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Kaithal News: अधिकारी खामोश... सांड कुत्ते,बंदर मचा रहे उत्पात

Thu, 19 Dec 2024 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Thu, 19 Dec 2024 12:41 AM IST
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Officers are silent...bulls, dogs and monkeys are creating havoc
गुरमीत सीड़ा
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गुहला-चीका। आपने किसी शहर में चोरों व बदमाशों का आतंक तो सुना होगा, लेकिन इस चीका शहर के लोग सांड, कुत्ते और बंदरों के आंतक के साए में जी रहे हैं। इनके बढ़ते आतंक से हर गली मोहल्ला त्रस्त है। शहर के हर वार्ड से लेकर हर सड़क के चुनिंदा स्थानों पर आवारा कुत्तों व सांडों के झुंड आराम फरमाते, वाहनों के पीछे भागते, लोगों पर झपटते देखे जा सकते हैं।

स्कूली बच्च, बुजुर्ग व जवान के लिए पैदल रास्तों पर अकेले गुजरना खतरे से खाली नहीं है। लोगों की मांग के बाद भी नगरपालिका हरकत में नहीं आई। लोगों ने नपा प्रशासन से आवारा कुत्तों, बंदरों व सांडों को पकड़ने का अभियान चलाया जाने की मांग की है हालांकि, पुलिस से खतरे के बारे में पूछें और वे जवाब देते हैं- हम क्या कर सकते हैं? इनको पकड़ना हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
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नागरिक अस्पताल गुहला की एसएमओ डॉ. प्रीति गर्ग का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुहला में कुत्ते काटने के मामले बढ़ गए हैं। औसतन 13 से 14 लोग एंटी रेबिज वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि इससे पहले तीन से चार मामले आते थे। उन्होंने कहा कि एंटी रेबिज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता है।
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चौ. महा सिंह गेट वासी अवतार सीड़ा ने कहा कि आवारा कुत्तों, सांड के कारण आम आदमी का निकलना गली से बड़ा मुश्किल हो गया है। बच्चों का स्कूलों में जाना मुश्किल हो गया है। कई बार सांड गली में भिड़ जाते है। बच्चों के साथ माता-पिता भी फंस जाते है।

दुकानदार यशपाल गर्ग ने बताया कि गलियों में आवारा कुत्तों का बुरा हाल है। उन्होंने कहा कि इन कुत्तों पर भी कानून बनना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि इन आवारा कुत्तों का समाधान करें।

समाजसेवी लक्की जिंदल ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने समस्या की ओर से आंखें मूंद ली हैं, जो दिन-ब-दिन विकराल रूप लेती जा रही है और पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है।


नगर पालिका सचिव राजेश शर्मा ने कहा कि कॉलोनियों में घूमने वाले आवारा कुत्तों की शिकायत उनके सामने नहीं आई है परंतु फिर भी नगर पालिका प्रशासन द्वारा शहर में घूमने वाले सभी आवारा कुत्तों व बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ा जाएगा व सांडों को शहर की गोशाला में छोड़ा जाएगा और लोगों को परेशानी से निजात दिलाई जाएगी। संवाद
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