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Kaithal News: बसों की संख्या के साथ सफर की मुश्किलें भी बढ़ीं

Fri, 22 Aug 2025 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 22 Aug 2025 01:46 AM IST
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Difficulties of travelling increased with the number of buses
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। रोडवेज कैथल डिपो के बेड़े में बसों की संख्या बढ़ने के साथ यात्रियों के लिए सफर की मुश्किलें भी बढ़ी हैं। दरअसल, रोडवेज के पास 220 बसों का बेड़ा हो गया है लेकिन इनमें से बड़ी संख्या जर्जर और पुरानी तकनीक वाली बसें हैं। इस वजह से यात्रियों को सुगम यात्रा की सुविधा नहीं मिल पा रही।

डिपो की कुल 220 बसों में से 92 बसें बीएस-3 और बीएस-4 तकनीक की हैं। ऐसे में यात्रियों को मजबूरी में खटारा बसों में सफर करना पड़ रहा है।

हालात यह हैं कि कई बसों के शीशे टूटे हुए हैं, सीटें फटी हुई हैं और कई जगहों पर तो लोहे का ढांचा बाहर निकला हुआ है। ऐसी बसें यात्रियों को आराम देने के बजाय परेशानी का सबब बन रही हैं।
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सूत्रों के अनुसार, हाल ही में रोहतक से 20 जर्जर बसें कैथल डिपो भेजी गई हैं। इससे पहले पलवल और रेवाड़ी से भी खराब बसें यहां पहुंच चुकी हैं। यह प्रक्रिया पिछले साल नवंबर में एनसीआर जिलों में लागू ग्रैप नियमों के बाद शुरू हुई थी। उस समय एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण रोकने के लिए बीएस-3 और बीएस-4 बसों का संचालन बंद कर दिया गया था।
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इसके बाद से ही इन पुरानी बसों को एनसीआर से बाहर के जिलों में शिफ्ट किया जा रहा है। नतीजतन, बीते आठ महीनों में 82 जर्जर बसें कैथल डिपो में शामिल हो चुकी हैं, जबकि 48 बीएस-6 तकनीक की नई बसें एनसीआर जिलों को भेज दी गईं।

यात्रियों का कहना है कि बसों की संख्या बढ़ने के बावजूद लगातार खटारा वाहनों के आने से सफर आरामदायक होने की बजाय और अधिक मुश्किल हो गया है।

सरकार के आदेशों के तहत ही बीएस-4 तकनीक की बसें कैथल डिपो में भेजी जा रही हैं। ऐसा नहीं है कि सभी बसें खराब आती हैं। कुछ बसों में समस्या होती है तो उनकी मरम्मत कर ठीक कर दिया जाता है। -अनिल चोपड़ा, कार्यशाला प्रबंधक, कैथल डिपो

एसी के बाद बीएस-6 तकनीक की आएंगी 10 बसें

कैथल। डिपो में 30 नई बसों की मांग में से मुख्यालय ने बीएस-6 तकनीक वाली 10 बसें उपलब्ध कराने की मंजूरी दे दी है। उम्मीद है कि ये बसें अगले सप्ताह तक डिपो में शामिल हो जाएंगी। इन बसों के आने के बाद विशेषकर ग्रामीण व लंबी दूरी के रूटों पर यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। डिपो कार्यशाला प्रबंधक अनिल चोपड़ा ने बताया कि बसों का चेसिस नंबर जारी हो चुका है और कागजी कार्रवाई पूरी कर ली गई है। नई बसों के आने पर उन रूटों पर संचालन शुरू होगा जहां अब तक बसों की कमी से सेवाएं बाधित थीं। संवाद
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