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रियाणा प्राईवेट स्कूल एसोसिएशन ने की आर्थिक सहायता की मांग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jun 2021 12:09 AM IST
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Haryana Private School Association demanded financial assistance
41-पूंडरी। बातचीत करते हुए हरियाणा प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के सदस्य। - फोटो : Kaithal
हरियाणा प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष एनआर गुप्ता ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते स्कूल बंद होने के कारण पिछले दो सालों से प्राइवेट स्कूल संचालक आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। सरकार इन्हें राहत पैकेज देने की घोषणा करे। उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्कूलों की जो प्लेज मनी सरकारी खातों में जमा है, जिसका कोई प्रयोग नहीं हुआ है। सरकार जल्द-से-जल्द उसको निकलवाने की स्वीकृति प्रदान करें और 134-ए की पिछले वर्षों की बकाया राशि स्कूलों को देकर आर्थिक रूप से बंद होने की कगार पर आए स्कूलों को बचाया जा सके।
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एसोसिएशन के चेयरमैन रणबीर आर्य ने सरकार द्वारा 2007 से पहले के स्कूलों को भूमि के मापदंडों में छूट देने पर सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि सरकार को स्कूल बसों का बीमा, बस पासिंग इत्यादि को उतने ही मास के लिए आगे बढ़ा देना चाहिए, जितने मास तक स्कूल बसें स्कूल कैंपस में खड़ी रही हैं, जिससे भी स्कूलों को काफी राहत प्रदान होगी और 2003 से पहले के सभी अस्थायी स्कूलों को स्थायी मान्यता प्रदान की जाए। 2003 के बाद के अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों की मान्यता की अवधि एक वर्ष बढ़ाई जाए। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के कानूनी सलाहकार वकील सिंह ने कहा कि महामारी के इस समय में प्राइवेट स्कूलों के जो हालात है, वो सब जानते हैं। इस आपदा को कुछ सरकारी स्कूलों के अध्यापक अवसर में बदल रहे हैं। जो प्राईवेट स्कूलों के खिलाफ सोशल मीडिया और घर-घर जाकर दुष्प्रचार कर रहे हैं। इन सब असामाजिक व्यक्तियों की पहचान करके और सबूत के साथ मानहानि का केस किया जाएगा। राज्य सचिव डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि प्राइवेट स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में 52 प्रतिशत भागीदारी रखते हैं। जो सरकार के साथ मिलकर उनके द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी कार्य करते हैं। प्राइवेट स्कूलों को पूर्ण संचालन अभिभावकों द्वारा दी गई मासिक शुल्क से ही चलता है। सरकार द्वारा अन्य किसी प्रकार की सहायता प्रदान नहीं की जाती है।
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