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Kaithal News: रणदीप और आदित्य सुरजेवाला ने किया कैथल मंडी का दौरा
Mon, 21 Apr 2025 02:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 21 Apr 2025 02:37 AM IST
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कैथल। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला व कैथल के विधायक आदित्य सुरजेवाला ने रविवार को कैथल की नई व अतिरिक्त अनाज मंडी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मजदूरों, किसानाें और आढ़तियों की समस्याएं जानीं।
रणदीप सुरजेवाला व आदित्य सुरजेवाला ने कहा कि बदइंतजामी के चलते हरियाणा की मंडियों में न गेहूं की फसल का उठान हो रहा और न ही किसान का भुगतान हो रहा। मजदूर मजदूरी के लिए तरस रहे हैं और आढ़ती बारदाने (भराई के लिए खाली कट्टे) से लेकर उठान न होने से परेशान हैं।
उन्होंने कहा कि पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, अंबाला, कैथल - लगभग सभी अनाज मंडियों में गेहूं के ढेर लगे हुए हैं पर भराई के लिए कट्टे हैं और न ही फसल उठाने का कोई इंतजाम। खुले में पड़ी फसल के कारण किसान परेशान हैं। किसान की फसल को यह कहकर नहीं खरीदा जाता कि नमी की मात्रा अधिक है। उन्होंंने कहा कि पिहोवा और गुहला-चीका में कई एकड़ फसल, तूड़ी के कूप, मकान व मवेशी जल गए पर सरकार की ओर से कोई भी अधिकारी और नेता मौके पर नहीं पहुंचा।
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सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस सरकार में हर रोज 90 हजार बोरी तक का उठान होता था और मजदूरों को पूरी मजदूरी मिलती थी। अब चार से पांच दिन तक उठान की बारी ही नहीं आती, तो मजदूर को मजदूरी कहां से मिलेगी? जब तक गेहूं का उठान होकर पूरी गेहूं गोदाम तक नहीं पहुंच जाती, सरकार के मापदंडों के मुताबिक उसका भुगतान नहीं होता। ऐसे में जब अगले एक से दो महीने तक गेहूं उठान का कोई अंदेशा ही नहीं, तो किसान का भुगतान कैसे होगा, मजदूर को मजदूरी कैसे मिलेगी और आढ़ती को आढ़त कैसे मिलेगी?
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रणदीप सुरजेवाला व आदित्य सुरजेवाला ने कहा कि बदइंतजामी के चलते हरियाणा की मंडियों में न गेहूं की फसल का उठान हो रहा और न ही किसान का भुगतान हो रहा। मजदूर मजदूरी के लिए तरस रहे हैं और आढ़ती बारदाने (भराई के लिए खाली कट्टे) से लेकर उठान न होने से परेशान हैं।
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उन्होंने कहा कि पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, अंबाला, कैथल - लगभग सभी अनाज मंडियों में गेहूं के ढेर लगे हुए हैं पर भराई के लिए कट्टे हैं और न ही फसल उठाने का कोई इंतजाम। खुले में पड़ी फसल के कारण किसान परेशान हैं। किसान की फसल को यह कहकर नहीं खरीदा जाता कि नमी की मात्रा अधिक है। उन्होंंने कहा कि पिहोवा और गुहला-चीका में कई एकड़ फसल, तूड़ी के कूप, मकान व मवेशी जल गए पर सरकार की ओर से कोई भी अधिकारी और नेता मौके पर नहीं पहुंचा।
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सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस सरकार में हर रोज 90 हजार बोरी तक का उठान होता था और मजदूरों को पूरी मजदूरी मिलती थी। अब चार से पांच दिन तक उठान की बारी ही नहीं आती, तो मजदूर को मजदूरी कहां से मिलेगी? जब तक गेहूं का उठान होकर पूरी गेहूं गोदाम तक नहीं पहुंच जाती, सरकार के मापदंडों के मुताबिक उसका भुगतान नहीं होता। ऐसे में जब अगले एक से दो महीने तक गेहूं उठान का कोई अंदेशा ही नहीं, तो किसान का भुगतान कैसे होगा, मजदूर को मजदूरी कैसे मिलेगी और आढ़ती को आढ़त कैसे मिलेगी?