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Kaithal News: कैथल के फतेहपुर में 168 वर्ष बीत जाने के बाद भी नहीं मनाया जाता रक्षा बंधन का पर्व
Sun, 10 Aug 2025 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 10 Aug 2025 12:49 AM IST
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11 कैथल। पूंडरी में करनाल रोड पर बना शहीद गिरधर लाल अहलुवालिया चौक। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी, कैथल। फतेहपुर गांव में आहलूवालिया समाज के कई परिवार 168 वर्ष बाद भी रक्षा बंधन का पर्व नहीं मनाते। इसके पीछे 1857 की क्रांति में शहीद हुए वीर गिरधरलाल अहलूवालिया की शहादत की दर्दभरी कहानी जुड़ी है। हालांकि, पिछले दो सालों में कुछ लोगों ने हिंदू धर्म के इस बड़े पर्व को फिर से मनाना शुरू किया है, लेकिन विशेषकर सुल्याण गोत्र के परिवार अब भी इस दिन केवल शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और हवन करते हैं।
गौरलब है कि रक्षाबंधन के दिन अहलुवालिया बिरादरी में ये परंपरा चली आ रही है कि वे इस दिन अपने शहीद की याद में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और हवन करवाते हैं। ग्रामीण विनेश वालिया, रूपेंद्र वालिया ने बताया कि वर्ष 1827 में गांव में ही जन्मे गिरधरलाल अहलुवालिया ने 1857 की क्रांति के दौरान शहादत दी थी। बताते हैं कि जब गांव में अंग्रेजी अधिकारी कर वसूल करने के लिए आया तो उसका सामना गिरधरलाल अहलुवालिया से हो गया। कहासुनी के दौरान 30 वर्षीय वीर गिरधरलाल अहलुवालिया ने लाठी के एक ही प्रहार से अंग्रेज अधिकारी को मौत के घाट उतार दिया था
इसके बाद अंग्रेजी सैनिकों ने उन्हें पकड़ने के लिए गांव को चारों तरफ से घेरा डाल लिया। ग्रामीणों ने भी अपने वीर सपूत को छुपा लिया और अंग्रेजों को न सौंपने का निर्णय लिया। जिसके बाद अंग्रेजों ने गांव के पास बने ऊंचे स्थान पर तोप लगा दी और चेतावनी दी कि अगर गिरधरलाल अहलुवालिया को उनके हवाले नहीं किया तो पूरे गांव को तोप के गोलों से उड़ा दिया जाएगा। बावजूद इसके ग्रामीण जुबान खोलने को तैयार नहीं हुए लेकिन ये चेतावनी उनकी मां के कानों तक पहुंच गई। इसके बाद मां ने पूरे गांव की रक्षा-सुरक्षा के लिए गिरधरलाल को अंग्रेजों को सौंप दिया।
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अंग्रेज सैनिक गिरधर लाल को पकड़कर ले जाने लगे तो इसकी भनक ग्रामीणों को लग गई और काफी संख्या में हथियार लाठी आदि लेकर ग्रामीण सैनिकों के पीछे छुड़वाने के लिए पड़ गए। इसके बाद सैनिकों ने कैथल शुगर मिल के पास काली माट्टी पर ले जाकर गिरधरलाल अहलुवालिया को तोप सामने बांधकर उड़ा दिया। तब से लेकर आज तक इस गांव में रक्षा बंधन के पर्व को नहीं मनाया जाता है। शहीद की याद में पूडरी में एक चौक व लाइब्रेरी बनाई गई है।
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पूंडरी, कैथल। फतेहपुर गांव में आहलूवालिया समाज के कई परिवार 168 वर्ष बाद भी रक्षा बंधन का पर्व नहीं मनाते। इसके पीछे 1857 की क्रांति में शहीद हुए वीर गिरधरलाल अहलूवालिया की शहादत की दर्दभरी कहानी जुड़ी है। हालांकि, पिछले दो सालों में कुछ लोगों ने हिंदू धर्म के इस बड़े पर्व को फिर से मनाना शुरू किया है, लेकिन विशेषकर सुल्याण गोत्र के परिवार अब भी इस दिन केवल शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और हवन करते हैं।
गौरलब है कि रक्षाबंधन के दिन अहलुवालिया बिरादरी में ये परंपरा चली आ रही है कि वे इस दिन अपने शहीद की याद में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और हवन करवाते हैं। ग्रामीण विनेश वालिया, रूपेंद्र वालिया ने बताया कि वर्ष 1827 में गांव में ही जन्मे गिरधरलाल अहलुवालिया ने 1857 की क्रांति के दौरान शहादत दी थी। बताते हैं कि जब गांव में अंग्रेजी अधिकारी कर वसूल करने के लिए आया तो उसका सामना गिरधरलाल अहलुवालिया से हो गया। कहासुनी के दौरान 30 वर्षीय वीर गिरधरलाल अहलुवालिया ने लाठी के एक ही प्रहार से अंग्रेज अधिकारी को मौत के घाट उतार दिया था
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इसके बाद अंग्रेजी सैनिकों ने उन्हें पकड़ने के लिए गांव को चारों तरफ से घेरा डाल लिया। ग्रामीणों ने भी अपने वीर सपूत को छुपा लिया और अंग्रेजों को न सौंपने का निर्णय लिया। जिसके बाद अंग्रेजों ने गांव के पास बने ऊंचे स्थान पर तोप लगा दी और चेतावनी दी कि अगर गिरधरलाल अहलुवालिया को उनके हवाले नहीं किया तो पूरे गांव को तोप के गोलों से उड़ा दिया जाएगा। बावजूद इसके ग्रामीण जुबान खोलने को तैयार नहीं हुए लेकिन ये चेतावनी उनकी मां के कानों तक पहुंच गई। इसके बाद मां ने पूरे गांव की रक्षा-सुरक्षा के लिए गिरधरलाल को अंग्रेजों को सौंप दिया।
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अंग्रेज सैनिक गिरधर लाल को पकड़कर ले जाने लगे तो इसकी भनक ग्रामीणों को लग गई और काफी संख्या में हथियार लाठी आदि लेकर ग्रामीण सैनिकों के पीछे छुड़वाने के लिए पड़ गए। इसके बाद सैनिकों ने कैथल शुगर मिल के पास काली माट्टी पर ले जाकर गिरधरलाल अहलुवालिया को तोप सामने बांधकर उड़ा दिया। तब से लेकर आज तक इस गांव में रक्षा बंधन के पर्व को नहीं मनाया जाता है। शहीद की याद में पूडरी में एक चौक व लाइब्रेरी बनाई गई है।

11 कैथल। पूंडरी में करनाल रोड पर बना शहीद गिरधर लाल अहलुवालिया चौक। संवाद