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Kaithal News: महाराजा चित्रकेतु और भगवान शिव का सुनाया प्रसंग
Fri, 20 Jun 2025 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 20 Jun 2025 01:16 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। श्री गीता भवन मंदिर में इस्कॉन प्रचार समिति की सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन वीरवार को कथा व्यास श्रीमान साक्षी गोपाल दास जी ने भागवत के 16वें अध्याय की व्याख्या करते हुए महाराजा चित्रकेतु और भगवान शंकर के संवाद का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि जब महाराजा चित्रकेतु ने भगवान शिव पर व्यंग किया, तो शिव शांत रहे, लेकिन माता पार्वती क्रोधित हो उठीं और उन्होंने चित्रकेतु को असुर कुल में जन्म लेने का श्राप दे दिया। इस पर महाराजा चित्रकेतु विचलित नहीं हुए और माता के समक्ष हाथ जोड़कर बोले— हे माता, मैं आपके श्राप को स्वीकार करता हूं। सुख-दुख पूर्व जन्मों के कर्मों से तय होते हैं। इसमें आपका कोई दोष नहीं। मैं क्षमा मांगने नहीं आया, बल्कि आपको प्रणाम करने आया हूं। यह सुनकर माता पार्वती भी शांत हो गईं और चित्रकेतु वहां से विदा हो गए।
एक बार लिया हुआ भगवान का नाम, जीवन भर के पापों का नाश कर देता है
साक्षी गोपाल दास जी ने कहा कि शास्त्रों में उल्लेख है- एक बार भगवान का नाम लेने मात्र से इतने पाप नष्ट हो जाते हैं, जितने कोई मनुष्य पूरी जिंदगी भी नहीं कर सकता।
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उन्होंने कहा कि मनुष्य योनि प्राप्त करना अत्यंत दुर्लभ है, लेकिन उससे भी दुर्लभ है भक्तों की संगत में बैठकर भगवान की चर्चा सुनना। श्रील प्रभुपाद भी कहा करते थे कि यह मनुष्य जीवन अमूल्य और क्षणभंगुर है, इसलिए इसे प्रभु भक्ति में लगाना चाहिए।
कथा के यजमान मनदीप सिंह एडवोकेट ने ज्योति प्रचंड कर कथा व्यास श्री साक्षी गोपाल दास जी को पुष्पमाला पहनाकर सम्मानित किया और श्रद्धापूर्वक कथा श्रवण किया। प्रेस सचिव भारत मदान ने बताया कि कथा व्यास जी ने अत्यंत भावपूर्ण शैली में श्रीकृष्ण लीलाओं का वर्णन करते हुए मधुर भजनों की प्रस्तुति दी। कथा पंडाल में प्रधान दीपक अग्रवाल, राज गुलाटी, आशीष गर्ग, रामनिवास, संजय वाही, अमित गर्ग, रमेश कुमार, बलविंदर, नीरज गर्ग, रमेश चंद, दीपक टुटेजा, विनय तनेजा उपस्थित रहे।
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कैथल। श्री गीता भवन मंदिर में इस्कॉन प्रचार समिति की सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन वीरवार को कथा व्यास श्रीमान साक्षी गोपाल दास जी ने भागवत के 16वें अध्याय की व्याख्या करते हुए महाराजा चित्रकेतु और भगवान शंकर के संवाद का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि जब महाराजा चित्रकेतु ने भगवान शिव पर व्यंग किया, तो शिव शांत रहे, लेकिन माता पार्वती क्रोधित हो उठीं और उन्होंने चित्रकेतु को असुर कुल में जन्म लेने का श्राप दे दिया। इस पर महाराजा चित्रकेतु विचलित नहीं हुए और माता के समक्ष हाथ जोड़कर बोले— हे माता, मैं आपके श्राप को स्वीकार करता हूं। सुख-दुख पूर्व जन्मों के कर्मों से तय होते हैं। इसमें आपका कोई दोष नहीं। मैं क्षमा मांगने नहीं आया, बल्कि आपको प्रणाम करने आया हूं। यह सुनकर माता पार्वती भी शांत हो गईं और चित्रकेतु वहां से विदा हो गए।
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एक बार लिया हुआ भगवान का नाम, जीवन भर के पापों का नाश कर देता है
साक्षी गोपाल दास जी ने कहा कि शास्त्रों में उल्लेख है- एक बार भगवान का नाम लेने मात्र से इतने पाप नष्ट हो जाते हैं, जितने कोई मनुष्य पूरी जिंदगी भी नहीं कर सकता।
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उन्होंने कहा कि मनुष्य योनि प्राप्त करना अत्यंत दुर्लभ है, लेकिन उससे भी दुर्लभ है भक्तों की संगत में बैठकर भगवान की चर्चा सुनना। श्रील प्रभुपाद भी कहा करते थे कि यह मनुष्य जीवन अमूल्य और क्षणभंगुर है, इसलिए इसे प्रभु भक्ति में लगाना चाहिए।
कथा के यजमान मनदीप सिंह एडवोकेट ने ज्योति प्रचंड कर कथा व्यास श्री साक्षी गोपाल दास जी को पुष्पमाला पहनाकर सम्मानित किया और श्रद्धापूर्वक कथा श्रवण किया। प्रेस सचिव भारत मदान ने बताया कि कथा व्यास जी ने अत्यंत भावपूर्ण शैली में श्रीकृष्ण लीलाओं का वर्णन करते हुए मधुर भजनों की प्रस्तुति दी। कथा पंडाल में प्रधान दीपक अग्रवाल, राज गुलाटी, आशीष गर्ग, रामनिवास, संजय वाही, अमित गर्ग, रमेश कुमार, बलविंदर, नीरज गर्ग, रमेश चंद, दीपक टुटेजा, विनय तनेजा उपस्थित रहे।