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Kaithal News: ढांड में बिजली विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली से किसान परेशान
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01ढांड01 रविवार को क्षतिग्रस्त हुए ट्रांसफार्मर को किसानों द्वारा स्वयं स्वयं खर्च पर स्थापित क
ढांड । रविवार को आई तेज आंधी और बारिश के बाद क्षेत्र के खेतों में बिजली व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई। कई स्थानों पर बिजली के पोल गिर गए और ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गए जिससे किसानों की धान की फसल पर संकट गहरा गया है। किसानों का आरोप है कि विद्युत निगम ढांड के अधिकारी क्षतिग्रस्त बिजली ढांचे को दुरुस्त कराने की अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय उन्हें अपने खर्च पर काम कराने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि जब भी वे अपनी समस्या लेकर विद्युत निगम कार्यालय ढांड पहुंचते हैं तो अधिकारियों की ओर से एक ही जवाब दिया जाता है कि विभाग के पास लेबर की कमी है। किसानों का आरोप है कि यह कार्य बिजली निगम की जिम्मेदारी है लेकिन जानबूझकर विभाग की ओर से काम में देरी की जा रही है ताकि किसान मजबूरी में निजी ठेकेदारों के माध्यम से अपनी जेब से पैसा खर्च कर बिजली आपूर्ति बहाल कराएं।
किसानों ने बताया कि धान की फसल को समय पर सिंचाई नहीं मिलने से नुकसान होने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में फसल बचाने के लिए वे मजबूरन निजी स्तर पर पोल खड़े कराने, तार खिंचवाने और ट्रांसफार्मर स्थापित कराने का खर्च उठा रहे हैं।
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किसान सुभाष चंद, मोहनलाल, सुखविंदर, बलवान सिंह, अरविंद और रोहतास ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में बिजली संबंधी कार्यों के लिए अनौपचारिक रूप से दरें तय कर दी गई हैं। उनके अनुसार हाइड्रा मशीन से एक पोल खड़ा कराने के लिए करीब 1500 रुपये, एक पोल पर तार लगाने के लिए 3500 रुपये और ट्रांसफार्मर रखने के लिए लगभग 7000 रुपये लिए जा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि यह पूरा खेल बिजली विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है।
किसानों ने सवाल उठाया कि जब विभाग लेबर की कमी का हवाला देता है, तो जैसे ही किसान निजी खर्च पर काम कराने को तैयार होते हैं, उसी समय लेबर और संसाधन उपलब्ध कैसे हो जाते हैं। उनका कहना है कि इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
किसानों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यदि किसी स्तर पर किसानों से अवैध वसूली की जा रही है तो दोषी अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
विद्युत निगम ढांड के एसडीओ हरिराम सैनी का कहना है कि अगर किसानों ने अपने खर्चे पर काम करवाया है तो वह उसका सबूत दें इस प्रकार के अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई होगी।
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किसानों का कहना है कि जब भी वे अपनी समस्या लेकर विद्युत निगम कार्यालय ढांड पहुंचते हैं तो अधिकारियों की ओर से एक ही जवाब दिया जाता है कि विभाग के पास लेबर की कमी है। किसानों का आरोप है कि यह कार्य बिजली निगम की जिम्मेदारी है लेकिन जानबूझकर विभाग की ओर से काम में देरी की जा रही है ताकि किसान मजबूरी में निजी ठेकेदारों के माध्यम से अपनी जेब से पैसा खर्च कर बिजली आपूर्ति बहाल कराएं।
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किसानों ने बताया कि धान की फसल को समय पर सिंचाई नहीं मिलने से नुकसान होने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में फसल बचाने के लिए वे मजबूरन निजी स्तर पर पोल खड़े कराने, तार खिंचवाने और ट्रांसफार्मर स्थापित कराने का खर्च उठा रहे हैं।
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किसान सुभाष चंद, मोहनलाल, सुखविंदर, बलवान सिंह, अरविंद और रोहतास ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में बिजली संबंधी कार्यों के लिए अनौपचारिक रूप से दरें तय कर दी गई हैं। उनके अनुसार हाइड्रा मशीन से एक पोल खड़ा कराने के लिए करीब 1500 रुपये, एक पोल पर तार लगाने के लिए 3500 रुपये और ट्रांसफार्मर रखने के लिए लगभग 7000 रुपये लिए जा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि यह पूरा खेल बिजली विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है।
किसानों ने सवाल उठाया कि जब विभाग लेबर की कमी का हवाला देता है, तो जैसे ही किसान निजी खर्च पर काम कराने को तैयार होते हैं, उसी समय लेबर और संसाधन उपलब्ध कैसे हो जाते हैं। उनका कहना है कि इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
किसानों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यदि किसी स्तर पर किसानों से अवैध वसूली की जा रही है तो दोषी अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
विद्युत निगम ढांड के एसडीओ हरिराम सैनी का कहना है कि अगर किसानों ने अपने खर्चे पर काम करवाया है तो वह उसका सबूत दें इस प्रकार के अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई होगी।

01ढांड01 रविवार को क्षतिग्रस्त हुए ट्रांसफार्मर को किसानों द्वारा स्वयं स्वयं खर्च पर स्थापित क