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Kaithal News: बुक बैंक स्थापित कर मुहैया करा रहे पुस्तकें
Sat, 06 Apr 2024 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 06 Apr 2024 02:05 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। निजी स्कूलों की मनमानी के विपरीत स्टूडेंट पेरेंट्स संगठन ने एक अनूठी पहल की है। संगठन के सदस्य पिछले चार वर्षों से मिलकर पुरानी पुस्तकें एकत्र कर जरूरतमंद बच्चों में निशुल्क वितरण कर रहे हैं। संगठन में लगभग 12 सदस्य हैं, जो कि मिलकर यह सेवा कर रहे हैं। यह बुक बैंक गोगा माड़ी के निकट अग्रसेन मार्केट दुकान नंबर 20 में है।
संगठन के सदस्य विद्यार्थियों के हित के लिए विभिन्न अभियान चलाते रहते हैं। संगठन के सदस्य निजी स्कूलों द्वारा वसूली जा रही बेवजह दाखिला फीस व महंगी किताबों को लेकर भी कई वर्षों से विरोध कर रहे हैं।
स्टूडेंट पेरेंट्स संगठन के प्रधान मनजीत सिंह, उपप्रधान अनिल खुराना सचिव गुरमीत सिंह कोषाध्यक्ष लखविंदर सिंह सहित अन्य सदस्यों ने बताया कि संगठन के सदस्यों ने एक व्हाट्सएप ग्रुप व फेसबुक पर भी स्टूडेंट पेरेंट्स वेलफेयर के नाम से बनाया गया है। जिसमें समय-समय पर किताबों की जानकारी दी जाती है। इसके अलावा व्हाट्सएप ग्रुप में करीब 1400 अभिभावक जुड़े हैं।
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ग्रुप में एक संदेश छोड़ा जाता है कि सभी सदस्य अपने बच्चों की फाइनल परीक्षा के बाद पिछले वर्ष की किताबें एकत्रित कर बुक बैंक में अपनी इच्छा अनुसार जमा करवा दें, ताकि जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क वितरित कर सके। जिस अभिभावकों को अगली कक्षा में बच्चों के लिए किताबों की जरूरत है, वो यहां बैंक से ले जाए। इसके लिए स्टूडेंट पेरेंट्स संगठन ने पिछले चार वर्ष पहले एक दुकान पर बुक एक्सचेंज बैंक बनाया।
फाइनल परीक्षा के बाद पहली कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक सैकड़ों सेट एकत्रित किए जाते हैं। गुरमीत सिंह ने बताया कि संगठन पिछले चार वर्षो में लगभग दो हजार किताबों के सेट जरूरतमंदों को निशुल्क वितरण कर चुका है। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि फाइनल परिणाम आने पर उत्तीर्ण हुए विद्यार्थी अपनी पिछले वर्ष की किताबें बुक एक्सचेंज बैंक में जमा करवा दें या दान में दें ताकि जरूरतमंद बच्चों को किताबें मिल सके। अगर किसी बच्चों को अगली कक्षा के लिए किताबें चाहिए तो यहां आकर निशुल्क ले जा सकता है।
संगठन सदस्यों ने कहा कि यदि किसी अभिभावक को अपने बच्चों की पुरानी पुस्तकें जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए देनी हैं तो वे अग्रसेन मार्केट में उनके कार्यालय में आकर संपर्क कर सकते हैं। ताकि उन्हें आगे जरूरतमंद बच्चों निशुल्क वितरण की जा सके। अगर जो अभिभावक किताबें दुकान पर पहुंचाने में असमर्थ है तो संगठन के सदस्य स्वयं उनके पास जाकर किताबें ले आएंगे।
शुक्रवार को बुक बैंक में किताबें देने पहुंचे अभिभावक गुरनाम, अशोक, संदीप, पवन ने बताया कि यह स्टूडेंट पेरेंट्स संगठन कुछ पिछले चार वर्षों से बुक बैंक के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क किताबें वितरण कर बड़ा सराहनीय कार्य कर रहा है। इनको देखते हुए ओर लोगों को भी इनका साथ देना चाहिए, ताकि किसी जरूरतमंदों बच्चों का भला हो सके। अगर लोग ज्यादा से ज्यादा किताबें देकर सहायता करेंगे तो उतना ही शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
मित्र से प्रेरित हो बुक बैंक से सेवा करने की ठानी
संगठन सचिव गुरमीत सिंह ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व मेरे मित्र मोनू बत्रा ने मुझे बुक बैंक में सेवा करने की राह दिखाई। मैंने जरूरतमंदों की सेवा करने की ठानी। अब मेरा मित्र चंढीगड़ में शिफ्ट हो गया है। उनसे प्रेरित होकर मैं सेवा कार्य में जुड़ गया। और इसके साथ-साथ मैं स्वयं बड़ी बीमारी के कारण अस्वस्थ हो गया था ओर चिकित्सकों ने मुझे बाईपास सर्जरी की सलाह दी थी। बिमारी के कारण मुझे लगा की पता नहीं अब मेरी जिंदगी आगे रहे न रहे पर मैंने सर्जरी नहीं करवाई और बच्चों की सेवा कार्य में जुट गया। भगवान की दया व बच्चों की दुआओं के कारण से मैं अभी तक यूं ही संगठन के सभी साथियों के साथ मिलकर सेवा कर रहा हूं।
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कैथल। निजी स्कूलों की मनमानी के विपरीत स्टूडेंट पेरेंट्स संगठन ने एक अनूठी पहल की है। संगठन के सदस्य पिछले चार वर्षों से मिलकर पुरानी पुस्तकें एकत्र कर जरूरतमंद बच्चों में निशुल्क वितरण कर रहे हैं। संगठन में लगभग 12 सदस्य हैं, जो कि मिलकर यह सेवा कर रहे हैं। यह बुक बैंक गोगा माड़ी के निकट अग्रसेन मार्केट दुकान नंबर 20 में है।
संगठन के सदस्य विद्यार्थियों के हित के लिए विभिन्न अभियान चलाते रहते हैं। संगठन के सदस्य निजी स्कूलों द्वारा वसूली जा रही बेवजह दाखिला फीस व महंगी किताबों को लेकर भी कई वर्षों से विरोध कर रहे हैं।
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स्टूडेंट पेरेंट्स संगठन के प्रधान मनजीत सिंह, उपप्रधान अनिल खुराना सचिव गुरमीत सिंह कोषाध्यक्ष लखविंदर सिंह सहित अन्य सदस्यों ने बताया कि संगठन के सदस्यों ने एक व्हाट्सएप ग्रुप व फेसबुक पर भी स्टूडेंट पेरेंट्स वेलफेयर के नाम से बनाया गया है। जिसमें समय-समय पर किताबों की जानकारी दी जाती है। इसके अलावा व्हाट्सएप ग्रुप में करीब 1400 अभिभावक जुड़े हैं।
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ग्रुप में एक संदेश छोड़ा जाता है कि सभी सदस्य अपने बच्चों की फाइनल परीक्षा के बाद पिछले वर्ष की किताबें एकत्रित कर बुक बैंक में अपनी इच्छा अनुसार जमा करवा दें, ताकि जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क वितरित कर सके। जिस अभिभावकों को अगली कक्षा में बच्चों के लिए किताबों की जरूरत है, वो यहां बैंक से ले जाए। इसके लिए स्टूडेंट पेरेंट्स संगठन ने पिछले चार वर्ष पहले एक दुकान पर बुक एक्सचेंज बैंक बनाया।
फाइनल परीक्षा के बाद पहली कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक सैकड़ों सेट एकत्रित किए जाते हैं। गुरमीत सिंह ने बताया कि संगठन पिछले चार वर्षो में लगभग दो हजार किताबों के सेट जरूरतमंदों को निशुल्क वितरण कर चुका है। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि फाइनल परिणाम आने पर उत्तीर्ण हुए विद्यार्थी अपनी पिछले वर्ष की किताबें बुक एक्सचेंज बैंक में जमा करवा दें या दान में दें ताकि जरूरतमंद बच्चों को किताबें मिल सके। अगर किसी बच्चों को अगली कक्षा के लिए किताबें चाहिए तो यहां आकर निशुल्क ले जा सकता है।
संगठन सदस्यों ने कहा कि यदि किसी अभिभावक को अपने बच्चों की पुरानी पुस्तकें जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए देनी हैं तो वे अग्रसेन मार्केट में उनके कार्यालय में आकर संपर्क कर सकते हैं। ताकि उन्हें आगे जरूरतमंद बच्चों निशुल्क वितरण की जा सके। अगर जो अभिभावक किताबें दुकान पर पहुंचाने में असमर्थ है तो संगठन के सदस्य स्वयं उनके पास जाकर किताबें ले आएंगे।
शुक्रवार को बुक बैंक में किताबें देने पहुंचे अभिभावक गुरनाम, अशोक, संदीप, पवन ने बताया कि यह स्टूडेंट पेरेंट्स संगठन कुछ पिछले चार वर्षों से बुक बैंक के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क किताबें वितरण कर बड़ा सराहनीय कार्य कर रहा है। इनको देखते हुए ओर लोगों को भी इनका साथ देना चाहिए, ताकि किसी जरूरतमंदों बच्चों का भला हो सके। अगर लोग ज्यादा से ज्यादा किताबें देकर सहायता करेंगे तो उतना ही शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
मित्र से प्रेरित हो बुक बैंक से सेवा करने की ठानी
संगठन सचिव गुरमीत सिंह ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व मेरे मित्र मोनू बत्रा ने मुझे बुक बैंक में सेवा करने की राह दिखाई। मैंने जरूरतमंदों की सेवा करने की ठानी। अब मेरा मित्र चंढीगड़ में शिफ्ट हो गया है। उनसे प्रेरित होकर मैं सेवा कार्य में जुड़ गया। और इसके साथ-साथ मैं स्वयं बड़ी बीमारी के कारण अस्वस्थ हो गया था ओर चिकित्सकों ने मुझे बाईपास सर्जरी की सलाह दी थी। बिमारी के कारण मुझे लगा की पता नहीं अब मेरी जिंदगी आगे रहे न रहे पर मैंने सर्जरी नहीं करवाई और बच्चों की सेवा कार्य में जुट गया। भगवान की दया व बच्चों की दुआओं के कारण से मैं अभी तक यूं ही संगठन के सभी साथियों के साथ मिलकर सेवा कर रहा हूं।