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Kaithal News: बैंक का सामान अटैच करने के दिए आदेश
Tue, 22 Jul 2025 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 22 Jul 2025 12:47 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। उपभोक्ता की मृत्यु के बाद बीमा क्लेम न देने पर अदालत ने कैथल स्थित इंडसइंड बैंक के फर्नीचर, कंप्यूटर, स्टेशनरी व अन्य सामान को अटैच करने के आदेश जारी किए हैं। आरोप है कि बैंक ने उपभोक्ता की मृत्यु के बाद भी उसकी ऋण किश्तें वसूलना जारी रखा।
सिरसल गांव निवासी सत्या देवी के पति की मृत्यु हो गई थी। उन्होंने वाहन खरीदने के लिए इंडसइंड बैंक से ऋण लिया था। नियमानुसार उपभोक्ता की मृत्यु के बाद ऋण की भरपाई बीमा से की जाती है, लेकिन बैंक न केवल ऋण की किश्तें वसूलता रहा बल्कि उपभोक्ता के एटीएम कार्ड पर दर्ज दो लाख रुपये के बीमा क्लेम को भी देने से इन्कार कर दिया।
बार-बार आग्रह के बावजूद जब बैंक ने राशि नहीं दी तो मृतक की पत्नी सत्या देवी ने अदालत की शरण ली। अदालत ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन बैंक ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद महिला ने पुनः अदालत में याचिका दायर की। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए बैंक का फर्नीचर, कंप्यूटर, सांकेतिक बोर्ड, स्टेशनरी आदि सामान अटैच करने के आदेश दिए। आदेश लेकर न्यायालय के दो अधिवक्ता बैंक पहुंचे और अटैचमेंट की प्रक्रिया शुरू की। सूत्रों के अनुसार, यदि अब भी बैंक द्वारा भुगतान नहीं किया गया, तो अदालत इस मामले में और कड़ी कार्रवाई कर सकती है।
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यह मामला न केवल बैंक की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों की अनदेखी का भी प्रतीक है। मामले की अगली सुनवाई में बैंक अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
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कैथल। उपभोक्ता की मृत्यु के बाद बीमा क्लेम न देने पर अदालत ने कैथल स्थित इंडसइंड बैंक के फर्नीचर, कंप्यूटर, स्टेशनरी व अन्य सामान को अटैच करने के आदेश जारी किए हैं। आरोप है कि बैंक ने उपभोक्ता की मृत्यु के बाद भी उसकी ऋण किश्तें वसूलना जारी रखा।
सिरसल गांव निवासी सत्या देवी के पति की मृत्यु हो गई थी। उन्होंने वाहन खरीदने के लिए इंडसइंड बैंक से ऋण लिया था। नियमानुसार उपभोक्ता की मृत्यु के बाद ऋण की भरपाई बीमा से की जाती है, लेकिन बैंक न केवल ऋण की किश्तें वसूलता रहा बल्कि उपभोक्ता के एटीएम कार्ड पर दर्ज दो लाख रुपये के बीमा क्लेम को भी देने से इन्कार कर दिया।
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बार-बार आग्रह के बावजूद जब बैंक ने राशि नहीं दी तो मृतक की पत्नी सत्या देवी ने अदालत की शरण ली। अदालत ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन बैंक ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद महिला ने पुनः अदालत में याचिका दायर की। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए बैंक का फर्नीचर, कंप्यूटर, सांकेतिक बोर्ड, स्टेशनरी आदि सामान अटैच करने के आदेश दिए। आदेश लेकर न्यायालय के दो अधिवक्ता बैंक पहुंचे और अटैचमेंट की प्रक्रिया शुरू की। सूत्रों के अनुसार, यदि अब भी बैंक द्वारा भुगतान नहीं किया गया, तो अदालत इस मामले में और कड़ी कार्रवाई कर सकती है।
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यह मामला न केवल बैंक की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों की अनदेखी का भी प्रतीक है। मामले की अगली सुनवाई में बैंक अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय की जा सकती है।