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Kaithal News: ब्रह्मानंद की जन्मस्थली में निकाली शोभायात्रा
Tue, 24 Dec 2024 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 24 Dec 2024 12:47 AM IST
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
ढांड। गुरु ब्रह्मानंद के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर उनकी जन्मस्थली चूहड़माजरा में शोभायात्रा निकाली गई। इसमें महिलाएं,पुरुष तथा बच्चे पचरंगा झंडा हाथों में लिए ओम् तत्तसत, ओम् गुरुजी के जयकारे लगे।
शोभायात्रा गुरु ब्रह्मानंद मंदिर से प्रारंभ होकर गांव की गलियों से होती हुई गुरु ब्रह्मानंद न्याय चबूतरा श्मशान भूमि में पहुंची। जहां महिलाओं ने पूजा अर्चना की और गुरु के जीवन पर आधारित भजन-कीर्तन किए। इसके बाद शोभायात्रा वापस गुरु ब्रह्मानंद मंदिर में संपन्न हुई। इस अवसर पर गुरु ब्रह्मानंद न्याय चबूतरा श्मशान भूमि के महत्व के बारे में बताते हुए स्वामी जगदीशानंद ने कहा कि इस भूमि पर हरे-भरे पेड़ों के बीच गुरु ब्रह्मानंद आश्रम बनाकर रहते थे। 1967 में यहां पर एक पीपल का पेड़ अचानक सूख गया। उसे देखकर गुरु जी चिंतित हो गए। उन्होंने दो महीने तक यज्ञ एवं भंडारा किया। इससे सूख हुआ पीपल का पेड़ हरा हो गया और यह आज भी उसी स्थान पर खड़ा हुआ है, जहां महिलाएं आज भी उस पीपल के पेड़ की पूजा करती उस दिन से गुरु ने उस श्मशान भूमि का नाम न्याय चबूतरा रख दिया था। जिससे इस स्थान को नाम गुरु ब्रह्मानंद न्याय चबूतरा श्मशान भूमि कहने लगे।
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ढांड। गुरु ब्रह्मानंद के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर उनकी जन्मस्थली चूहड़माजरा में शोभायात्रा निकाली गई। इसमें महिलाएं,पुरुष तथा बच्चे पचरंगा झंडा हाथों में लिए ओम् तत्तसत, ओम् गुरुजी के जयकारे लगे।
शोभायात्रा गुरु ब्रह्मानंद मंदिर से प्रारंभ होकर गांव की गलियों से होती हुई गुरु ब्रह्मानंद न्याय चबूतरा श्मशान भूमि में पहुंची। जहां महिलाओं ने पूजा अर्चना की और गुरु के जीवन पर आधारित भजन-कीर्तन किए। इसके बाद शोभायात्रा वापस गुरु ब्रह्मानंद मंदिर में संपन्न हुई। इस अवसर पर गुरु ब्रह्मानंद न्याय चबूतरा श्मशान भूमि के महत्व के बारे में बताते हुए स्वामी जगदीशानंद ने कहा कि इस भूमि पर हरे-भरे पेड़ों के बीच गुरु ब्रह्मानंद आश्रम बनाकर रहते थे। 1967 में यहां पर एक पीपल का पेड़ अचानक सूख गया। उसे देखकर गुरु जी चिंतित हो गए। उन्होंने दो महीने तक यज्ञ एवं भंडारा किया। इससे सूख हुआ पीपल का पेड़ हरा हो गया और यह आज भी उसी स्थान पर खड़ा हुआ है, जहां महिलाएं आज भी उस पीपल के पेड़ की पूजा करती उस दिन से गुरु ने उस श्मशान भूमि का नाम न्याय चबूतरा रख दिया था। जिससे इस स्थान को नाम गुरु ब्रह्मानंद न्याय चबूतरा श्मशान भूमि कहने लगे।
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