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Kaithal News: युवाओं को नई दिशा दे रहे कुलविंदर
Sat, 03 Jan 2026 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 03 Jan 2026 12:21 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर कुलविंदर सिंह
- फोटो : bhadrawah news
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कुलतान निवासी अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर कुलविंदर सिंह ने अपने उत्कृष्ट खेल जीवन और अनुशासित सैन्य सेवा के माध्यम से न केवल क्षेत्र बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। खेल कोटे से वर्ष 2007 में भारतीय सेना में भर्ती हुए कुलविंदर सिंह ने जून 2024 में सफलतापूर्वक सेवानिवृत्ति ली और अब वे अपने गांव लौटकर खेल और समाज सेवा में सक्रिय हैं।
बॉक्सिंग के क्षेत्र में कुलविंदर सिंह की उपलब्धियां अत्यंत उल्लेखनीय रही हैं। उन्होंने दिल्ली में आयोजित वाईएमसीए इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। इसके अलावा, उन्होंने कजाकिस्तान में आयोजित जूनियर इंटरनेशनल टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया। कुलविंदर सिंह छह बार राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेता रह चुके हैं और नेशनल गेम्स 2015, केरल में स्वर्ण पदक जीतकर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया। मात्र 13 वर्ष की उम्र में बॉक्सिंग शुरू करने वाले कुलविंदर सिंह ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के दम पर यह मुकाम हासिल किया। उनका जीवन आज संघर्ष, साधना और सफलता की मिसाल बन चुका है।
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपने गांव कुलतान में नर्सरी बॉक्सिंग अकादमी की स्थापना की है। इस अकादमी में वे बच्चों को निःशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि गांव से अधिक से अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ी निकलें और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रोशन करें। इसके लिए कुलविंदर सिंह वर्तमान में सोनीपत स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स से फुल कोच डिप्लोमा भी कर रहे हैं, ताकि वैज्ञानिक तरीकों से नई पीढ़ी को तैयार किया जा सके। उनका यह प्रयास केवल खेल तक सीमित नहीं है।
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कैथल। कुलतान निवासी अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर कुलविंदर सिंह ने अपने उत्कृष्ट खेल जीवन और अनुशासित सैन्य सेवा के माध्यम से न केवल क्षेत्र बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। खेल कोटे से वर्ष 2007 में भारतीय सेना में भर्ती हुए कुलविंदर सिंह ने जून 2024 में सफलतापूर्वक सेवानिवृत्ति ली और अब वे अपने गांव लौटकर खेल और समाज सेवा में सक्रिय हैं।
बॉक्सिंग के क्षेत्र में कुलविंदर सिंह की उपलब्धियां अत्यंत उल्लेखनीय रही हैं। उन्होंने दिल्ली में आयोजित वाईएमसीए इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। इसके अलावा, उन्होंने कजाकिस्तान में आयोजित जूनियर इंटरनेशनल टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया। कुलविंदर सिंह छह बार राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेता रह चुके हैं और नेशनल गेम्स 2015, केरल में स्वर्ण पदक जीतकर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया। मात्र 13 वर्ष की उम्र में बॉक्सिंग शुरू करने वाले कुलविंदर सिंह ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के दम पर यह मुकाम हासिल किया। उनका जीवन आज संघर्ष, साधना और सफलता की मिसाल बन चुका है।
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सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपने गांव कुलतान में नर्सरी बॉक्सिंग अकादमी की स्थापना की है। इस अकादमी में वे बच्चों को निःशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि गांव से अधिक से अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ी निकलें और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रोशन करें। इसके लिए कुलविंदर सिंह वर्तमान में सोनीपत स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स से फुल कोच डिप्लोमा भी कर रहे हैं, ताकि वैज्ञानिक तरीकों से नई पीढ़ी को तैयार किया जा सके। उनका यह प्रयास केवल खेल तक सीमित नहीं है।
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