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स्मॉग की चादर छाने से सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Nov 2021 11:27 PM IST
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Difficulty in breathing due to smog, burning in eyes
Difficulty in breathing due to smog, burning in eyes - फोटो : Kaithal
जिले में सुबह और शाम के समय प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। एयर क्वालिटी इंडेक्स दिवाली की रात से भी खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। दिवाली के दिन यह 254 था, जो मंगलवार को 404 औसत रहा। ये अति खतरनाक की श्रेणी में आता है। शाम के समय तो स्मॉग की चादर से पूरा जिला ढक जाता है। जिस कारण सायं को लोगों की आंखों में जलन की समस्या होती है। प्रदूषण को रोकने के सभी इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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बीते दिन शहर में नप की ओर सेक्टर 20 में पानी का छिड़काव अभियान की भी शुरूआत की गई है। इस अभियान से वृक्षों पर जमी धूल हटाई जा रही। ताकि वृक्ष ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन छोड़ सकें और आसमान में फैला स्मॉग कम हो सके। यह अभियान नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राजेंद्र शर्मा की देखरेख में चलाया जा रहा है।
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बीते सप्ताह से प्रदूषण का स्तर काफी खराब हो गया है। मंगलवार शाम 4 बजे जिले का एक्यूआई 404 मापा गया, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। धुंध से दमा और सांस के मरीजों का दम फूल रहा है तो सामान्य लोगों की आंखों में एलर्जी और जलन हो रही है। जिले में फसल अवशेषों में आग लगाए जाने के मामले भी हर रोज सामने आ रहे हैं। रात के समय में लोग अधिक आग लगा रहे हैं। इसकी वजह से रात व सुबह के समय प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। अधिकारियों का मानना है कि फसल अवशेष जलाने का असर पूरे जिले की हवा की गुणवत्ता को खराब कर रहा है और इससे फसल की गुणवत्ता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राजेंद्र शर्मा ने बताया कि प्रदूषण स्तर कम करने के लिए विभाग की ओर से काफी प्रयास किए जा रहे है। बीते दिन भी सेक्टर 20 में पेड़ों पर फायरब्रिगेड की गाड़ी व नप कर्मचारियों की सहायता से छिड़काव कराया गया। ताकि पेड़ों पर जमी धूल उतर सके और आक्सीजन अधिक दे सके। जब तक एक्यूआई स्तर कम नहीं हो जाता तब तक यह अभियान जारी रहेगा। मंगलवार को एक्यूआई स्तर 404 पर पहुंच गया।

जिला अस्पताल के डॉ. प्रदीप नागर ने बताया कि स्मॉग के कारण आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ होती है। घर से बाहर निकलने पर चश्मे और मास्क का प्रयोग करें। साथ ही दमा और सांस के रोगियों को अधिकांश समय घरों में रहें।
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