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Kaithal News: जीवन में संयम होना जरूरी ः यमुनापुरी
Thu, 08 Aug 2024 05:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 08 Aug 2024 05:49 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सेक्टर 20 स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में आयोजित महा शिवपुराण कथा बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रही। इस कथा के दूसरे दिन 1008 महामंडलेश्वर स्वामी यमुनापुरी ने भगवान शंकर जी के जीवन पर प्रकाश डाला।
इस दौरान कथा वाचक ने कहा कि दया परिस्थिति के अनुसार आती है। करुणा के लिए किसी परिस्थिति की जरूरत नहीं है। करुणा स्वभाव में होती है। ऐसे ही शंकर जी करुणा के अवतार हैं। दुनिया की नदी में बहते-बहते कोई परमात्मा के सामने आ जाए तो परमात्मा उसके दुख रूपी नदी से पार लगा देते है।
यदि आपके जीवन में इंद्रीय संयम होगा, तभी आप पूजनीय बन सकते है। अगर आपके जीवन में इंद्रीय संयम नहीं है तो आप कभी भी शक्तिवान और पूजनीय नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि शंकर भगवान हमें ये आदेश देते हैं कि अपने जीवन में संयम रखना। शंकर जी कहते हैं, जो कभी बदलता नहीं है, मैं उसको स्वीकार करता हूं। इसलिए शंकर जी राख (भस्म) लगाकर हमें ये आदेश देते है की हमें अपने कहे पर अडिग़ रहना चाहिए, बदलना नहीं चाहिए। राख अंतिम सत्य है। हमें भी एक दिन राख ही बन जाना है। भगवान कहते हैं जब तुम अपने वचन पर स्थिर रहोगे तब मैं तुम्हें अंगीकार करूंगा। जब मनस्य, वर्चस्य, कर्मस्य एक हो जाएंगे तब भगवान हमें अंगीकार करेंगे।
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इस मौके पर रमेश सचदेवा, रामप्रताप गोयल, मनोज सिंगला, भीमसेन वधवा, रमेश पपरेजा, एसीपी शर्मा, जगदीश कोलिया, पवन गर्ग, सुरेंद्र गर्ग, संजीव चौधरी, डीडी सिंगला उपस्थित रहे।
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कैथल। सेक्टर 20 स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में आयोजित महा शिवपुराण कथा बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रही। इस कथा के दूसरे दिन 1008 महामंडलेश्वर स्वामी यमुनापुरी ने भगवान शंकर जी के जीवन पर प्रकाश डाला।
इस दौरान कथा वाचक ने कहा कि दया परिस्थिति के अनुसार आती है। करुणा के लिए किसी परिस्थिति की जरूरत नहीं है। करुणा स्वभाव में होती है। ऐसे ही शंकर जी करुणा के अवतार हैं। दुनिया की नदी में बहते-बहते कोई परमात्मा के सामने आ जाए तो परमात्मा उसके दुख रूपी नदी से पार लगा देते है।
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यदि आपके जीवन में इंद्रीय संयम होगा, तभी आप पूजनीय बन सकते है। अगर आपके जीवन में इंद्रीय संयम नहीं है तो आप कभी भी शक्तिवान और पूजनीय नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि शंकर भगवान हमें ये आदेश देते हैं कि अपने जीवन में संयम रखना। शंकर जी कहते हैं, जो कभी बदलता नहीं है, मैं उसको स्वीकार करता हूं। इसलिए शंकर जी राख (भस्म) लगाकर हमें ये आदेश देते है की हमें अपने कहे पर अडिग़ रहना चाहिए, बदलना नहीं चाहिए। राख अंतिम सत्य है। हमें भी एक दिन राख ही बन जाना है। भगवान कहते हैं जब तुम अपने वचन पर स्थिर रहोगे तब मैं तुम्हें अंगीकार करूंगा। जब मनस्य, वर्चस्य, कर्मस्य एक हो जाएंगे तब भगवान हमें अंगीकार करेंगे।
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इस मौके पर रमेश सचदेवा, रामप्रताप गोयल, मनोज सिंगला, भीमसेन वधवा, रमेश पपरेजा, एसीपी शर्मा, जगदीश कोलिया, पवन गर्ग, सुरेंद्र गर्ग, संजीव चौधरी, डीडी सिंगला उपस्थित रहे।