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Kaithal News: कवायद तेज ः मार्च में जिले के 65 गांव होंगे टीबी मुक्त
Thu, 27 Feb 2025 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 27 Feb 2025 12:58 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले को टीबी मुक्त बनाने की कवायद तेज शुरू कर दी गई है। इसके तहत अब मार्च माह में जिले के 65 गांव टीबी मुक्त होंगे। इससे पहले 20 गांवों को पिछले साल ही टीबी मुक्त किया गया था। इसके तहत अब तक करीब 30 हजार तीमारदारों की दवा शुरू भी की गई है। हाल ही में शुरू किए गए टीबी की स्क्रीनिंग के अभियान के तहत तीन माह में 40 नए मरीज सामने आ चुके हैं।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। वर्ष 2024 में 1800 मरीज पॉजिटिव मिले थे और करीब 200 लोगों की मौत हुई थी। वर्तमान समय में करीब एक हजार मरीज एक्टिव हैं। जबकि 700 मरीजों को विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की तरफ से गोद लिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग टीबी के मरीजों को छह महीने में तीन हजार रुपये दे रही है। इसके तहत प्रतिमाह 500 रुपये दिए जाते हैं। इस योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग ने एक साल में टीबी मरीजों को 70 लाख रुपये का अनुदान दिया है।
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प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान ः टीबी से बचाव को लेकर केंद्र सरकार की ओर से भी प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया है। इस योजना के तहत अब जन प्रतिनिधि व समाजसेवी संस्थाओं के लोग मरीजों को गोद लिया है। मरीजों को गोद लेने के बाद उन्हें जरूरत का सामान पहुंचने सहित अन्य सहायता दी जा रही है।
बीमारी का परिचय ः टीबी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जो हवा में संक्रमण से फैलती है। यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है।
सबसे कॉमन फेफड़ों की टीबी ही है लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। टीबी का बैक्टीरिया हवा के जरिए फैलता है। मरीज को इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि किसी भी सूरत में डॉक्टर की बताई गई दवा न छूटे।
पिछले तीन महीने में 75 हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। इसमें से टीबी मरीजों के संपर्क में आने वाले 25 हजार से अधिक लोगों की दवा शुरू की गई है। राहत की बात है कि केवल 40 लोगों को ही टीबी मिली है। मार्च में 65 गांवों और टीबी मुक्त घोषित कर दिया गया है। - संदीप बातिश, उप सिविल सर्जन व जिला नोडल अधिकारी, टीबी बचाव कार्यक्रम, कैथल।
मार्च में इन गांवों को किया जाना है टीबी मुक्त
खंड ढांड
आहूं
पाबला
धौंस
साकरा
खंड पूंडरी
सांच
देवीगढ़
सांपनखेड़ी
बदनारा
जटहेड़ी
खंड सीवन
लंडाहेड़ी
मालखेड़ी
फर्शमाजरा
आंधली
गोबिंदपुरा
जगदीशपुरा
नंदसिंह वाला
चक्क पाडला
पट्टी खोत
खंड गुहला
मंझेड़ी
बुढानपुर गुजरां
छन्ना जटां
हरनौला
कसौली
खेड़ी दाबन
मेघा माजरी
दाबा
चाबा
लालपुर
खंबेड़ा
दुसेरपुर
खुशहाल माजरा
थेह मुकेरियां
मैंगड़ा
रत्ता खेड़ा घड़ाम
सरकपुर
उमेदपुर
मंझेड़ी
महमूदपुर
रिवाड़ जागीर
घोघ
गढ़ी नजीर
खंड कलायत
भालंग
दुमाड़ा
कलासर
नरवलगढ़
सारण
सिल्लाखेड़ा
वजीर नगर
खंड राजौंद
नंदकरण माजरा
संतोखमाजरा
फरियाबाद
रोहेड़ा माजरा
कुकरकंडा
टीबी से मुक्त हो चुके ये गांव
मंझेडी
बुडनपुर
छन्ना जाटान
हरनौला
जुनेदपुर
सुल्तानियां
कसौली
खेड़ी दाबन
मेगा माजरा
फर्शमाजरा
ढंडवाना
धेरूड़ू
दुमाड़ा
भालंग
कलासर
नरवलगढ़
सिल्लाखेड़ा
बदनारा
जटहेड़ी
मुन्नाहेड़ी
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कैथल। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले को टीबी मुक्त बनाने की कवायद तेज शुरू कर दी गई है। इसके तहत अब मार्च माह में जिले के 65 गांव टीबी मुक्त होंगे। इससे पहले 20 गांवों को पिछले साल ही टीबी मुक्त किया गया था। इसके तहत अब तक करीब 30 हजार तीमारदारों की दवा शुरू भी की गई है। हाल ही में शुरू किए गए टीबी की स्क्रीनिंग के अभियान के तहत तीन माह में 40 नए मरीज सामने आ चुके हैं।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। वर्ष 2024 में 1800 मरीज पॉजिटिव मिले थे और करीब 200 लोगों की मौत हुई थी। वर्तमान समय में करीब एक हजार मरीज एक्टिव हैं। जबकि 700 मरीजों को विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की तरफ से गोद लिया गया है।
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स्वास्थ्य विभाग टीबी के मरीजों को छह महीने में तीन हजार रुपये दे रही है। इसके तहत प्रतिमाह 500 रुपये दिए जाते हैं। इस योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग ने एक साल में टीबी मरीजों को 70 लाख रुपये का अनुदान दिया है।
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प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान ः टीबी से बचाव को लेकर केंद्र सरकार की ओर से भी प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया है। इस योजना के तहत अब जन प्रतिनिधि व समाजसेवी संस्थाओं के लोग मरीजों को गोद लिया है। मरीजों को गोद लेने के बाद उन्हें जरूरत का सामान पहुंचने सहित अन्य सहायता दी जा रही है।
बीमारी का परिचय ः टीबी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जो हवा में संक्रमण से फैलती है। यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है।
सबसे कॉमन फेफड़ों की टीबी ही है लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। टीबी का बैक्टीरिया हवा के जरिए फैलता है। मरीज को इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि किसी भी सूरत में डॉक्टर की बताई गई दवा न छूटे।
पिछले तीन महीने में 75 हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। इसमें से टीबी मरीजों के संपर्क में आने वाले 25 हजार से अधिक लोगों की दवा शुरू की गई है। राहत की बात है कि केवल 40 लोगों को ही टीबी मिली है। मार्च में 65 गांवों और टीबी मुक्त घोषित कर दिया गया है। - संदीप बातिश, उप सिविल सर्जन व जिला नोडल अधिकारी, टीबी बचाव कार्यक्रम, कैथल।
मार्च में इन गांवों को किया जाना है टीबी मुक्त
खंड ढांड
आहूं
पाबला
धौंस
साकरा
खंड पूंडरी
सांच
देवीगढ़
सांपनखेड़ी
बदनारा
जटहेड़ी
खंड सीवन
लंडाहेड़ी
मालखेड़ी
फर्शमाजरा
आंधली
गोबिंदपुरा
जगदीशपुरा
नंदसिंह वाला
चक्क पाडला
पट्टी खोत
खंड गुहला
मंझेड़ी
बुढानपुर गुजरां
छन्ना जटां
हरनौला
कसौली
खेड़ी दाबन
मेघा माजरी
दाबा
चाबा
लालपुर
खंबेड़ा
दुसेरपुर
खुशहाल माजरा
थेह मुकेरियां
मैंगड़ा
रत्ता खेड़ा घड़ाम
सरकपुर
उमेदपुर
मंझेड़ी
महमूदपुर
रिवाड़ जागीर
घोघ
गढ़ी नजीर
खंड कलायत
भालंग
दुमाड़ा
कलासर
नरवलगढ़
सारण
सिल्लाखेड़ा
वजीर नगर
खंड राजौंद
नंदकरण माजरा
संतोखमाजरा
फरियाबाद
रोहेड़ा माजरा
कुकरकंडा
टीबी से मुक्त हो चुके ये गांव
मंझेडी
बुडनपुर
छन्ना जाटान
हरनौला
जुनेदपुर
सुल्तानियां
कसौली
खेड़ी दाबन
मेगा माजरा
फर्शमाजरा
ढंडवाना
धेरूड़ू
दुमाड़ा
भालंग
कलासर
नरवलगढ़
सिल्लाखेड़ा
बदनारा
जटहेड़ी
मुन्नाहेड़ी