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Kaithal News: साहिल ने जाते-जाते चार की जिंदगी में बिखेरी खुशियां

Mon, 18 Mar 2024 02:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Mon, 18 Mar 2024 02:49 AM IST
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Sahil spread happiness in the lives of four while leaving.

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माई सिटी रिपोर्टर

कैथल/चंडीगढ़। हरियाणा के कैथल निवासी 20 साल के साहिल ने दुनिया से जाते हुए भी चार लोगों की जिंदगी में खुशियां बिखेरी हैं। 10 मार्च को सड़क दुर्घटना में घायल होने पर साहिल को सिर में आई गंभीर चोट के कारण निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां से 10 मार्च को ही पीजीआई रेफर कर दिया गया।

डॉक्टरों ने इलाज के दौरान 13 मार्च को साहिल को ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद परिजनों की सहमति से साहिल का अंगदान कराया गया। अंगदान में मिले हृदय को ग्रीन कॉरिडोर से चेन्नई भेजा गया, जबकि दोनों कॉर्निया और एक किडनी पीजीआई में पंजीकृत तीन मरीजों को प्रत्यारोपित किया गया।
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पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने अंगदाता परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि साहिल के परिवार की ओर से किया गया दान परोपकारिता के गहरे प्रभाव और त्रासदी को जीवन के अवसर में बदलने की ताकत का प्रमाण है। प्रो. विवेक का कहना है कि अपने ही परिवार के सदस्य की दुखद मृत्यु के बीच, कुछ अजनबियों की जान बचाने के बारे में सोचना अप्रत्याशित और अकल्पनीय है। उनके प्रति आभार व्यक्त करने के लिए कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं हैं।
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नोटो के हस्तक्षेप से हृदय का हुआ मिलान ः अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद क्रॉस मैंचिग में हृदय का मिलान वाला मरीज न मिलने पर पीजीआई रोटो ने नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (नोटो) के हस्तक्षेप से चेन्नई में भर्ती एक मिलान प्राप्तकर्ता को हृदय वंटित किया गया।

साहिल के हृदय को 13 मार्च को शाम 4 बजे की उड़ान से चेन्नई के लिए एयरलिफ्ट किया गया। पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक और रोटो के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल ने बताया कि पीजीआई सुरक्षा, यूटी प्रशासन और पुलिस के सहयोग और संपर्क से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इसके बाद यह संभव हो पाया। वहीं, एक किडनी पंजीकृत मरीज को प्रत्यारोपित की गई, जबकि दूसरी किडनी प्रत्यारोपण योग्य नहीं पाई गई।



पिता ने कहा, अंगदान से मिली सांत्वना

पिता का कहना है कि अपने बेटे के अंगों को दान कर इस बात की सांत्वना मिली है कि उससे दूसरों को जीवन का नया मौका मिलेगा। हमने ऐसा इसलिए किया है ताकि हमारा बेटा दूसरों के माध्यम से जीवित रहे। हम अंगदान करने वाले लोगों को यह एहसास कराने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं कि मृत्यु चीजों का अंत नहीं है, लोग दूसरों के माध्यम से जीवित रह सकते हैं।




जानें क्या है ब्रेन डेड

ब्रेन डेड का मतलब है कि दिमाग काम करना बंद दे। ऐसे लोग कोई भी प्रतिक्रिया नहीं करते हैं। कोई भी उपचार उनकी मदद नहीं कर सकता है। एक बार निदान की पुष्टि हो जाने के बाद, एक व्यक्ति को कानूनी रूप से मृत माना जाता है। ब्रेनडेथ के बाद किसी व्यकि्त के आंतरिक अंगों का दान किया जा सकता है। एक ब्रेन डेड व्यक्ति की दिल की धड़कन कृत्रिम रूप से लगभग 36 से 72 घंटे तक रखी जा सकती है।
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