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एसडीएम के खिलाफ गोशाला संचालकों ने खोला मोर्चा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Jul 2021 11:36 PM IST
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Gaushala operators opened front against SDM
सरकार द्वारा नगर परिषद की जमीन में संचालित की जा रही नंदीशाला के प्रधान के साथ एसडीएम संजय कुमार द्वारा किए गए व्यवहार के विरोध में वीरवार को गोशाला संचालक संघ की बैठक अग्रवाल धर्मशाला जींद रोड पर हुई। इसमें जिले भर से आए गोशाला संचालकों ने एसडीएम के खिलाफ गाय को जानवर कहने और प्रधान को अपमानित करने पर केस दर्ज करने, उन्हें सस्पेंड करने और माफी मंगवाए जाने की मांग की। वहीं, एसडीएम ने कहा कि उन्होंने किसी का अपमान नहीं किया।
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मीडिया से बातचीत में नंदीशाला सेवा समिति के प्रधान रामलाल ने कहा कि वे एसडीएम संजय कुमार के पास गोशाला की जमीन की बोली की जानकारी के लिए गए थे, लेकिन एसडीएम उन पर नाराज हो गए और न सिर्फ प्रधान को बल्कि गोमाता को भी बुरा-भला कहा। उन्होंने कहा कि प्रशासन जिस गोशाला का संचालन करने में असफल रहा, समिति पूरी ईमानदारी से इसे चला रही है और प्रशासन का ही काम कर रही है। ऐसे में उसी गोशाला की जमीन को प्रशासन ठेके पर देना चाहता है और वहां सेवा कर रहे लोगों को अपमानित करता है। उनकी डीसी से मांग है कि जमीन की नीलामी रद्द की जाए। साथ ही एसडीएम द्वारा जो दुर्व्यवहार किया गया है, उनके खिलाफ केस दर्ज कर निलंबित किया जाए।
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नंदीशाला के पूर्व प्रधान सुरेश कुमार ने कहा कि पूर्व एडीसी के मार्गदर्शन में यह गोशाला सरकार की ओर से खोली गई थी। यदि एसडीएम इसी तरह से अपमान करेंगे तो समिति गोशाला संचालन नहीं कर सकेगी। पुरुषोत्तम दास ने कहा कि गोशाला प्रधान के साथ ऐसा व्यवहार निंदनीय है। गोशाला के पदेन अधिकारी अश्वनी ने भी एसडीएम के बयान की निंदा की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उन्होंने माफी नहीं मांगी तो सोमवार को प्रदेश भर से गोशाला संचालक पिहोवा चौक पर प्रदर्शन करेंगे।
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एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि उन्होंने अपनी बात रखी है। मैंने किसी और के बारे में कुछ कहा ही नहीं। मैंने गाय के बारे में अपने विचार बताए हैं कि वे क्या समझते हैं। मैंने यह नहीं कहा कि गाय की सेवा न करो। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है कि हम पक्षियों को दाना और गाय को रोटी देते हैं। हमारी लाइफस्टाइल का हिस्सा है। गाय को लेकर मैंने अपना दृष्टिकोण रखा है। मेरे विचारों से उन्हें सहमत होने और असहमत होने का पूरा अधिकार है। मैं नहीं समझता कि इसमें कोई सफाई देनी चाहिए।
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