{"_id":"66f6c122c64377ea9b0aebd2","slug":"oh-sir-it-is-not-right-to-disrespect-paddy-kaithal-news-c-18-1-knl1004-485598-2024-09-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: ए साहेब! धान की बेकद्री करना ठीक नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: ए साहेब! धान की बेकद्री करना ठीक नहीं
Fri, 27 Sep 2024 07:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 27 Sep 2024 07:58 PM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। चीका की मंडियों में बड़ी मात्रा में धान पहुंच रहा है लेकिन खरीद ना होने के चलते इस धान की बुरी तरह से बेकद्री हो रही है। एक तरफ मांगे पूरी ना होने के चलते प्रदेश के राइस मिलर हड़ताल पर है और उन्होंने एलान किया है कि जब तक मांगें नहीं मानी जाती तब तक वे एक भी दाना पीआर धान का नहीं खरीदेंगे। दूसरी तरफ सरकारी खरीद शुरू न होने के चलते किसान बेबस होकर रह गए है और वे कई कई दिनों तक मंडियों में बैठ धान की रखवाली करने को मजबूर हो रहे हैं।
व्यापारी राजकुमार जखौली, अशोक गर्ग, राहुल कुमार व तरसेम ने कहा कि चीका की मंडी धान के लिए विख्यात है। उन्होंने कहा कि चीका में लगभग 125 राइस मिल है जिसके चलते किसान इसी मंडी में धान बेचने को प्राथमिकता देते है लेकिन राइस मिलरों ने हड़ताल कर धान ना खरीदने का एलान कर किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा कि धान की खरीद ना होने से जहां किसान परेशान है वहीं आढ़ती भी दिनभर खाली बैठने को मजबूर हैं।
उधर, किसान जरनैल जैली, केवल सिंह सदहरेडी, हरजिंदर सिंह नंबरदार, गुरजंट टटियाना ने कहा कि सरकार ने पहले 23 सिंतबर से धान की सरकारी खरीद शुरू करने की घोषणा की थी लेकिन बाद में 1 अक्तूबर से खरीद के आदेश जारी कर दिए। किसानों ने कहा कि एक तरफ राइस मिलरों की हड़ताल दूसरी तरफ सरकार ने बोली शुरू नहीं की ऐसे में किसान अपने धान को कहां और कैसे रखे।
विज्ञापन
ॉउन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार एमएसपी की गारंटी देती है दूसरी तरफ धान नहीं खरीद रही। किसानों ने कहा कि बारिक धान भी पिछले वर्ष की तुलना में 600 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक कम बिक रहा है जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। किसानों ने कहा कि सरकार 28 सितंबर से धान की खरीद शुरू करे वर्ना किसान सडक़ों को जाम करने को मजबूर होंगे।
चीका राइस मिल एसोसिएशन के प्रधान महावीर मटौरिया ने कहा कि चावल एक्सपोर्ट को लेकर सरकार की गलत नीतियों के चलते प्रदेश के राइस मिलर पहले ही दिवालिया हो चुके हैं। महावीर ने कहा कि मिलरों के पास धान खरीदने के लिए पैसा नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार चावल एक्सपोर्ट को लेकर सही नीति नहीं बनाती और उनकी मांगे पूरी नहीं करती तब तक मिलर एक भी दाना पीआर धान का नहीं खरीदेंगे।
धान खरीद शुरू करने के लिए अभी सरकार की तरफ से कोई पत्र नहीं आया है। जैसे ही सरकार के आदेश आएगें उसी समय से सरकारी खरीद शुरू कर दी जाएगी। मंडियों में धान खरीद की सभी तैयारी पूरी है। -सतबीर राविश, मार्केट कमेटी सचिव, चीका।
विज्ञापन
गुहला-चीका। चीका की मंडियों में बड़ी मात्रा में धान पहुंच रहा है लेकिन खरीद ना होने के चलते इस धान की बुरी तरह से बेकद्री हो रही है। एक तरफ मांगे पूरी ना होने के चलते प्रदेश के राइस मिलर हड़ताल पर है और उन्होंने एलान किया है कि जब तक मांगें नहीं मानी जाती तब तक वे एक भी दाना पीआर धान का नहीं खरीदेंगे। दूसरी तरफ सरकारी खरीद शुरू न होने के चलते किसान बेबस होकर रह गए है और वे कई कई दिनों तक मंडियों में बैठ धान की रखवाली करने को मजबूर हो रहे हैं।
व्यापारी राजकुमार जखौली, अशोक गर्ग, राहुल कुमार व तरसेम ने कहा कि चीका की मंडी धान के लिए विख्यात है। उन्होंने कहा कि चीका में लगभग 125 राइस मिल है जिसके चलते किसान इसी मंडी में धान बेचने को प्राथमिकता देते है लेकिन राइस मिलरों ने हड़ताल कर धान ना खरीदने का एलान कर किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा कि धान की खरीद ना होने से जहां किसान परेशान है वहीं आढ़ती भी दिनभर खाली बैठने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
उधर, किसान जरनैल जैली, केवल सिंह सदहरेडी, हरजिंदर सिंह नंबरदार, गुरजंट टटियाना ने कहा कि सरकार ने पहले 23 सिंतबर से धान की सरकारी खरीद शुरू करने की घोषणा की थी लेकिन बाद में 1 अक्तूबर से खरीद के आदेश जारी कर दिए। किसानों ने कहा कि एक तरफ राइस मिलरों की हड़ताल दूसरी तरफ सरकार ने बोली शुरू नहीं की ऐसे में किसान अपने धान को कहां और कैसे रखे।
विज्ञापन
ॉउन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार एमएसपी की गारंटी देती है दूसरी तरफ धान नहीं खरीद रही। किसानों ने कहा कि बारिक धान भी पिछले वर्ष की तुलना में 600 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक कम बिक रहा है जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। किसानों ने कहा कि सरकार 28 सितंबर से धान की खरीद शुरू करे वर्ना किसान सडक़ों को जाम करने को मजबूर होंगे।
चीका राइस मिल एसोसिएशन के प्रधान महावीर मटौरिया ने कहा कि चावल एक्सपोर्ट को लेकर सरकार की गलत नीतियों के चलते प्रदेश के राइस मिलर पहले ही दिवालिया हो चुके हैं। महावीर ने कहा कि मिलरों के पास धान खरीदने के लिए पैसा नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार चावल एक्सपोर्ट को लेकर सही नीति नहीं बनाती और उनकी मांगे पूरी नहीं करती तब तक मिलर एक भी दाना पीआर धान का नहीं खरीदेंगे।
धान खरीद शुरू करने के लिए अभी सरकार की तरफ से कोई पत्र नहीं आया है। जैसे ही सरकार के आदेश आएगें उसी समय से सरकारी खरीद शुरू कर दी जाएगी। मंडियों में धान खरीद की सभी तैयारी पूरी है। -सतबीर राविश, मार्केट कमेटी सचिव, चीका।