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Kaithal News: नौ साल में 1.78 लाख से ज्यादा जांच मस्तिष्क और अन्य तपेदिक के केस बढ़े
Sat, 17 Jan 2026 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 17 Jan 2026 12:41 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। तपेदिक या क्षय रोग (टीबी की बीमारी) अब फेफड़ों तक सीमित नहीं रह गई है। टीबी के बैक्टीरिया फेफड़ों से होते हुए दिमाग में भी घर कर रहे हैं, जिससे मरीजों की जान को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। स्वास्थ्य के मुताबिक, नौ साल में 1.78 लाख से ज्यादा की गई मरीजों की जांच में ब्रेन टीबी और एक्स्ट्रापल्मोनरी केस बढ़े मिले हैं।
स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकों की ओर से की जा रही जांच में ऐसे कई मरीज सामने आए हैं, जिनमें टीबी दिमाग, आंखों और नसों तक फैल चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से 2025 तक जिले में 1 लाख 78 हजार 690 लोगों की टीबी जांच की गई।
हाल के वर्षों में ब्रेन टीबी यानी ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा गया है। इस बीमारी में टीबी के बैक्टीरिया मस्तिष्क और उसकी झिल्लियों में सूजन या गांठ बना देते हैं। इसके कारण तेज सिरदर्द, लगातार बुखार, भ्रम की स्थिति, दौरे पड़ना जैसी समस्याएं होती हैं। समय रहते इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है।
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चिकित्सकों के अनुसार टीबी पैदा करने वाला बैक्टीरिया माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस खून के माध्यम से फेफड़ों से दिमाग तक पहुंचता है। यह दिमाग की झिल्लियों में सूजन पैदा कर मस्तिष्क के ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा टीबी रक्तप्रवाह के जरिये आंखों, नसों और शरीर के अन्य अंगों में भी फैल सकती है, जिसे एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी कहा जाता है।
यह बीमारी कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में अधिक देखने को मिलती है। वर्ष 2025 में टीबी के 1192 नए रोगी सामने आए हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। जिन मरीजों को दो सप्ताह से अधिक समय से खांसी आ रही है उनके बलगम की जांच अवश्य करवानी चाहिए ताकि उनकी बीमारी का पता चलते ही उनका उपचार शुरू किया जा सके।
वर्ष 2025 में जिले में टीबी के 1192 नए रोगी सामने आए हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है।
ये हैं टीबी के प्रमुख प्रकार
पल्मोनरी टीबी:
यह सबसे सामान्य प्रकार की टीबी है, जिसमें मुख्य रूप से फेफड़े प्रभावित होते हैं।
एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी:
इस प्रकार में टीबी फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों जैसे रीढ़ की हड्डी, किडनी, लिम्फ नोड्स और दिमाग को प्रभावित करती है।
मिलिटरी टीबी:
इसमें बैक्टीरिया खून के माध्यम से पूरे शरीर में फैल जाता है और अलग-अलग अंगों में छोटे-छोटे ग्रैन्युलोमा बन जाते हैं।
लेटेंट टीबी इंफेक्शन:
इसमें व्यक्ति में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन भविष्य में यह सक्रिय टीबी में बदल सकती है।
ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी:
जब टीबी बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं, तो इसे ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी कहा जाता है। इसमें मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट और एक्सटेंसिवली ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी शामिल हैं।
ब्रेन टीबी के प्रमुख लक्षण
लंबे समय तक रहने वाला सिरदर्द
कमजोरी, चिड़चिड़ापन और अत्यधिक आलस
बुखार और ठंड लगना
मतली और उल्टी
भ्रम की स्थिति, दौरे पड़ना या बेहोशी
गर्दन में अकड़न
गत वर्षों में टीबी जांच का आंकड़ा
वर्ष : जांच
2017 : 10,504
2018 : 10,667
2019 : 10,016
2020 : 8,928
2021 : 11,308
2022 : 20,671
2023 : 27,141
2024 : 32,964
2025 : 46,491
नोट: आंकड़े स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त।
ये कहते हैं डिप्टी सीएमओ
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. संदीप बातिश ने बताया कि टीबी फेफड़ों के अलावा दिमाग, आंखों और नसों में भी हो सकती है। हाल के वर्षों में जांच के दौरान ऐसे मरीज सामने आए हैं। कई मरीज दवा बीच में ही छोड़ देते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। यदि दवा और परहेज का पूरा कोर्स किया जाए, तो टीबी को पूरी तरह मात देना संभव है।
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कैथल। तपेदिक या क्षय रोग (टीबी की बीमारी) अब फेफड़ों तक सीमित नहीं रह गई है। टीबी के बैक्टीरिया फेफड़ों से होते हुए दिमाग में भी घर कर रहे हैं, जिससे मरीजों की जान को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। स्वास्थ्य के मुताबिक, नौ साल में 1.78 लाख से ज्यादा की गई मरीजों की जांच में ब्रेन टीबी और एक्स्ट्रापल्मोनरी केस बढ़े मिले हैं।
स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकों की ओर से की जा रही जांच में ऐसे कई मरीज सामने आए हैं, जिनमें टीबी दिमाग, आंखों और नसों तक फैल चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से 2025 तक जिले में 1 लाख 78 हजार 690 लोगों की टीबी जांच की गई।
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हाल के वर्षों में ब्रेन टीबी यानी ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा गया है। इस बीमारी में टीबी के बैक्टीरिया मस्तिष्क और उसकी झिल्लियों में सूजन या गांठ बना देते हैं। इसके कारण तेज सिरदर्द, लगातार बुखार, भ्रम की स्थिति, दौरे पड़ना जैसी समस्याएं होती हैं। समय रहते इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है।
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चिकित्सकों के अनुसार टीबी पैदा करने वाला बैक्टीरिया माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस खून के माध्यम से फेफड़ों से दिमाग तक पहुंचता है। यह दिमाग की झिल्लियों में सूजन पैदा कर मस्तिष्क के ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा टीबी रक्तप्रवाह के जरिये आंखों, नसों और शरीर के अन्य अंगों में भी फैल सकती है, जिसे एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी कहा जाता है।
यह बीमारी कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में अधिक देखने को मिलती है। वर्ष 2025 में टीबी के 1192 नए रोगी सामने आए हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। जिन मरीजों को दो सप्ताह से अधिक समय से खांसी आ रही है उनके बलगम की जांच अवश्य करवानी चाहिए ताकि उनकी बीमारी का पता चलते ही उनका उपचार शुरू किया जा सके।
वर्ष 2025 में जिले में टीबी के 1192 नए रोगी सामने आए हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है।
ये हैं टीबी के प्रमुख प्रकार
पल्मोनरी टीबी:
यह सबसे सामान्य प्रकार की टीबी है, जिसमें मुख्य रूप से फेफड़े प्रभावित होते हैं।
एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी:
इस प्रकार में टीबी फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों जैसे रीढ़ की हड्डी, किडनी, लिम्फ नोड्स और दिमाग को प्रभावित करती है।
मिलिटरी टीबी:
इसमें बैक्टीरिया खून के माध्यम से पूरे शरीर में फैल जाता है और अलग-अलग अंगों में छोटे-छोटे ग्रैन्युलोमा बन जाते हैं।
लेटेंट टीबी इंफेक्शन:
इसमें व्यक्ति में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन भविष्य में यह सक्रिय टीबी में बदल सकती है।
ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी:
जब टीबी बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं, तो इसे ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी कहा जाता है। इसमें मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट और एक्सटेंसिवली ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी शामिल हैं।
ब्रेन टीबी के प्रमुख लक्षण
लंबे समय तक रहने वाला सिरदर्द
कमजोरी, चिड़चिड़ापन और अत्यधिक आलस
बुखार और ठंड लगना
मतली और उल्टी
भ्रम की स्थिति, दौरे पड़ना या बेहोशी
गर्दन में अकड़न
गत वर्षों में टीबी जांच का आंकड़ा
वर्ष : जांच
2017 : 10,504
2018 : 10,667
2019 : 10,016
2020 : 8,928
2021 : 11,308
2022 : 20,671
2023 : 27,141
2024 : 32,964
2025 : 46,491
नोट: आंकड़े स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त।
ये कहते हैं डिप्टी सीएमओ
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. संदीप बातिश ने बताया कि टीबी फेफड़ों के अलावा दिमाग, आंखों और नसों में भी हो सकती है। हाल के वर्षों में जांच के दौरान ऐसे मरीज सामने आए हैं। कई मरीज दवा बीच में ही छोड़ देते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। यदि दवा और परहेज का पूरा कोर्स किया जाए, तो टीबी को पूरी तरह मात देना संभव है।