{"_id":"5f8352088ebc3e9b874ed8d8","slug":"rice-sell-kaithal-news-knl472211177","type":"story","status":"publish","title_hn":"धान से अटी मंडी, कीमत कम मिलने से किसान मायूस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धान से अटी मंडी, कीमत कम मिलने से किसान मायूस
विज्ञापन
rice sell
- फोटो : Kaithal
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
। बीते कुछ दिनों से मंडी में धान 1509 की आवक ने जोर पकड़ा हुआ है। पिछले साल के मुकाबले इस बार भाव कम होने से किसान मायूस नजर आ रहे हैं। बीते साल की अपेक्षा किसानों को 700 से 800 रुपये प्रति क्विंटल भाव कम मिल रहा है। पिछले साल इन दिनों किसानों को मंडी में धान 1509 के 2600 रुपए प्रति क्विंटल से 2800 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहे थे। इस बार भाव 1700 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक है। किसानों का कहना है कि पहले ही खेती घाटे का सौदा बन रही है। इस बार भाव कम होने से उनको आर्थिक नुकसान हो रहा है। सीजन की शुरूआत से ही ये भाव धान 1509 के मिल रहे हैं। बीच में 100-200 की तेजी जरूर आई थी, लेकिन अब फिर दुबारा इस धान में मंदा आ गया है।
धान की फसल किसानों के लिए बन गई घाटे का सौदा- किसान सुरेंद्र कुमार, मनोज कुमार, बीरभान सैनी, राजेश शर्मा ने बताया कि खेती पर साल दर साल खर्चा बढ़ रहा है। धान की फसल किसानों के लिए घाटे का सौदा बन गई है। ऐसा ही चलता रहा तो किसान खेती की जगह अन्य कार्य करने को मजबूर होंगे। फसल के भाव तो कम हो रहे हैं, लेकिन खाद, बीज, दवा के भाव बढ़ रहे हैं। किसान आढ़ती, बैंक का कर्ज भी भाव कम मिलने से नहीं दे पा रहा है। किसान की आमदन तो दोगुना करने की बात की जाती है, लेकिन आमदन बढ़ने की बजाए कम होने लगी है। भाव कम होने के चलते धान खरीददार भी बीते साल से कम हैं।
सचिव अभिनव वालिया ने कहा कि इस बार बीते साल की अपेक्षा धान 1509 के भाव कम हैं। विभाग द्वारा किसानों को मार्के रेट मिले इस लिए प्रतिदिन बोली करवाई जाती है, जिससे किसान को अपनी फसल का उचित दाम मिल सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
धान की फसल किसानों के लिए बन गई घाटे का सौदा- किसान सुरेंद्र कुमार, मनोज कुमार, बीरभान सैनी, राजेश शर्मा ने बताया कि खेती पर साल दर साल खर्चा बढ़ रहा है। धान की फसल किसानों के लिए घाटे का सौदा बन गई है। ऐसा ही चलता रहा तो किसान खेती की जगह अन्य कार्य करने को मजबूर होंगे। फसल के भाव तो कम हो रहे हैं, लेकिन खाद, बीज, दवा के भाव बढ़ रहे हैं। किसान आढ़ती, बैंक का कर्ज भी भाव कम मिलने से नहीं दे पा रहा है। किसान की आमदन तो दोगुना करने की बात की जाती है, लेकिन आमदन बढ़ने की बजाए कम होने लगी है। भाव कम होने के चलते धान खरीददार भी बीते साल से कम हैं।
विज्ञापन
सचिव अभिनव वालिया ने कहा कि इस बार बीते साल की अपेक्षा धान 1509 के भाव कम हैं। विभाग द्वारा किसानों को मार्के रेट मिले इस लिए प्रतिदिन बोली करवाई जाती है, जिससे किसान को अपनी फसल का उचित दाम मिल सके।
विज्ञापन