फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Number of lawyers has increased, but facilities haven't; new lawyers don't even have chambers.

Kaithal News: वकीलों की संख्या बढ़ी, सुविधाएं नहीं, नए वकीलों को चैंबर तक नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Sep 2026 11:28 PM IST
विज्ञापन
Number of lawyers has increased, but facilities haven't; new lawyers don't even have chambers.
अधिवक्ता पुनीत चौधरी
कैथल। जिला न्यायिक परिसर में वकीलों की संख्या लगातार बढ़ने के बावजूद उनके लिए चैंबर, पार्किंग और अन्य जरूरी सुविधाओं का विस्तार नहीं होने से अधिवक्ताओं में रोष है। नए वकीलों के लिए चैंबर उपलब्ध नहीं हैं और कई पुराने चैंबरों में पांच से छह अधिवक्ता बैठकर काम करने के लिए मजबूर हैं।
विज्ञापन

वहीं पार्किंग की कमी के कारण वकीलों के साथ-साथ अदालत में आने वाले लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। इसके अलावा पीएलए, रेवेन्यू और लेबर कोर्ट में स्टाफ की कमी और इन अदालतों के आदेश और अगली तारीख की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होने से भी अधिवक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन


एक-एक चैंबर में पांच-छह वकील बैठने को मजबूर
अधिवक्ता मनोज आनंद ने कहा कि चैंबर की समस्या केवल नए वकीलों की नहीं, बल्कि सभी अधिवक्ताओं की समस्या बन चुकी है। बार एसोसिएशन में करीब 1530 वकील हैं, जबकि इसके अनुपात में पार्किंग की सुविधा बेहद कम है। उन्होंने कहा कि परिसर में करीब 100 से 200 अतिरिक्त वाहनों के लिए ही जगह उपलब्ध है। वकीलों और क्लाइंट की पार्किंग अलग-अलग होनी चाहिए। कई बार किसी वकील को आपात स्थिति में बाहर जाना होता है लेकिन वाहनों की भीड़ के कारण उसकी गाड़ी तक नहीं निकल पाती। उन्होंने कहा कि न्यायिक परिसर से लेकर कंज्यूमर कोर्ट तक सड़क किनारे बड़ी संख्या में वाहन खड़े रहते हैं। बढ़ती संख्या के हिसाब से सुविधाओं का विस्तार नहीं हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


नए और पुराने वकीलों के बीच मतभेद तक हो चुके
अधिवक्ता तनबीर सिंह राजराणा ने कहा कि नए वकीलों के लिए चैंबर उपलब्ध कराने का मुद्दा कई बार उठाया जा चुका है लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हुआ। चैंबर के लिए नए और पुराने वकीलों के बीच मतभेद तक की स्थिति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि परिसर में लाइब्रेरी को अपग्रेड करने की जरूरत है और वाई-फाई जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। हल्की बारिश में भी जलभराव की समस्या सामने आती है। चुनाव के दौरान उम्मीदवार इन मुद्दों को अपने घोषणा पत्र में शामिल करते हैं लेकिन चुनाव के बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है। युवा वकीलों को इस समय मार्गदर्शन और उनके हितों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

रेवेन्यू कोर्ट में अगली तारीख की जानकारी में लग जाता है समय
अधिवक्ता पुनीत चौधरी ने कहा कि पीएलए कोर्ट, रेवेन्यू कोर्ट और लेबर कोर्ट में आदेश और पेशी की तारीखों की ऑनलाइन सुविधा नहीं है। रेवेन्यू कोर्ट में तारीख लगने के बाद कई बार अगली तारीख की जानकारी 15 दिन से एक महीने तक नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि जिमनी आदेश भी कई-कई महीने तक तैयार नहीं होते। इन अदालतों में स्टाफ की कमी के कारण आदेश लिखने, समन जारी करने और नकल तैयार करने तक के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं। इससे वकीलों और पक्षकारों दोनों को परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि यह मामला कानून मंत्री के संज्ञान में भी लाया जा चुका है। डिजिटल इंडिया के दौर में डीसी के अधीन आने वाली रेवेन्यू अदालतों में भी ऑनलाइन व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

अधिवक्ता पुनीत चौधरी

अधिवक्ता पुनीत चौधरी

अधिवक्ता पुनीत चौधरी

अधिवक्ता पुनीत चौधरी

अधिवक्ता पुनीत चौधरी

अधिवक्ता पुनीत चौधरी

अधिवक्ता पुनीत चौधरी

अधिवक्ता पुनीत चौधरी

अधिवक्ता पुनीत चौधरी

अधिवक्ता पुनीत चौधरी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed