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Kaithal News: मां के विश्वास ने गढ़े अफसर, अनुशासन से लिखी सफलता की कहानी

Tue, 05 May 2026 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 05 May 2026 01:05 AM IST
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Mother's faith shaped this officer, his success story was written with discipline.
स्व डा. विजय लक्ष्मी शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। संसार में मां केवल एक शब्द नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग और अटूट विश्वास की सजीव परिभाषा है। कहा जाता है कि ईश्वर हर जगह नहीं हो सकते, इसलिए उन्होंने मां को बनाया। एक बच्चे के जीवन में उसकी पहली शिक्षक और मार्गदर्शक मां ही होती है। मातृ दिवस के उपलक्ष्य में ऐसे ही कुछ प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी सफलता के पीछे मां की भूमिका को याद करते हुए भावुक अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कठिन समय में मां ने ढाल बनकर उनका हौसला बढ़ाया और आज वे उसी विश्वास को सार्थक कर रहे हैं।


मां कहती थीं : मुझे तुम पर विश्वास है

मेरी माता स्वर्गीय डॉ. विजय लक्ष्मी शर्मा प्राचीन इतिहास की प्रोफेसर थीं। मैं जब कभी उनके साथ दफ्तर जाती थीं, तो मां की कार्य के प्रति निष्ठा और समर्पण को करीब से देखती थीं। घर लौटकर वह एक साधारण गृहिणी की तरह परिवार की जिम्मेदारियां भी निभाती थीं। ये सब आदतें उनमें से ही मुझमें आई हैं।
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पढ़ाई में कम अंक आने पर कभी डांटा नहीं, बल्कि हमेशा यही कहा- मुझे तुम पर विश्वास है। यही विश्वास आगे बढ़ने की प्रेरणा बना। यूपीएससी की तैयारी के दौरान भी मां का भरोसा उनके साथ रहा। आज भले ही वह इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और संस्कार उनके हर निर्णय में झलकते हैं। -- अपराजिता, उपायुक्त
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मां की डांट में छिपा था अनुशासन

मेरी माता जी की डांट ने मानसिक रूप से मजबूत बनाया। वह डांट केवल गलती पर फटकार नहीं होती थीं, बल्कि अनुशासन का ऐसा पाठ थी जिसने उन्हें घंटों तक एकाग्र होकर पढ़ाई करने की आदत डाली। मां ने ही सिखाया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। आज जब मैं प्रशासनिक फैसले लेता हूं तो मां की वही दृढ़ता और सीख मुझे मार्गदर्शन देती है। मां की प्रेरणा के बिना धैर्यवान और मजबूत बन पाना संभव नहीं था। -मनप्रीत सिंह सुदन, पुलिस अधीक्षक






हर परिस्थिति से मां ने लड़ना सिखाया

मेरी माता जी बीरमती मलिक ने मुझे हर परिस्थिति से सकारात्मक तरीके से लड़ना सिखाया है। पढ़ाई के समय में भी जब कभी परेशानी हुई तो उन्होंने सिर पर हाथ रख कर हमेशा कहा कि तू सब कुछ कर सकता है। यह पंक्तियां मां के साहस और उनकी सीख को दर्शाती हैं। मां न केवल जीवन जीना सिखाती हैं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहना और मुस्कुराते हुए मुकाबला करना सिखाती हैं। उनकी ममता जहां कोमल होती है, वहीं उनकी डांट भी हमें अनुशासन का पाठ पढ़ाती है। -डॉ. सुशील मलिक, अतिरिक्त उपायुक्त

स्व डा. विजय लक्ष्मी शर्मा

स्व डा. विजय लक्ष्मी शर्मा

स्व डा. विजय लक्ष्मी शर्मा

स्व डा. विजय लक्ष्मी शर्मा

स्व डा. विजय लक्ष्मी शर्मा

स्व डा. विजय लक्ष्मी शर्मा

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