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आडवाणी और शेखावत के साथ जेल में बिताए थे 19 महीने

Wed, 24 Jun 2015 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल Updated Wed, 24 Jun 2015 11:44 PM IST
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कैथल। आज ही के दिन 1975 को देश में इमरजेंसी की घोषणा हुई थी। इंदिरा गांधी ने हमारे देश में आपातकाल की घोषणा की थी। प्रेस की आजादी के अलावा देश के कई नामी नेताओं और लोगों को जेल में डाला गया। कैथल में रहने वाले कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिव दिलबाग मोर ने भी इस दौरान 19 महीने जेल में बिताए थे। आज भी उनके जहन में आपातकाल की यादें ताजा हैं।
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मोर बताते हैं कि जेल में लालकृष्ण आडवाणी, भैरो सिंह शेखावत जैसे नेताओं के साथ बीताए उन्होंने ने भी 19 महीने के समय बिताए। कहते हैं उन्हें अब भी लगता है कि जैसे यह कल की बात हो। मोर ने बताया कि इस दौरान उन्हें एक झूठे केस उम्र कैद की सजा सुनाई गई। वे रोहतक जेल में बंद थे।
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जेल में उन्हें नंबरदार बनाया गया था। जेलर ने उन्हें बताया कि कुछ विशेष कैदी यहां आने वाले हैं। इसके बाद पूर्व पीएम चंद्र शेखर, लाल कृष्ण आडवाणी, चौधरी देवी लाल, भैरो सिंह शेखावत, पीलू मोदी, मुरली मनोहर जोशी, राज नारायण, भाई महावीर सिंह, बलराज, सुरेंद्र मोहन, चांद राम, मणीराम, केआर मलकानी, मधु दंडवते, डा. बीजू पटनायक, हरदवारी लाल सहित अन्य राजनेताओं को कैदी के तौर पर रोहतक जेल में लाया गया। जहां वे 19 महीने तक रहे।
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मोर ने बताया कि इन सभी नेताओं की देखभाल की जिम्मेवारी उन्हें दी गई थी। राजनेताओं को 6 माह तक किसी को भी मिलने नहीं दिया गया। जब भी कोई परिजन उनसे मिलने के लिए आता तो सीआईडी से अधिकारी एवं जेलर के अलावा वह भी मौजूद होते थे। जेल में रहते हुए इन सभी नेताओं से आत्मीय संबंध हो गए थे। यही कारण है हरियाणा का सीएम बनते ही ताऊ देवी लाल ने पहला काम कैबिनेट मीटिंग में प्रस्ताव पास कर गवर्नर के माध्यम से उनकी सजा माफ की। इसके बाद उन्हें जेल सुधार समिति का डायरेक्टर बनाया।

हरियाणा की जेलों में रखे गए थे कई कैदी
दिलबाग मोर ने बताया कि 40 वर्ष पहले इंदिरा गांधी के राज में लागू किया गया आपातकाल देश के इतिहास में काले समय के तौर पर याद किया जाता है। इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द हो जाने के समय संजय गांधी के पास उस समय सुपर पावर थी।


संजय गांधी के एक इशारे ने ही आपातकाल लगवा दिया। चारों ओर जालसाजी का साम्राज्य स्थापित कर दिया था। कांग्रेस पार्टी की तरफ से इंदिरा गांधी पूर्ण रूप से कमजोर हो चुकी थी। क्योंकि सुपर पीएम तो संजय गांधी थे। हरियाणा में इमरजेंसी को प्रभाव सबसे अधिक रहा। उस समय के रक्षा मंत्री चौधरी बंसी लाल ने ही सभी राजनैतिक कैदियों को हरियाणा की जेलों में रखा था।
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