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Kaithal News: गेहूं और धान में नई खेती विधियों के बताए फायदे
Wed, 14 Jan 2026 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 14 Jan 2026 01:20 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। खंड के गांव माजरा में फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन और खेती विरासत मिशन के सहयोग से फील्ड स्कूल का आयोजन किया गया। इस अवसर पर किसानों को गेहूं और धान की आधुनिक खेती तकनीक के बारे में जानकारी दी गई।
जिला कॉर्डिनेटर सुभाष चंद्र ने बताया कि फील्ड स्कूल में किसानों को गेहूं की ट्रिपल ऐस विधि, सतही बिजाई तकनीक, और धान की डीएसआर विधि के फायदे समझाए गए। उन्होंने बताया कि इन विधियों के प्रयोग से: धान के अवशेष के साथ गेहूं की बिजाई संभव है ः फसल में पानी की खपत कम होती है। खरपतवार नियंत्रण आसान हो जाता है। गेहूं में लॉजिंग नहीं होती ः भूमि की सेहत में सुधार होता है।
सुभाष चंद्र ने कहा कि फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन और खेती विरासत मिशन का उद्देश्य अनूठी खेती प्रणालियों को आधुनिक तकनीक और सतत प्रथाओं से सशक्त बनाना है, जिससे ग्रामीणों की आजीविका सुधरे और पर्यावरणीय संतुलन भी स्थापित हो। उन्होंने कहा कि सप्राकृतिक खेती जैसी प्रगतिशील पद्धतियों को उजागर किया गया है, जो इस सहयोग की नींव बन रही हैं।
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इस नई साझेदारी के माध्यम से भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में नई हरित क्रांति की उम्मीद है, जहां पारंपरिक खेती और आधुनिक विज्ञान मिलकर भविष्य की खाद्य सुरक्षा को भी लाभान्वित करेंगे। फील्ड स्कूल में गोपाल, साहिल, प्रवीन, सुभाष, ईश्वर, किताब, राजपाल, बलराज, गुलाब, संदीप, राजकुमार, दलबीर, विकास किसान उपस्थित रहे।
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राजौंद। खंड के गांव माजरा में फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन और खेती विरासत मिशन के सहयोग से फील्ड स्कूल का आयोजन किया गया। इस अवसर पर किसानों को गेहूं और धान की आधुनिक खेती तकनीक के बारे में जानकारी दी गई।
जिला कॉर्डिनेटर सुभाष चंद्र ने बताया कि फील्ड स्कूल में किसानों को गेहूं की ट्रिपल ऐस विधि, सतही बिजाई तकनीक, और धान की डीएसआर विधि के फायदे समझाए गए। उन्होंने बताया कि इन विधियों के प्रयोग से: धान के अवशेष के साथ गेहूं की बिजाई संभव है ः फसल में पानी की खपत कम होती है। खरपतवार नियंत्रण आसान हो जाता है। गेहूं में लॉजिंग नहीं होती ः भूमि की सेहत में सुधार होता है।
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सुभाष चंद्र ने कहा कि फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन और खेती विरासत मिशन का उद्देश्य अनूठी खेती प्रणालियों को आधुनिक तकनीक और सतत प्रथाओं से सशक्त बनाना है, जिससे ग्रामीणों की आजीविका सुधरे और पर्यावरणीय संतुलन भी स्थापित हो। उन्होंने कहा कि सप्राकृतिक खेती जैसी प्रगतिशील पद्धतियों को उजागर किया गया है, जो इस सहयोग की नींव बन रही हैं।
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इस नई साझेदारी के माध्यम से भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में नई हरित क्रांति की उम्मीद है, जहां पारंपरिक खेती और आधुनिक विज्ञान मिलकर भविष्य की खाद्य सुरक्षा को भी लाभान्वित करेंगे। फील्ड स्कूल में गोपाल, साहिल, प्रवीन, सुभाष, ईश्वर, किताब, राजपाल, बलराज, गुलाब, संदीप, राजकुमार, दलबीर, विकास किसान उपस्थित रहे।