फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   OST center will be built in the hospital for drug de-addiction

Kaithal News: नशा छुड़वाने को अस्पताल में बनेगा ओएसटी सेंटर

Wed, 13 Sep 2023 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 13 Sep 2023 01:00 AM IST
विज्ञापन
OST center will be built in the hospital for drug de-addiction
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कैथल। स्वास्थ्य विभाग ने जिला नागरिक अस्पताल में युवाओं के लिए नशा छुड़वाने के लिए ओएसटी (ओपाएड सब्सटीट्यूशन थेरेपी) सेंटर खोला है। इस सेंटर के माध्यम से नशे के चंगुल में फंस चुके युवा नशा छुड़वाने के लिए यहां दवा लेने के लिए पहुंचते हैं। इस सेंटर में नशे की लत में आए युवकों को नशा छुड़वाने के लिए विशेष दवा दी जा रही है। उन्हें सेंटर की तरफ से एडोनिल दवा दी जा रही है।

पता चला है कि एक दिन में करीब 20 युवा नशा छुड़वाने के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकतर 18 से 22 साल के युवा हैं। इन उम्र के युवा ही अधिक चपेट में आ रहे हैं। अभी इस केंद्र में 80 युवाओं ने अपना पंजीकरण करवाया है। जबकि रेडक्रॉस ने कैथल और पूंडरी में करीब 1200 युवाओं के नशा करने की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी है।
विज्ञापन


इस ओएसटी सेंटर में चार स्वास्थ्य कर्मियों की ड्यूटियां लगाई गई हैं। इसमें एक एमबीबीएस डॉक्टर, एक नर्स, एक काउंसलर और एक डाटा ऑपरेटर लगाया गया है। जबकि एमबीबीएस डॉक्टर अंकाशा को इसका प्रभारी बनाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

काउंसलिंग में पता चला, दोस्तों से लगी लत

सेंटर की प्रभारी एमबीबीएस डॉक्टर आकांक्षा ने बताया कि उनके पास इस समय नशा छुड़वाने के लिए जो मरीज पहुंच रहे हैं। उनमें अधिकतर 18 से 22 साल के युवा शामिल है। डॉ. आकांक्षा ने बताया कि जब इन युवाओं की काउंसलिंग की जाती है तो यह अब नशा छुड़वाना चाहते हैं। नशे की लत लगा चुके इन युवाओं ने पहले तो अपने दोस्तों के कहने पर नशा करना शुरू किया। अब ये नशे से परेशान हो चुके हैं और पछता रहे हैं। उन्होंने बताया कि काउंसलिंग में चिट्टा नहीं, बल्कि पशुओं की बीमारी में लगने वाले इंजेक्शन लगाने की लत लगा चुके हैं। ये युवा ऐसे परिवारों से हैं, जो अपना पेट पालने के लिए मेहनत व मजदूरी करते हैं। डॉ. आकांक्षा ने बताया कि यह इंजेक्शन बहुत कम दाम में युवाओं को मिल जाता है। इनकी कीमत 200 से 300 रुपये की है जबकि स्मैक और चिट्टा अधिक महंगा है। ऐसे में यह युवा यह नशा आसानी से कर सकते हैं। युवा इस समय एडनॉक व पशुओं में लगाने वाली एविल का इंजेक्शन ले रहे हैं।

नशे का इंजेक्शन लगवाने वाले युवाओं पर इसका दुष्प्रभाव होना अधिक है। इस इंजेक्शन के लगने के बाद शरीर इसे दोबारा लगाने के लिए मजबूर करता है। परिवार के सदस्यों को जागरूक होना चाहिए। उन्हें नशा करने वाले युवा को समझाकर उसे डॉक्टर के पास लेकर जाना चाहिए। जो नशा छुड़वाना चाहता है, उसे काउंसलिंग करवानी चाहिए। ऐसी स्थिति में वे ढाई से तीन महीने के बीच नशा छोड़ सकता है। -डॉ. विवेक गर्ग, मनोरोग विशेषज्ञ
रेडक्रॉस नशे में फंसे युवाओं की करती है तलाश, फिर यहां लाती
नशे के चंगुल में फंस चुके युवाओं की तलाश का जिम्मा रेडक्रॉस ने लिया है। इसके लिए रेडक्रॉस की टीमें लगातार कार्य कर रही है। स्वास्थ्य विभाग से मिनी जानकारी के अनुसार कैथल व पूंडरी में रेडक्रॉस की टीमों ने नशा करने वाले करीब 1200 युवाओं की जानकारी जुटाई है। आंकड़ों के मुताबिक, इस सेंटर में अभी तक 80 युवाओं ने ही नशा छुड़वाने के लिए पंजीकरण करवाया है।


जिला नागरिक अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी डाॅ. सचिन मांडले ने कहा कि अस्पताल में ओएसटी (ओपाएड सब्सटीट्यूशन थेरेपी) सेंटर खोला गया है। इस सेंटर को खोलने का मुख्य उद्देश्य युवाओं में लगी नशे की लत को छुड़वाना है। यहां पर युवा नशा छुड़वाने के लिए पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed