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Kaithal News: मां के कारण ही हर एक का अस्तित्व
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। बच्चे की पहली शिक्षक माता होती है। माता ही सबसे पहले बच्चे को बोलना, पढऩा, चलना, उठना और बैठना सिखाती है। इसी उपलक्ष्य में मई माह में हर वर्ष दूसरे रविवार को मातृ दिवस मनाया जाता है। बच्चों को भी माता पिता के बुढ़ापे का सहारा बनना चाहिए। मातृ दिवस मनाने के विषय पर अमर उजाला की ओर से सुपार्श्व जैन स्कूल में संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें माताओं ने अपने विचार साझा किए। माताएं अपने बच्चों का किस प्रकार ध्यान रखें और जिंदगी में बच्चों को कैसे आगे बढ़ाए। इसके लिए विमर्श किया गया। माताओं ने कहा कि बच्चों को भी बुढ़ापे में अपने माता पिता का सहारा बनना चाहिए।
मां के कारण है इंसान का अस्तित्व
सुपार्श्व जैन स्कूल की संचालिका प्रज्ञा पाशा जैन ने कहा कि धरती पर मौजूद प्रत्येक इंसान का अस्तित्व, मां के कारण ही है। मां के जन्म देने पर ही मनुष्य धरती पर आता है और मां के स्नेह दुलार और संस्कारों में मानवता का गुण सीखता है। हम अपने व्यस्त जीवन में यदि हर दिन न सही तो कम से कम साल में एक बार मां के प्रति पूर्ण समर्पित होकर इस दिन को उत्सव की तरह मना सकते हैं। हमारे हर विचार और भाव के पीछे मां द्वारा रोपित किए गए संस्कार के बीज हैं, जिनकी बदौलत हम एक अच्छे इंसान की श्रेणी में आते हैं।
मां का अहसान नहीं भूलना चाहिए
अध्यापिका रेखा खुराना ने कहा कि वह एक माता ही है, जिसकी देखरेख में बच्चा बड़ा होता है। बच्चा कितना ही बड़ा क्यों न हो जाए, माता के लिए वह बच्चा ही रहता है। माताएं पूरा दिन अपने बच्चे का ध्यान रखती है और इसके साथ साथ घर का काम भी निपटाती है। आज के समय में बहुत से बच्चे ऐसे हैं जो अपने संस्कारों को भूलते जा रहे हैं। बुढ़ापे में अपने माता पिता का सहारा बनने की बजाय उन्हें दर दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। हमें हमारी मां के अहसान को कभी नहीं भूलना चाहिए।
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बच्चों को आगे बढ़ाने में मां का अहम योगदान-
अध्यापिका स्वाति शर्मा ने कहा कि मातृ दिवस यह खास दिन मां के स्वास्थ्य और कल्याण के महत्व के बारे में जागरूक करता है। मदर्स डे एक विशेष दिन है, जो माताओं द्वारा हमारे जीवन और समाज में किए गए अपार योगदान को पहचानता है। यह बिना शर्त प्यार और देखभाल का जश्न मनाने का दिन है। माताएं अपने बच्चों को पढऩे लिखने और आगे बढऩे में भी हमेशा प्रेरणादायक होती हैं।
माताओं के संस्कार होने जरूरी
अध्यापिका नीलम ने कहा कि कहा कि मां संपूर्ण व्यक्तित्व और एक प्रतिभा को पनपने, उन्हें संपूर्ण विकसित करने और संपूर्णता देने में मदद करती हैं। माताओं का संस्कार हमारे जीवन में बहुत मायने रखता है। किसी भी व्यक्ति को एक मां नौ महीने पहले से जानती है और उसका समाज बाद में। माता-पिता की सेवा, आदर और सम्मान से सफल जीवन प्राप्त किया जा सकता है। जीवन में मां का स्थान हमेशा सर्वोपरि रहता है, इसलिए हमें अपनी मां को हमेशा खुश रखना चाहिए।
जिंदगी के हर पड़ाव पर मां की है जरूरत
अध्यापिका पूनम ने कहा कि मां और बच्चे का एक अनोखा रिश्ता होता है, जो कि मां की गर्भ से भी गहरा हो जाता है। बच्चा छोटा हो या बड़ा, मां अपने हर बच्चे का एक समान ख्याल रखती है। बच्चे को भी जिंदगी के हर पड़ाव में मां की जरूरत होती है। मां के होने से आपका हर दिन खास होता है, तो क्यों न एक दिन मां के लिए भी यादगार बनाया जाए, क्योंकि न उसे यह एहसास दिलाया जाए कि उसके होने से हमारा जीवन कितना आसान हो गया।
मां का कर्ज कभी नहीं चुका सकते
अध्यापिका सीमा ने कहा कि मां के प्यार को समझना मुश्किल है, क्योंकि वह अपने बच्चे से निस्वार्थ प्यार करती है और सुख-दुख में उसके साथ खड़ी रहती है। मां क्या है इसे बता पाना आसान नहीं है वो जो हमारे लिए करती है उसका कर्ज हम कभी नहीं चुका सकते। हमारे विकास, संस्कार और चरित्र को आकार देने के लिए खुद को भूल जाने वाली मां के लिए यह एक दिन इसलिए समर्पित किया जाता है, ताकि हम अपनी हर भावनाएं व्यक्त कर पाएं। मां का प्यार का प्यार और डांट दोनों ही बच्चे के लिए जरूरी है, क्योंकि वो जानती है कि हमारी भलाई किसमें है।
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कैथल। बच्चे की पहली शिक्षक माता होती है। माता ही सबसे पहले बच्चे को बोलना, पढऩा, चलना, उठना और बैठना सिखाती है। इसी उपलक्ष्य में मई माह में हर वर्ष दूसरे रविवार को मातृ दिवस मनाया जाता है। बच्चों को भी माता पिता के बुढ़ापे का सहारा बनना चाहिए। मातृ दिवस मनाने के विषय पर अमर उजाला की ओर से सुपार्श्व जैन स्कूल में संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें माताओं ने अपने विचार साझा किए। माताएं अपने बच्चों का किस प्रकार ध्यान रखें और जिंदगी में बच्चों को कैसे आगे बढ़ाए। इसके लिए विमर्श किया गया। माताओं ने कहा कि बच्चों को भी बुढ़ापे में अपने माता पिता का सहारा बनना चाहिए।
मां के कारण है इंसान का अस्तित्व
सुपार्श्व जैन स्कूल की संचालिका प्रज्ञा पाशा जैन ने कहा कि धरती पर मौजूद प्रत्येक इंसान का अस्तित्व, मां के कारण ही है। मां के जन्म देने पर ही मनुष्य धरती पर आता है और मां के स्नेह दुलार और संस्कारों में मानवता का गुण सीखता है। हम अपने व्यस्त जीवन में यदि हर दिन न सही तो कम से कम साल में एक बार मां के प्रति पूर्ण समर्पित होकर इस दिन को उत्सव की तरह मना सकते हैं। हमारे हर विचार और भाव के पीछे मां द्वारा रोपित किए गए संस्कार के बीज हैं, जिनकी बदौलत हम एक अच्छे इंसान की श्रेणी में आते हैं।
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मां का अहसान नहीं भूलना चाहिए
अध्यापिका रेखा खुराना ने कहा कि वह एक माता ही है, जिसकी देखरेख में बच्चा बड़ा होता है। बच्चा कितना ही बड़ा क्यों न हो जाए, माता के लिए वह बच्चा ही रहता है। माताएं पूरा दिन अपने बच्चे का ध्यान रखती है और इसके साथ साथ घर का काम भी निपटाती है। आज के समय में बहुत से बच्चे ऐसे हैं जो अपने संस्कारों को भूलते जा रहे हैं। बुढ़ापे में अपने माता पिता का सहारा बनने की बजाय उन्हें दर दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। हमें हमारी मां के अहसान को कभी नहीं भूलना चाहिए।
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बच्चों को आगे बढ़ाने में मां का अहम योगदान-
अध्यापिका स्वाति शर्मा ने कहा कि मातृ दिवस यह खास दिन मां के स्वास्थ्य और कल्याण के महत्व के बारे में जागरूक करता है। मदर्स डे एक विशेष दिन है, जो माताओं द्वारा हमारे जीवन और समाज में किए गए अपार योगदान को पहचानता है। यह बिना शर्त प्यार और देखभाल का जश्न मनाने का दिन है। माताएं अपने बच्चों को पढऩे लिखने और आगे बढऩे में भी हमेशा प्रेरणादायक होती हैं।
माताओं के संस्कार होने जरूरी
अध्यापिका नीलम ने कहा कि कहा कि मां संपूर्ण व्यक्तित्व और एक प्रतिभा को पनपने, उन्हें संपूर्ण विकसित करने और संपूर्णता देने में मदद करती हैं। माताओं का संस्कार हमारे जीवन में बहुत मायने रखता है। किसी भी व्यक्ति को एक मां नौ महीने पहले से जानती है और उसका समाज बाद में। माता-पिता की सेवा, आदर और सम्मान से सफल जीवन प्राप्त किया जा सकता है। जीवन में मां का स्थान हमेशा सर्वोपरि रहता है, इसलिए हमें अपनी मां को हमेशा खुश रखना चाहिए।
जिंदगी के हर पड़ाव पर मां की है जरूरत
अध्यापिका पूनम ने कहा कि मां और बच्चे का एक अनोखा रिश्ता होता है, जो कि मां की गर्भ से भी गहरा हो जाता है। बच्चा छोटा हो या बड़ा, मां अपने हर बच्चे का एक समान ख्याल रखती है। बच्चे को भी जिंदगी के हर पड़ाव में मां की जरूरत होती है। मां के होने से आपका हर दिन खास होता है, तो क्यों न एक दिन मां के लिए भी यादगार बनाया जाए, क्योंकि न उसे यह एहसास दिलाया जाए कि उसके होने से हमारा जीवन कितना आसान हो गया।
मां का कर्ज कभी नहीं चुका सकते
अध्यापिका सीमा ने कहा कि मां के प्यार को समझना मुश्किल है, क्योंकि वह अपने बच्चे से निस्वार्थ प्यार करती है और सुख-दुख में उसके साथ खड़ी रहती है। मां क्या है इसे बता पाना आसान नहीं है वो जो हमारे लिए करती है उसका कर्ज हम कभी नहीं चुका सकते। हमारे विकास, संस्कार और चरित्र को आकार देने के लिए खुद को भूल जाने वाली मां के लिए यह एक दिन इसलिए समर्पित किया जाता है, ताकि हम अपनी हर भावनाएं व्यक्त कर पाएं। मां का प्यार का प्यार और डांट दोनों ही बच्चे के लिए जरूरी है, क्योंकि वो जानती है कि हमारी भलाई किसमें है।