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Kaithal News: बात्ता खेल स्टेडियम में सुविधाओं का अभाव, युवाओं में रोष
Wed, 09 Jul 2025 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 09 Jul 2025 12:57 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। बात्ता गांव स्थित खेल स्टेडियम में मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर गांव के युवाओं में भारी रोष है। करीब 15 हजार की आबादी वाले इस गांव की खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए यह स्टेडियम बनाया गया था, लेकिन आज यह सिर्फ एक ढांचे में तब्दील होकर रह गया है।
नवीन, कुशाल, अजय, साहिल, सूरज, चिंकू और मानी सहित कई युवाओं ने प्रशासन पर घोर अनदेखी का आरोप लगाया है और कहा कि लगातार मांगों के बावजूद समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
ये हैं मुख्य समस्याएं:
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कोच की अनुपलब्धता : खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देने के लिए कोई प्रशिक्षक नहीं है। इससे उनकी प्रतिभाओं का विकास बाधित हो रहा है।
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पेयजल संकट : खिलाड़ियों को भीषण गर्मी में भी अपने घर से पानी लाना पड़ता है। इससे अभ्यास में बाधा आती है।
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खेल सामग्री का अभाव : अभ्यास के लिए स्टेडियम में कोई खेल उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। खिलाड़ी अपनी जेब से व्यवस्था करने को मजबूर हैं।
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ट्रैक पर उगी घास : दौड़ने के लिए बना ट्रैक घास से ढका है, जिससे चोट का खतरा बना रहता है और अभ्यास प्रभावित होता है।
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रोशनी की व्यवस्था नहीं : शाम होते ही अंधेरा छा जाता है, जिससे खिलाड़ियों को अभ्यास बीच में ही छोड़ना पड़ता है।
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सिंथेटिक ट्रैक का अधूरा वादा : पिछले वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने यहां सिंथेटिक ट्रैक देने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक कोई कार्य शुरू नहीं हुआ।
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युवाओं की मांग : खिलाड़ियों ने मांग की है कि कोच की नियुक्ति, पेयजल, खेल सामग्री, ट्रैक की सफाई और रोशनी की व्यवस्था जल्द की जाए।
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कलायत। बात्ता गांव स्थित खेल स्टेडियम में मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर गांव के युवाओं में भारी रोष है। करीब 15 हजार की आबादी वाले इस गांव की खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए यह स्टेडियम बनाया गया था, लेकिन आज यह सिर्फ एक ढांचे में तब्दील होकर रह गया है।
नवीन, कुशाल, अजय, साहिल, सूरज, चिंकू और मानी सहित कई युवाओं ने प्रशासन पर घोर अनदेखी का आरोप लगाया है और कहा कि लगातार मांगों के बावजूद समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
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ये हैं मुख्य समस्याएं:
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कोच की अनुपलब्धता : खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देने के लिए कोई प्रशिक्षक नहीं है। इससे उनकी प्रतिभाओं का विकास बाधित हो रहा है।
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पेयजल संकट : खिलाड़ियों को भीषण गर्मी में भी अपने घर से पानी लाना पड़ता है। इससे अभ्यास में बाधा आती है।
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खेल सामग्री का अभाव : अभ्यास के लिए स्टेडियम में कोई खेल उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। खिलाड़ी अपनी जेब से व्यवस्था करने को मजबूर हैं।
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ट्रैक पर उगी घास : दौड़ने के लिए बना ट्रैक घास से ढका है, जिससे चोट का खतरा बना रहता है और अभ्यास प्रभावित होता है।
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रोशनी की व्यवस्था नहीं : शाम होते ही अंधेरा छा जाता है, जिससे खिलाड़ियों को अभ्यास बीच में ही छोड़ना पड़ता है।
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सिंथेटिक ट्रैक का अधूरा वादा : पिछले वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने यहां सिंथेटिक ट्रैक देने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक कोई कार्य शुरू नहीं हुआ।
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युवाओं की मांग : खिलाड़ियों ने मांग की है कि कोच की नियुक्ति, पेयजल, खेल सामग्री, ट्रैक की सफाई और रोशनी की व्यवस्था जल्द की जाए।