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Kaithal News: लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे स्कूली बच्चे
Wed, 24 Apr 2024 04:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 24 Apr 2024 04:53 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में पांच वर्ष में स्कूल बसों के साथ हुई हादसे में दो बच्चों की मौत हुई है। आखिर कौन है इन बच्चों की मौत का जिम्मेदार? अधिकांश स्कूल संचालक सुरक्षित वाहन पॉलिसी का पालन नहीं कर रहे। जिसके कारण से स्कूल बसों की दुर्घटना होने पर
इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है।
गौरतलब है कि बीते दिनों महेंद्रगढ़ में हुए बस हादसे से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि निजी स्कूल सुरक्षित वाहन पॉलिसी का पालन करते हैं। जिस दिन यह हादसा हुआ उस दिन ईद का पर्व था, जिसकी सरकार ने भी छुट्टी घोषित की थी, लेकिन निजी स्कूल संचालकों ने बच्चों को स्कूलों में बुलाया था। बीच रास्ते में बस दुर्घटना होने पर छह बच्चों की मौत हो गई थी और करीब 15 बच्चे घायल हो गए थे।
आरटीए बीते 15 दिनों से निजी स्कूल बसों की जांच कर रहा है। 30 प्रतिशत बसों में खामियां मिल रही है। स्कूल संचालक भी जिन बसों में खामियां है उनको छिपाने का प्रयास कर रहे हैं। कई बार बार चेकिंग के बाद खामियां पाई जाती है, लेकिन दुरुस्त नहीं करा रहे।
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बसों में सीसीटीवी कैमरे काम न करने, बसों के टायर सही न होने, हॉर्न सही न होना, फर्स्ट एड बॉक्स न होने सहित अन्य खामियां मिल रही है। इन सभी स्कूल बसों के चालकों को 28 अप्रैल तक खामियां को दुरुस्त करने का समय दिया है। यदि इसके बाद भी दुरुस्त नहीं हुई तो नियमानुसार बसों पर कार्रवाई की जाएगी। जिले में लगभग 1500 के करीब स्कूल बसों की संख्या है।
अब तक कैथल में लगभग 110 बसों की ही जांच की गई है। अब 27 व 28 अप्रैल को भी आरटीए कार्यालय में अधिकारी स्कूल बसों की जांच करेंगे। सभी निजी स्कूल संचालकों को बसों की फिटनेस जांच करवाने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
27 व 28 अप्रैल को स्कूल बसों की फिटनेस जांच की जाएगी। खामियां मिली तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-शीशपाल, सचिव आरटीए।
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कैथल। जिले में पांच वर्ष में स्कूल बसों के साथ हुई हादसे में दो बच्चों की मौत हुई है। आखिर कौन है इन बच्चों की मौत का जिम्मेदार? अधिकांश स्कूल संचालक सुरक्षित वाहन पॉलिसी का पालन नहीं कर रहे। जिसके कारण से स्कूल बसों की दुर्घटना होने पर
इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है।
गौरतलब है कि बीते दिनों महेंद्रगढ़ में हुए बस हादसे से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि निजी स्कूल सुरक्षित वाहन पॉलिसी का पालन करते हैं। जिस दिन यह हादसा हुआ उस दिन ईद का पर्व था, जिसकी सरकार ने भी छुट्टी घोषित की थी, लेकिन निजी स्कूल संचालकों ने बच्चों को स्कूलों में बुलाया था। बीच रास्ते में बस दुर्घटना होने पर छह बच्चों की मौत हो गई थी और करीब 15 बच्चे घायल हो गए थे।
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आरटीए बीते 15 दिनों से निजी स्कूल बसों की जांच कर रहा है। 30 प्रतिशत बसों में खामियां मिल रही है। स्कूल संचालक भी जिन बसों में खामियां है उनको छिपाने का प्रयास कर रहे हैं। कई बार बार चेकिंग के बाद खामियां पाई जाती है, लेकिन दुरुस्त नहीं करा रहे।
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बसों में सीसीटीवी कैमरे काम न करने, बसों के टायर सही न होने, हॉर्न सही न होना, फर्स्ट एड बॉक्स न होने सहित अन्य खामियां मिल रही है। इन सभी स्कूल बसों के चालकों को 28 अप्रैल तक खामियां को दुरुस्त करने का समय दिया है। यदि इसके बाद भी दुरुस्त नहीं हुई तो नियमानुसार बसों पर कार्रवाई की जाएगी। जिले में लगभग 1500 के करीब स्कूल बसों की संख्या है।
अब तक कैथल में लगभग 110 बसों की ही जांच की गई है। अब 27 व 28 अप्रैल को भी आरटीए कार्यालय में अधिकारी स्कूल बसों की जांच करेंगे। सभी निजी स्कूल संचालकों को बसों की फिटनेस जांच करवाने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
27 व 28 अप्रैल को स्कूल बसों की फिटनेस जांच की जाएगी। खामियां मिली तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-शीशपाल, सचिव आरटीए।