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उपेक्षा का शिकार सर्वदेव तीर्थ
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historical place
- फोटो : Kaithal
शहर में रेलवे स्टेशन के पास स्थित प्राचीन सर्वदेव तीर्थ उपेक्षा का शिकार हो रहा है। प्राचीन मान्यता के अनुसार तीर्थ का इतिहास महाभारत कालीन है। प्राचीन समय में यह तीर्थ धार्मिक दृष्टि से जिलेभर के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र था, जो अब विलुप्त होने की कगार पर है। देखरेख के अभाव में तीर्थ के आसपास में गंदगी फैली हुई है। बुजुर्ग बताते हैं कि इस तीर्थ का शहर के लोगों के लिए बड़ा महत्व था। लोग स्नान करने के लिए वहां जाते थे व पक्षियों को दाना डालते थे। अब न तो यहां पर वो तीर्थ रहा है और न ही पक्षी आते हैं। इस तीर्थ के पास गोगा मेड़ी का स्थल भी है।
शहर के साहित्यकार एवं लेखक श्याम सुंदर गौड़ बताते हैं कि तीर्थ की दीवारों पर चूने व कली की सदरियां बनी होती थी। यहां एक बाग होता था, जिसमें ठंडे पानी का कुआं भी था। तीर्थ पर पुरुषों और महिलाओं के स्नान करने के लिए अलग-अलग घाट होते थे, जो अब नहीं रहे हैं। उन्होंने बताया कि तीर्थ के साथ एक कुटिया थी, जिसमें एक ब्रह्मचारी नाम के एक पंडित रहते थे। उनके समय में यहां पर हर द्वादशी के दिन मेला लगता था। शहर के प्रबुद्ध लोग मेले में श्रद्धालुओं के साथ मिलकर तीर्थ पर पूजा पाठ का कार्य करवाते थे और घाट में स्नान करते थे। अब समय के साथ लोग इस स्थान को भूलते जा रहे हैं।
ध्यान दे सरकार व प्रशासन : श्याम सुंदर गौड़ ने कहा कि ये तीर्थ हमारी धरोहर हैं। सरकार और जिला प्रशासन की इसके वर्तमान हालातों की ओर ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि तीर्थों के पास पहले की तरह खुले स्थान तो नहीं बचे हैं, लेकिन जितनी जगह है, उसी को ऐतिहासिक निशानी के रूप में विकसित करे, ताकि भावी पीढ़ियों को इनके बारे में जानकारी मिलती रहे।
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शहर के साहित्यकार एवं लेखक श्याम सुंदर गौड़ बताते हैं कि तीर्थ की दीवारों पर चूने व कली की सदरियां बनी होती थी। यहां एक बाग होता था, जिसमें ठंडे पानी का कुआं भी था। तीर्थ पर पुरुषों और महिलाओं के स्नान करने के लिए अलग-अलग घाट होते थे, जो अब नहीं रहे हैं। उन्होंने बताया कि तीर्थ के साथ एक कुटिया थी, जिसमें एक ब्रह्मचारी नाम के एक पंडित रहते थे। उनके समय में यहां पर हर द्वादशी के दिन मेला लगता था। शहर के प्रबुद्ध लोग मेले में श्रद्धालुओं के साथ मिलकर तीर्थ पर पूजा पाठ का कार्य करवाते थे और घाट में स्नान करते थे। अब समय के साथ लोग इस स्थान को भूलते जा रहे हैं।
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ध्यान दे सरकार व प्रशासन : श्याम सुंदर गौड़ ने कहा कि ये तीर्थ हमारी धरोहर हैं। सरकार और जिला प्रशासन की इसके वर्तमान हालातों की ओर ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि तीर्थों के पास पहले की तरह खुले स्थान तो नहीं बचे हैं, लेकिन जितनी जगह है, उसी को ऐतिहासिक निशानी के रूप में विकसित करे, ताकि भावी पीढ़ियों को इनके बारे में जानकारी मिलती रहे।
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