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Kaithal News: बारिश नहीं होने से फीका पड़ा फिरनी का कारोबार, पिछले साल के मुकाबले आधी रह गई बिक्री
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प्रेम हलवाई की दुकान पर रखी फिरनी।
कैथल। जिले में बारिश नहीं होने का असर मिठाई कारोबार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। खासकर सावन माह में सबसे अधिक बिकने वाली फिरनी की मांग पिछले वर्ष की तुलना में करीब आधी रह गई है। हलवाई कारोबारियों का कहना है कि बारिश और मौसम में ठंडक आने पर फिरनी का स्वाद और रंगत दोनों बेहतर हो जाते हैं जिससे इसकी मांग बढ़ जाती है।
इस बार लगातार गर्मी और उमस के कारण ग्राहक फिरनी कम खरीद रहे हैं। प्रेम हलवाई के संचालक ललित वासुदेव ने बताया कि पिछले वर्ष जून के अंत तक अच्छी बारिश होने से फिरनी की बिक्री तेज हो गई थी। उस समय उनकी दुकान पर प्रतिदिन करीब डेढ़ क्विंटल फिरनी बिक रही थी, जबकि इस बार बिक्री लगभग आधी रह गई है। उन्होंने बताया कि पिछले साल त्योहार सीजन यानी सावन भी 27 जून को ही शुरू हो गया था और जून में बारिश भी अच्छी हुई थी। इस बार दो ज्येष्ठ होने के कारण ग्राहक कम हैं। दूसरा इस बार जून में एक बूंद बारिश नहीं गिरी है, इससे कारोबार पर काफी असर पड़ रहा है। इस बार सावन करीब डेढ़ महीने का है। आने वाले दिनों में यदि अच्छी बारिश होती है तो फिरनी और घेवर की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि बारिश के बाद मौसम ठंडा होने से फिरनी का रंग और सफेद हो जाता है और स्वाद बेहतर हो जाता है। यही वजह है कि लोग इस मौसम में इसे ज्यादा पसंद करते हैं। फिलहाल भीषण गर्मी के कारण ग्राहक ठंडी मिठाइयों की खरीदारी में भी पहले जैसी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। कारोबारियों को उम्मीद है कि जुलाई में बारिश और त्योहारों की रौनक बढ़ने के साथ फिरनी का कारोबार भी रफ्तार पकड़ लेगा।
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इस बार फिरनी 20 और घेवर 40 रुपये महंगा हुआ
कारोबारियों के अनुसार इस वर्ष फिरनी की कीमत 240 रुपये प्रति किलो हो गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 20 रुपये अधिक है। वहीं घेवर 480 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। घी, मैदा, चीनी, गैस सिलिंडर और अन्य कच्चे माल के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत में काफी इजाफा हुआ है। मजदूरी में सबसे अधिक तेजी आई है और अब काम करने वाले श्रमिकों को 15 से 20 प्रतिशत अधिक देने पड़ रहे हैं और यही कारण है कि हर वर्ष फिरनी व घेवर के दाम भी बढ़ाने पड़ रहे हैं।
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इस बार लगातार गर्मी और उमस के कारण ग्राहक फिरनी कम खरीद रहे हैं। प्रेम हलवाई के संचालक ललित वासुदेव ने बताया कि पिछले वर्ष जून के अंत तक अच्छी बारिश होने से फिरनी की बिक्री तेज हो गई थी। उस समय उनकी दुकान पर प्रतिदिन करीब डेढ़ क्विंटल फिरनी बिक रही थी, जबकि इस बार बिक्री लगभग आधी रह गई है। उन्होंने बताया कि पिछले साल त्योहार सीजन यानी सावन भी 27 जून को ही शुरू हो गया था और जून में बारिश भी अच्छी हुई थी। इस बार दो ज्येष्ठ होने के कारण ग्राहक कम हैं। दूसरा इस बार जून में एक बूंद बारिश नहीं गिरी है, इससे कारोबार पर काफी असर पड़ रहा है। इस बार सावन करीब डेढ़ महीने का है। आने वाले दिनों में यदि अच्छी बारिश होती है तो फिरनी और घेवर की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।
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उन्होंने बताया कि बारिश के बाद मौसम ठंडा होने से फिरनी का रंग और सफेद हो जाता है और स्वाद बेहतर हो जाता है। यही वजह है कि लोग इस मौसम में इसे ज्यादा पसंद करते हैं। फिलहाल भीषण गर्मी के कारण ग्राहक ठंडी मिठाइयों की खरीदारी में भी पहले जैसी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। कारोबारियों को उम्मीद है कि जुलाई में बारिश और त्योहारों की रौनक बढ़ने के साथ फिरनी का कारोबार भी रफ्तार पकड़ लेगा।
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इस बार फिरनी 20 और घेवर 40 रुपये महंगा हुआ
कारोबारियों के अनुसार इस वर्ष फिरनी की कीमत 240 रुपये प्रति किलो हो गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 20 रुपये अधिक है। वहीं घेवर 480 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। घी, मैदा, चीनी, गैस सिलिंडर और अन्य कच्चे माल के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत में काफी इजाफा हुआ है। मजदूरी में सबसे अधिक तेजी आई है और अब काम करने वाले श्रमिकों को 15 से 20 प्रतिशत अधिक देने पड़ रहे हैं और यही कारण है कि हर वर्ष फिरनी व घेवर के दाम भी बढ़ाने पड़ रहे हैं।

प्रेम हलवाई की दुकान पर रखी फिरनी।

प्रेम हलवाई की दुकान पर रखी फिरनी।

प्रेम हलवाई की दुकान पर रखी फिरनी।