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Kaithal News: विधायक जांबा की जुबान फिर फिसली
Sun, 20 Apr 2025 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 20 Apr 2025 01:27 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। फरल में प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम का न्यौता देने पहुंचे कृषि मंत्री के कार्यक्रम में उस समय बवाल हो गया, जब हलका विधायक ने समाज की एकजुटता पर ही सवाल खड़े कर दिए। गौरतलब है कि कुछ समय पहले भी विवादित बयान देने के कारण वह काफी चर्चा में आए थे।
आगामी 9 मई को करनाल के गांव सालवन में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रदेश स्तरीय जयंती समारोह का निमंत्रण देने के लिए शनिवार शाम फरल के सरपंच प्रतिनिधि साहब सिंह राणा के निवास पर कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, विधायक असंध योगेन्द्र राणा व कैथल भाजपा प्रभारी अमर राणा पहुंचे।
मंत्री श्याम सिंह राणा ने फरल के समाज व 36 बिरादरी के लोगों को जयंती समारोह में पहुंचने का न्योता दिया। मंत्री ने समाज के लोगों से अपील की कि ये उनका अपना कार्यक्रम है, इसलिए इस कार्यक्रम में सभी बढ़-चढक़र हिस्सा ले। कार्यक्रम के दौरान जब विधायक सतपाल जांबा को बोलने का मौका मिला तो उन्होंने कहा कि फरल का राजपूत समाज दो धड़ों में बंटा हुआ है, जबकि बरोट और टयोंठा के राजपूत समाज के लोगों में एकजुटता है।
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फरल वाले कार्यक्रम में सबसे कम तादाद में आएंगे। इसलिए आप इनसे कोई उम्मीद न रखें। चुनाव के समय जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी फरल आए थे तो यहां के लोगों ने उनका कार्यक्रम भी सफल नहीं होने दिया। यहां तक उनका सम्मान तक नहीं किया।
विधायक की इस टिप्पणी समाज के लोग भड़क गए और कहा कि उन्हें ये बात नहीं कहनी चाहिए। लोगों का ये भी कहना था कि विधायक चुनाव के समय की बातें उठाकर समाज को
बांटने का प्रयास कर रहे है, जो कि सरासर गलत है। हालांकि गांव के ही कुछ लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत किया लेकिन विधायक की इस टिप्पणी को लेकर गांव फरल का राजपूत समाज नाराज दिखा।
इससे पहले भी विधायक फरल की महिला सरपंच जो कि राजपूत समाज से आती हैं पर टिप्पणी कर माफी मांगकर उनसे राखी बंधवा चुके है और आज का ये कार्यक्रम भी सरपंच के घर पर ही आयोजित किया गया था।
समाज को जोड़ने के लिए कही बात
हलका विधायक सतपाल जांबा ने कहा कि उन्होंने मौके पर कृषि मंत्री के सामने ये बात इसलिए कही थी, क्योंकि जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री फरल आए थे तो गांव वाले उनके कार्यक्रम में बहुत ही कम तादाद में पहुंचे। अपने कार्यकर्ता लाकर उस कार्यक्रम को सफल बनाया था।
जब 9 मई के कार्यक्रम को लेकर समाज के लोगों से पहुंचने की अपील की जा रही थी तो उन्होंने जो उनके साथ बीत चुकी थी, वहीं बात रखी थी।
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पूंडरी। फरल में प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम का न्यौता देने पहुंचे कृषि मंत्री के कार्यक्रम में उस समय बवाल हो गया, जब हलका विधायक ने समाज की एकजुटता पर ही सवाल खड़े कर दिए। गौरतलब है कि कुछ समय पहले भी विवादित बयान देने के कारण वह काफी चर्चा में आए थे।
आगामी 9 मई को करनाल के गांव सालवन में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रदेश स्तरीय जयंती समारोह का निमंत्रण देने के लिए शनिवार शाम फरल के सरपंच प्रतिनिधि साहब सिंह राणा के निवास पर कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, विधायक असंध योगेन्द्र राणा व कैथल भाजपा प्रभारी अमर राणा पहुंचे।
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मंत्री श्याम सिंह राणा ने फरल के समाज व 36 बिरादरी के लोगों को जयंती समारोह में पहुंचने का न्योता दिया। मंत्री ने समाज के लोगों से अपील की कि ये उनका अपना कार्यक्रम है, इसलिए इस कार्यक्रम में सभी बढ़-चढक़र हिस्सा ले। कार्यक्रम के दौरान जब विधायक सतपाल जांबा को बोलने का मौका मिला तो उन्होंने कहा कि फरल का राजपूत समाज दो धड़ों में बंटा हुआ है, जबकि बरोट और टयोंठा के राजपूत समाज के लोगों में एकजुटता है।
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फरल वाले कार्यक्रम में सबसे कम तादाद में आएंगे। इसलिए आप इनसे कोई उम्मीद न रखें। चुनाव के समय जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी फरल आए थे तो यहां के लोगों ने उनका कार्यक्रम भी सफल नहीं होने दिया। यहां तक उनका सम्मान तक नहीं किया।
विधायक की इस टिप्पणी समाज के लोग भड़क गए और कहा कि उन्हें ये बात नहीं कहनी चाहिए। लोगों का ये भी कहना था कि विधायक चुनाव के समय की बातें उठाकर समाज को
बांटने का प्रयास कर रहे है, जो कि सरासर गलत है। हालांकि गांव के ही कुछ लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत किया लेकिन विधायक की इस टिप्पणी को लेकर गांव फरल का राजपूत समाज नाराज दिखा।
इससे पहले भी विधायक फरल की महिला सरपंच जो कि राजपूत समाज से आती हैं पर टिप्पणी कर माफी मांगकर उनसे राखी बंधवा चुके है और आज का ये कार्यक्रम भी सरपंच के घर पर ही आयोजित किया गया था।
समाज को जोड़ने के लिए कही बात
हलका विधायक सतपाल जांबा ने कहा कि उन्होंने मौके पर कृषि मंत्री के सामने ये बात इसलिए कही थी, क्योंकि जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री फरल आए थे तो गांव वाले उनके कार्यक्रम में बहुत ही कम तादाद में पहुंचे। अपने कार्यकर्ता लाकर उस कार्यक्रम को सफल बनाया था।
जब 9 मई के कार्यक्रम को लेकर समाज के लोगों से पहुंचने की अपील की जा रही थी तो उन्होंने जो उनके साथ बीत चुकी थी, वहीं बात रखी थी।