{"_id":"697e616b096bf26b270bd3e8","slug":"parikrama-was-conducted-in-kaul-village-for-the-installation-of-the-statue-of-danveer-karna-kaithal-news-c-18-1-knl1004-836396-2026-02-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: दानवीर कर्ण की मूर्ति स्थापना के लिए कौल गांव में कराई परिक्रमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: दानवीर कर्ण की मूर्ति स्थापना के लिए कौल गांव में कराई परिक्रमा
Sun, 01 Feb 2026 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 01 Feb 2026 01:39 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज़ एजेंसी
ढांड। दानवीर कर्ण की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा को लेकर गांव कौल के गढ़रथेश्वर तीर्थ स्थल पर कार्यक्रम का आयोजित किया गया। दानवीर कर्ण की रथ के पहिए के साथ विशाल मूर्ति को वाहन में सजाकर पूरे गांव में परिक्रमा करवाई गई। इस दौरान ग्रामीणों ने जगह-जगह फूलों की वर्षा करके मूर्ति का स्वागत किया। पूरे गांव की परिक्रमा करवाने के बाद शोभायात्रा वापस गढ़रथेश्वर तीर्थ में संपन्न हुई। शोभा यात्रा के दौरान महिलाएं झूमते गाते हुए शोभा यात्रा को चार चांद लगा रही थी।
कौरवों और पांडवों के बीच कुरुक्षेत्र की भूमि पर हुए महाभारत युद्ध के वर्णन का जिक्र करते हुए महंत रामदास ने बताया की गढ़रथेश्वर तीर्थ वही स्थान है जहां युद्ध के 17 वें दिन कर्ण के रथ का पहिया जमीन में धंस गया था। उस समय भगवान श्री कृष्ण से प्रेरित होकर अर्जुन ने अंजलिकास्त्र से कर्ण का वध किया, जिससे उसका सिर धड़ से अलग हो गया और उसकी मृत्यु हो गई। महंत रामदास महाराज ने बताया कि 1 फरवरी रविवार को सुबह नौ बजे हवन का आयोजन कर मूर्ति को तीर्थ पर स्थापित किया जाएगा। उसके बाद 12 बजे से प्रभु इच्छा तक भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
विज्ञापन
ढांड। दानवीर कर्ण की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा को लेकर गांव कौल के गढ़रथेश्वर तीर्थ स्थल पर कार्यक्रम का आयोजित किया गया। दानवीर कर्ण की रथ के पहिए के साथ विशाल मूर्ति को वाहन में सजाकर पूरे गांव में परिक्रमा करवाई गई। इस दौरान ग्रामीणों ने जगह-जगह फूलों की वर्षा करके मूर्ति का स्वागत किया। पूरे गांव की परिक्रमा करवाने के बाद शोभायात्रा वापस गढ़रथेश्वर तीर्थ में संपन्न हुई। शोभा यात्रा के दौरान महिलाएं झूमते गाते हुए शोभा यात्रा को चार चांद लगा रही थी।
कौरवों और पांडवों के बीच कुरुक्षेत्र की भूमि पर हुए महाभारत युद्ध के वर्णन का जिक्र करते हुए महंत रामदास ने बताया की गढ़रथेश्वर तीर्थ वही स्थान है जहां युद्ध के 17 वें दिन कर्ण के रथ का पहिया जमीन में धंस गया था। उस समय भगवान श्री कृष्ण से प्रेरित होकर अर्जुन ने अंजलिकास्त्र से कर्ण का वध किया, जिससे उसका सिर धड़ से अलग हो गया और उसकी मृत्यु हो गई। महंत रामदास महाराज ने बताया कि 1 फरवरी रविवार को सुबह नौ बजे हवन का आयोजन कर मूर्ति को तीर्थ पर स्थापित किया जाएगा। उसके बाद 12 बजे से प्रभु इच्छा तक भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
विज्ञापन