फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Farmers are suffering double loss by burning remains: Dr. Godara

Kaithal News: अवशेष जलाकर किसान उठा रहे दोहरा नुकसान ः डाॅ. गोदारा

Wed, 23 Oct 2024 02:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 23 Oct 2024 02:22 AM IST
विज्ञापन
Farmers are suffering double loss by burning remains: Dr. Godara
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कलायत। कृषि विभाग कलायत की और से गांव खरक पांडवा व बात्ता में फसल अवशेष प्रबंधन पर एक दिवसीय किसान जागरूकता शिविर लगाया। कार्यक्रम में मौजूद कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डाॅ. ओपी गोदारा व उपकृषि निदेशक डॉ. बाबू लाल विशेष तौर पर मौजूद रहे। डॉ. गोदारा ने कहा कि अवशेष जलाकर किसान दोहरा नुकसान उठा रहे हैं।

डाॅ. गोदारा ने समझाते हुए कहा कि किसान फसल अवशेष को खेत में ही जलाकर मित्र कीटों को भी नष्ट कर देते हैं। फसल अवशेष जो कृषि भूमि के लिए खाद का एक अच्छा साधन है, उसे भी वे नष्ट कर देते हैं। यह दोहरा नुकसान है। जहां किसान एक अच्छी खाद से वंचित रह जाता है वहीं, भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाले जीवाणुओं को नष्ट हो जाते हैं।
विज्ञापन


इसके अलावा जब किसान सड़क किनारे फसल अवशेषों को जलते है तो वाहन दुर्घटना होने का भी डर बना रहता है। जिससे जान माल की भी हानि होती है। जब किसान फसल अवशेषों में आग लगाता है तो उन फसल अवशेषों में यूरिया, डीएपी, पोटास, सल्फर आदी खाद की मात्रा मौजूद होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि किसान अगर कम खर्च में फसल अवशेषों का प्रबंधन करना चाहते हैं तो मालचिंग तकनीक का उपयोग कर नाम मात्र के खर्च से फसल अवशेषों का प्रबंधन कर सकते हैं। उन्होंने अवशेष न जलाने का अनुरोध किया।

यह है फसल अवशेष प्रबंधन की मालचिंग तकनीक ः डाॅ.गोदारा ने बताया की मालचिंग तकनीक में जब धान की कटाई कंबाइन मशीन से होती है तो उसके बाद किसान द्वारा फसल अवशेष के फूंस को जेली की सहायता से अच्छे से खेत में फैला दिया जाता है।

इसके बाद जब गेहूं की बिजाई के समय किसान 45 किलो गेहूं का बीज, 1 बैग डीएएपी, 20 किलो यूरिया, आधा बैग पोटाश व 10 किलो जिंक (21 प्रतिशत) का पूरे खेत में छीटा लगाएं। जहां पर फूंस है, उस जगह को जेली से हिला दे

ताकि बीज व खाद का कोई दाना फूंस पर न अटके ।

इसके बाद कटर की सहायता से फानों की कटाई करवा दें। जिसपर किसान का खर्च मात्र 400 से 500 रुपये प्रति एकड़ आएगा और उसके बाद खेत की सिंचाई करवा दें । इस विधि से खेत में नमी लंबे समय तक बनी रहेगी साथ में पक्षियों से बीज के दाने चुगने का खतरा नहीं रहता।

उन्होंने बताया कि खेत में नमी बने रहने से बीज का जमाव ज्यादा होता है। मालचिंग के कारण खरपतवार कम मात्रा में उगते है और उत्पादन में भी वृद्धि होती है इस प्रकार मालचिंग विधि फसल अवशेष प्रबंधन में सबसे कारगर है ।


इस मौके पर उप कृषि निदेशक डा.बाबू लाल, एसडीओ डाॅ. कुलदीप शर्मा, डाॅ. नरेश नैन, कृषि पर्यवेक्षक डाॅ. राकेश कुंडू, डाॅ. जोगिंद्र सिंह, प्रगतिशील किसान जॉनी राणा, मोनू राणा, नंबरदार महेंद्र सिंह मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed