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Kaithal News: महादेव के जयकारे संग जलाभिषेक
Sat, 12 Jul 2025 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 12 Jul 2025 01:07 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सावन माह की शुरुआत शुक्रवार से होते ही पूरे शहर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। सुबह से ही शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान भोलेनाथ को समर्पित इस पवित्र महीने की शुरुआत पर भक्तों ने मंदिरों में पहुंचकर जलाभिषेक किया और विशेष पूजा-अर्चना की।
शहर के सभी प्रमुख शिवालयों को सावन के स्वागत में भव्य रूप से सजाया गया। श्री ग्यारह रुद्री प्राचीन शिव मंदिर, जो चंदाना गेट क्षेत्र में स्थित है, में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। यहां हर दिन जलाभिषेक की परंपरा निभाई जाती है और सावन के प्रत्येक सोमवार को विशेष भीड़ उमड़ती है।
इसी तरह सेक्टर 19 के शिव मंदिर, हनुमान वाटिका, श्री अंबकेश्वर मंदिर और सूर्यकुंड मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर भोलेनाथ से मनोकामनाएं मांगीं।
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महिलाओं की आस्था भी रही विशेष रूप से देखने लायक। पूजा-अर्चना में शामिल हुईं सुमन, आदिती, सुनीत और रामरती ने बताया कि वे कई वर्षों से सावन के महीने में प्रतिदिन शिव मंदिर जाकर पूजा करती हैं।
उनका मानना है कि सावन में भगवान शिव की पूजा करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
सावन माह की पौराणिक मान्यता
हनुमान वाटिका के पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार, देवी सती ने जब अपने पिता दक्ष के यज्ञ में योग शक्ति से शरीर त्याग किया, उससे पहले उन्होंने हर जन्म में भगवान शिव को पति रूप में पाने का संकल्प लिया था।
अपने अगले जन्म में देवी सती ने पार्वती के रूप में हिमाचल और रानी मैना के घर जन्म लिया। युवावस्था में पार्वती ने सावन के महीने में कठोर व्रत और तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया और उनसे विवाह किया। इसी कारण सावन माह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और यह महीना आस्था, उपासना और तपस्या का प्रतीक बन गया है।
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कैथल। सावन माह की शुरुआत शुक्रवार से होते ही पूरे शहर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। सुबह से ही शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान भोलेनाथ को समर्पित इस पवित्र महीने की शुरुआत पर भक्तों ने मंदिरों में पहुंचकर जलाभिषेक किया और विशेष पूजा-अर्चना की।
शहर के सभी प्रमुख शिवालयों को सावन के स्वागत में भव्य रूप से सजाया गया। श्री ग्यारह रुद्री प्राचीन शिव मंदिर, जो चंदाना गेट क्षेत्र में स्थित है, में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। यहां हर दिन जलाभिषेक की परंपरा निभाई जाती है और सावन के प्रत्येक सोमवार को विशेष भीड़ उमड़ती है।
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इसी तरह सेक्टर 19 के शिव मंदिर, हनुमान वाटिका, श्री अंबकेश्वर मंदिर और सूर्यकुंड मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर भोलेनाथ से मनोकामनाएं मांगीं।
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महिलाओं की आस्था भी रही विशेष रूप से देखने लायक। पूजा-अर्चना में शामिल हुईं सुमन, आदिती, सुनीत और रामरती ने बताया कि वे कई वर्षों से सावन के महीने में प्रतिदिन शिव मंदिर जाकर पूजा करती हैं।
उनका मानना है कि सावन में भगवान शिव की पूजा करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
सावन माह की पौराणिक मान्यता
हनुमान वाटिका के पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार, देवी सती ने जब अपने पिता दक्ष के यज्ञ में योग शक्ति से शरीर त्याग किया, उससे पहले उन्होंने हर जन्म में भगवान शिव को पति रूप में पाने का संकल्प लिया था।
अपने अगले जन्म में देवी सती ने पार्वती के रूप में हिमाचल और रानी मैना के घर जन्म लिया। युवावस्था में पार्वती ने सावन के महीने में कठोर व्रत और तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया और उनसे विवाह किया। इसी कारण सावन माह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और यह महीना आस्था, उपासना और तपस्या का प्रतीक बन गया है।