धर्मशाला में श्रीराम कथा संचालन समिति की श्रीराम कथा के सातवें दिन स्वामी विज्ञानानंद ने भरत-राम प्रेम का संदेश का वर्णन किया। इससे पूर्व समाजसेवी नवनीत गोयल आदि यजमानों ने पूजा-अर्चना और दीप प्रज्ज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया।
जजपा के प्रदेश प्रधान महासचिव प्रो. रणधीर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कथा वाचक स्वामी विज्ञानानंद महाराज ने प्रो. रणधीर सिंह का सम्मान किया और कथा का वर्णन करते हुए बताया कि जब भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों के वनवास के लिए अयोध्या से चले गए, तब भरत अपने ननिहाल में थे।
उन्होंने कहा कि अयोध्या लौटने पर उन्हें माता कैकेयी द्वारा मांगे गए वरदान और पिता दशरथ के निधन की जानकारी मिली, जिससे उन्हें गहरा दुःख हुआ। भरत ने सिंहासन ग्रहण करने से इनकार कर राम को ही वास्तविक राजा माना और राम को वापस लाने के लिए चित्रकूट की ओर प्रस्थान किया। स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि भ्राता-भाई का प्यार देखकर जीवन में सीख ली जा सकती है।
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आज के कार्यक्रम में संघ के स्वयंसेवक मनीष, अश्वनी, सुमित, प्रदीप, निखिल, अशोक गर्ग, परमानंद गोयल, सुभाष सिंगला, नानू राम मित्तल, विजय गर्ग, सुनील मित्तल और सुशील शर्मा भी उपस्थित रहे।
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गुहला चीका। अग्रवाल धर्मशाला में श्रीराम कथा संचालन समिति की श्रीराम कथा के सातवें दिन स्वामी विज्ञानानंद ने भरत-राम प्रेम का संदेश का वर्णन किया। इससे पूर्व समाजसेवी नवनीत गोयल आदि यजमानों ने पूजा-अर्चना और दीप प्रज्ज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया।
जजपा के प्रदेश प्रधान महासचिव प्रो. रणधीर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कथा वाचक स्वामी विज्ञानानंद महाराज ने प्रो. रणधीर सिंह का सम्मान किया और कथा का वर्णन करते हुए बताया कि जब भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों के वनवास के लिए अयोध्या से चले गए, तब भरत अपने ननिहाल में थे।
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उन्होंने कहा कि अयोध्या लौटने पर उन्हें माता कैकेयी द्वारा मांगे गए वरदान और पिता दशरथ के निधन की जानकारी मिली, जिससे उन्हें गहरा दुःख हुआ। भरत ने सिंहासन ग्रहण करने से इनकार कर राम को ही वास्तविक राजा माना और राम को वापस लाने के लिए चित्रकूट की ओर प्रस्थान किया। स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि भ्राता-भाई का प्यार देखकर जीवन में सीख ली जा सकती है।
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आज के कार्यक्रम में संघ के स्वयंसेवक मनीष, अश्वनी, सुमित, प्रदीप, निखिल, अशोक गर्ग, परमानंद गोयल, सुभाष सिंगला, नानू राम मित्तल, विजय गर्ग, सुनील मित्तल और सुशील शर्मा भी उपस्थित रहे।