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दिव्यांग किसी से कम नहीं, वे भी छू सकते हैं बुलंदियां : हवा सिंह

Thu, 19 Dec 2024 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Thu, 19 Dec 2024 12:37 AM IST
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Disabled are no less than anyone, they can also reach great heights: Hawa Singh
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। समग्र शिक्षा पंचकूला के तत्वावधान में बुधवार को जाखौली अड्डा स्थित राजकीय कन्या स्कूल में एक दिवसीय समावेशी शिक्षा उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पहुंचे विशेषज्ञों ने दिव्यांगों को पढ़ाने की जानकारी दी। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए करनाल सिविल अस्पताल से डॉ. हवा सिंह ने कहा कि दिव्यांग किसी से कम नहीं, वे भी बुलंदियां छू सकते हैं।

इस अवसर पर आए हुए सभी प्रधानाचार्य मुख्य अध्यापकों मुख्य शिक्षकों का स्वागत करते हुए जिला परियोजना अधिकारी सरोज कुमारी ने कहा कि आप लोगों को एक दिन पूरे लगन के साथ इस कार्यक्रम को सुनना तथा प्रत्येक रिसोर्स पर्सन की ओर से बताई गई मुख्य बातों को नोट करके विद्यालय स्तर पर जाकर दिव्यांग बच्चों पर लागू करना है। यह बहुत ही सराहनीय कार्य है , ताकि स्कूल स्तर विद्यालय में पढ़ रहे दिव्यांग बच्चों को उसका लाभ मिल सके।
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मुख्य वक्ता डॉ. हवा सिंह ने कहा कि हमारे समाज में ऐसे बहुत से उदाहरण प्रस्तुत हैं, जिसमें दिव्यांगों ने बहुत कुछ करके दिखाया है। केवल उनका प्रोत्साहन की आवश्यकता है। समाज को कभी भी दिव्यांगजन को उसकी किसी भी प्रकार की कमी का एहसास नहीं करवाना चाहिए। हमेशा उसके किए गए छोटे-छोटे कार्यों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए, ताकि छोटे-छोटे कामों में पारंगत होकर वह बड़ी-बड़ी उपलब्धियां छू सके।
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जिला सिविल अस्पताल कैथल से पहुंचे बाल रोग विशेषज्ञ अनिल कुमार ने कहा कि 21 प्रकार की दिव्यंका होती है। बताया कि 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में दिव्यांग की संख्या जनसंख्या का 2.13 प्रतिशत हिस्सा है, जिसमें 75 प्रतिशत दिव्यांगजन गांव में रहते हैं व 25 प्रतिशत दिव्यांगजन शहरों में निवास करते हैं। रिसोर्स पर्सन के रूप में आईजी कॉलेज कैथल से आए हुए डॉक्टर नीरू ने कहा कि बच्चों में अनेक प्रकार की दिव्यांगता पाई जाती हैं। सामान्य तौर पर पढ़ने, लिखने एवं कैलकुलेशन में बच्चों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्राथमिक तौर पर उन समस्याओं की पहचान करके समाधान किया जा सकता है। जिसकी पहचान करके दिव्यांगजन को समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जा सकता हैl

कार्यक्रम में डॉ. कांता रानी ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि निरंतर मानसिक तनाव के कारण प्रत्येक व्यक्ति विचलित है। कार्यक्रम के समापन पर जिला सहायक परियोजना संयोजक कुशल कुमार ने सभी से आह्वान किया कि इस प्रशिक्षण में जो कुछ हम सबको सीखने को मिला है। उसे दिव्यांग बच्चों के जीवन में उजाला लाने के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए। मंच सफल संचालन विनोद आर्य पुस्तकालयाध्यक्ष आरोही मॉडल स्कूल ग्योंग ने किया।


इस अवसर पर जिला खंड शिक्षा अधिकारी बलबीर कश्यप, खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश कैंदल, खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश सिंगला, बीआरसी संजय शर्मा, सुरेश सिंगला खंड शिक्षा अधिकारी, एपीसी बलजीत सिंह, मनोज पंवार, विनोद आर्य, दिनेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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