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किसानों का मालिकाना हक खत्म करने के विरोध किसानों ने सरकार का फूंका पुतला
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03-कैथल। सरकार का पुतला जलाते हुए सयुंक्त मोर्चा के सदस्य।
- फोटो : Kaithal
कैथल/गुहला चीका। मुश्तरका जमीन पर किसानों का मालिकाना हक खत्म करने और एमएसपी की कानूनी गारंटी न देने के विरोध में किसानों ने जगह-जगह सरकार का पुतला फूंका। कैथल में तितरम मोड़, चीका के शहीद ऊधम सिंह चौक, कमेहड़ी, अगौंध व रामथली बराड़ी में किसानों ने 11 बजे से ढाई बजे तक सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
भरत सिंह बेनीवाल, महेंद्र सिंह जगदेव पुनिया, हरदीप बदसुई, एडवोकेट दलबीर नैन, जगदेव सीड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार ने जुमला मुश्तरका जमीन, मुश्तरका इंतकाल जो कि किसानों के नाम पर दर्ज थी, एक साजिश के तहत डिग्री रद कर दी है। किसानों को इस जमीन से बेदखल करने की केंद्र सरकार ने जो नीति बनाई है, वह पूरी तरह से किसान विरोधी है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार के आश्वासन पर किसानों ने दिल्ली में चल रहे धरने को समाप्त कर दिया था, लेकिन अब सरकार ने एमएसपी की कानून गारंटी देने से इंकार कर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारत बंद का निर्णय लिया गया था, परंतु तीज के त्योहार को देखते हुए किसान संगठनों ने केवल प्रदर्शन किया है। वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन समाप्त करवाने के लिए केंद्र सरकार ने सभी मांगे मानने के साथ-साथ किसानों पर दर्ज किए गए केस वापस लेने का वादा किया था, लेकिन सरकार ने न तो किसानों पर दर्ज केस वापस लिए हैं न ही एमएसपी पर कानून बनाया। इससे किसानों में रोष है। उन्होंने कहा कि एमएसपी पर सरकार द्वारा बनाई गई कमेटी को संयुक्त किसान मोर्चा पहले ही खारिज कर चुका है, क्योंकि सरकारी सदस्यों और सरकार के व्यक्तियों को इसमें शामिल किया है।
उन्होंने बताया कि जिले में हजारों किसान ऐसे हैं, जो सरकारी जमीन पर काश्तकार हैं। इस जमीन पर मालिकाना हक को लेकर किसानों का लंबे समय से आंदोलन चलता रहा है। अब सरकार के नए नियमों के कारण किसान परेशान हैं। किसान नए नियमों को खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
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इस मौके पर जस्सा, दलबीर नैन, गुरमीत, कुलविंदर, जसमीत, गुरमेल, दलबीर सिंह पुनिया, सुखपाल मलिक, जयपाल फौजी प्योदा, रामफल, बलवान सिंह, महेंद्र सिंह बरोट, अभे राम, मास्टर रामकला, रमेश हरित, कर्म सिंह,सीटू जिला प्रधान नरेश रोहेड़ा, जसवंत सिंह, बलबीर कौर, निर्मल सिंह नंबरदार, हरबंस सिंह, प्रदीप सिंह सरपंच, हरमेल सिंह, हरबंस सिंह भोंसला, राजेंद्र सिंह कसौली व बलविंदर सिंह मौजूद रहे।
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भरत सिंह बेनीवाल, महेंद्र सिंह जगदेव पुनिया, हरदीप बदसुई, एडवोकेट दलबीर नैन, जगदेव सीड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार ने जुमला मुश्तरका जमीन, मुश्तरका इंतकाल जो कि किसानों के नाम पर दर्ज थी, एक साजिश के तहत डिग्री रद कर दी है। किसानों को इस जमीन से बेदखल करने की केंद्र सरकार ने जो नीति बनाई है, वह पूरी तरह से किसान विरोधी है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार के आश्वासन पर किसानों ने दिल्ली में चल रहे धरने को समाप्त कर दिया था, लेकिन अब सरकार ने एमएसपी की कानून गारंटी देने से इंकार कर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारत बंद का निर्णय लिया गया था, परंतु तीज के त्योहार को देखते हुए किसान संगठनों ने केवल प्रदर्शन किया है। वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन समाप्त करवाने के लिए केंद्र सरकार ने सभी मांगे मानने के साथ-साथ किसानों पर दर्ज किए गए केस वापस लेने का वादा किया था, लेकिन सरकार ने न तो किसानों पर दर्ज केस वापस लिए हैं न ही एमएसपी पर कानून बनाया। इससे किसानों में रोष है। उन्होंने कहा कि एमएसपी पर सरकार द्वारा बनाई गई कमेटी को संयुक्त किसान मोर्चा पहले ही खारिज कर चुका है, क्योंकि सरकारी सदस्यों और सरकार के व्यक्तियों को इसमें शामिल किया है।
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उन्होंने बताया कि जिले में हजारों किसान ऐसे हैं, जो सरकारी जमीन पर काश्तकार हैं। इस जमीन पर मालिकाना हक को लेकर किसानों का लंबे समय से आंदोलन चलता रहा है। अब सरकार के नए नियमों के कारण किसान परेशान हैं। किसान नए नियमों को खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
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इस मौके पर जस्सा, दलबीर नैन, गुरमीत, कुलविंदर, जसमीत, गुरमेल, दलबीर सिंह पुनिया, सुखपाल मलिक, जयपाल फौजी प्योदा, रामफल, बलवान सिंह, महेंद्र सिंह बरोट, अभे राम, मास्टर रामकला, रमेश हरित, कर्म सिंह,सीटू जिला प्रधान नरेश रोहेड़ा, जसवंत सिंह, बलबीर कौर, निर्मल सिंह नंबरदार, हरबंस सिंह, प्रदीप सिंह सरपंच, हरमेल सिंह, हरबंस सिंह भोंसला, राजेंद्र सिंह कसौली व बलविंदर सिंह मौजूद रहे।