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Kaithal News: व्याख्यान में शिव चेतना और आध्यात्मिकता पर मंथन
Thu, 21 May 2026 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 21 May 2026 12:27 AM IST
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आई एम शिवा कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि को सम्मानित करते सदस्य।
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय और इंदिरा गांधी महिला महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘आई एम शिवा’ विषय पर विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिव चेतना, आध्यात्मिकता और आत्मबोध के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. आरती गर्ग ने मुख्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कैथल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा महिला शिक्षा के क्षेत्र में महाविद्यालय की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और व्यक्तित्व विकास का मजबूत आधार भी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य राजेंद्रकुमार अनायत ने शिव के साधनात्मक एवं आध्यात्मिक स्वरूप को स्पष्ट करते हुए कहा कि ‘शिवोऽहम्’ का अर्थ व्यक्ति की उस चेतना से है, जो परम चेतना से जुड़ी होती है। उन्होंने भजन, प्रदक्षिणा और साधना के वास्तविक आध्यात्मिक अर्थों पर भी अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर कुलगुरु ने निर्वाण अष्टक का पाठ भी किया।
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मुख्य वक्ता प्रो. राज नेहरू ने कश्मीर शैव दर्शन और प्रत्यभिज्ञा दर्शन की गहन व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि सामान्यतः लोग शिव की कल्पना कैलाश, शिव-पार्वती और अन्य प्रतीकों के माध्यम से करते हैं, लेकिन ‘मैं शिव हूं’ का भाव व्यक्ति के भीतर स्थित चेतना और आत्मअनुभूति से जुड़ा हुआ है।
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कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय और इंदिरा गांधी महिला महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘आई एम शिवा’ विषय पर विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिव चेतना, आध्यात्मिकता और आत्मबोध के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. आरती गर्ग ने मुख्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कैथल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा महिला शिक्षा के क्षेत्र में महाविद्यालय की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और व्यक्तित्व विकास का मजबूत आधार भी है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य राजेंद्रकुमार अनायत ने शिव के साधनात्मक एवं आध्यात्मिक स्वरूप को स्पष्ट करते हुए कहा कि ‘शिवोऽहम्’ का अर्थ व्यक्ति की उस चेतना से है, जो परम चेतना से जुड़ी होती है। उन्होंने भजन, प्रदक्षिणा और साधना के वास्तविक आध्यात्मिक अर्थों पर भी अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर कुलगुरु ने निर्वाण अष्टक का पाठ भी किया।
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मुख्य वक्ता प्रो. राज नेहरू ने कश्मीर शैव दर्शन और प्रत्यभिज्ञा दर्शन की गहन व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि सामान्यतः लोग शिव की कल्पना कैलाश, शिव-पार्वती और अन्य प्रतीकों के माध्यम से करते हैं, लेकिन ‘मैं शिव हूं’ का भाव व्यक्ति के भीतर स्थित चेतना और आत्मअनुभूति से जुड़ा हुआ है।