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Kaithal News: गुहला में पुलिस के पहरे में घंटों बाद बांटी डीएपी
Sun, 27 Oct 2024 02:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 27 Oct 2024 02:15 AM IST
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गुरमीत सीड़ा
गुहला-चीका। चीका में डीएपी के लिए मारामारी चल रही है। शनिवार को मंडी में खाद लेने के लिए किसान अलसुबह दो बजे लाइन में लग गए थे लेकिन साढ़े आठ घंटे कतार में खड़े होने के बाद सुबह करीब 10 बजे किसानों को खाद मिली। वहीं, कई किसानों को खाद न मिलने पर मायूस होकर लौटना पड़ा। शुक्रवार को मंडी में शाम पांच बजे 500 बैग खाद पहुंची थी, जिसे शनिवार सुबह नौ बजे बांटना शुरू किया।
खाद लेने के लिए दोपहर तक किसानों की लाइन लगी रही। किसानों की भीड़ को देखते हुए पुलिस के पहरे में खाद वितरित की गई। किसान बोले सरसों और गेहूं की बिजाई के लिए उन्हें खाद पर्याप्त नहीं मिल रही है। किसानों की मानें तो उन्हें खाद के आठ से 10 बैग चाहिए, मगर एक किसान को तीन बैग ही दिए गए। पिछले एक माह से मंडी में खाद लेने के लिए चक्कर काट रहे हैं। वहीं लाइन में आगे-पीछे होने पर किसान भी आपस में उलझते रहे। महिलाएं भी खाद लेने के लिए लाइन में लगी रहीं।
एक सप्ताह बाद मंडी में पहुंचे 500 बैग ः कोऑपरेटिव सोसाइटी चीका में इससे पहले 20 अक्तूबर को खाद के 500 बैग पहुंचे थे। इसके बाद खाद लेने के लिए रोजाना किसान मंडी में चक्कर काटते रहे।
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महिलाओं की भी भागीदारी ः चीका में शुक्रवार देर शाम 300 थैले डीएपी की गाड़ी पहुंचने पर शनिवार को खाद वितरित किया। फिर भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। कोऑपरेटिव सोसाइटी के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिसमें महिलाएं भी सुबह-सुबह से शामिल हो रही हैं। 500 बैग डीएपी की खेप पहुंचने के बावजूद किसानों के अधिक भीड़ होने के कारण कोऑपरेटिव सोसाइटी कर्मचारियों ने खाद वितरित करने के लिए पुलिस की मदद लेनी पड़ी।
कोऑपरेटिव सोसाइटी के इंचार्ज राकेश कुमार, गुरप्रीत सिंह व सतबीर का कहना है कि किसानों को तीन बैग प्रति आधार कार्ड के हिसाब से डीएपी खाद दी जा रही है, और सोसाइटी प्रशासन किसानों को परेशानी नहीं होने दे रहा। इसके बावजूद किसानों की संख्या अधिक होने से मांग पूरी नहीं हो पा रही है। संवाद
सोसाइटी में एक हजार से भी ज्यादा किसान पहुंचे थे। सुबह चार बजे मंडी में खाद लेने के लिए भूखे-प्यासे लाइन में खड़े हुए थे। साढ़े 11ः30 बजे नंबर आया तो मात्र तीन कट्टे मिले। लाइन लगाने के बाद भी खाद नहीं मिल रही है।
- लाभ, किसान, बलबेहडा।
गांव में ही किसानों के लिए खाद देने की व्यवस्था होनी चाहिए। खाद लेने के लिए चीका आना पड़ता है। यहां आते हैं तो लंबी लाइन लगी होती है। पूरे दिन लाइन में खड़े-खड़े थक गए। 8 घंटे बाद खाद मिली। - संजीव, किसान, बदसुई
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गुहला-चीका। चीका में डीएपी के लिए मारामारी चल रही है। शनिवार को मंडी में खाद लेने के लिए किसान अलसुबह दो बजे लाइन में लग गए थे लेकिन साढ़े आठ घंटे कतार में खड़े होने के बाद सुबह करीब 10 बजे किसानों को खाद मिली। वहीं, कई किसानों को खाद न मिलने पर मायूस होकर लौटना पड़ा। शुक्रवार को मंडी में शाम पांच बजे 500 बैग खाद पहुंची थी, जिसे शनिवार सुबह नौ बजे बांटना शुरू किया।
खाद लेने के लिए दोपहर तक किसानों की लाइन लगी रही। किसानों की भीड़ को देखते हुए पुलिस के पहरे में खाद वितरित की गई। किसान बोले सरसों और गेहूं की बिजाई के लिए उन्हें खाद पर्याप्त नहीं मिल रही है। किसानों की मानें तो उन्हें खाद के आठ से 10 बैग चाहिए, मगर एक किसान को तीन बैग ही दिए गए। पिछले एक माह से मंडी में खाद लेने के लिए चक्कर काट रहे हैं। वहीं लाइन में आगे-पीछे होने पर किसान भी आपस में उलझते रहे। महिलाएं भी खाद लेने के लिए लाइन में लगी रहीं।
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एक सप्ताह बाद मंडी में पहुंचे 500 बैग ः कोऑपरेटिव सोसाइटी चीका में इससे पहले 20 अक्तूबर को खाद के 500 बैग पहुंचे थे। इसके बाद खाद लेने के लिए रोजाना किसान मंडी में चक्कर काटते रहे।
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महिलाओं की भी भागीदारी ः चीका में शुक्रवार देर शाम 300 थैले डीएपी की गाड़ी पहुंचने पर शनिवार को खाद वितरित किया। फिर भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। कोऑपरेटिव सोसाइटी के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिसमें महिलाएं भी सुबह-सुबह से शामिल हो रही हैं। 500 बैग डीएपी की खेप पहुंचने के बावजूद किसानों के अधिक भीड़ होने के कारण कोऑपरेटिव सोसाइटी कर्मचारियों ने खाद वितरित करने के लिए पुलिस की मदद लेनी पड़ी।
कोऑपरेटिव सोसाइटी के इंचार्ज राकेश कुमार, गुरप्रीत सिंह व सतबीर का कहना है कि किसानों को तीन बैग प्रति आधार कार्ड के हिसाब से डीएपी खाद दी जा रही है, और सोसाइटी प्रशासन किसानों को परेशानी नहीं होने दे रहा। इसके बावजूद किसानों की संख्या अधिक होने से मांग पूरी नहीं हो पा रही है। संवाद
सोसाइटी में एक हजार से भी ज्यादा किसान पहुंचे थे। सुबह चार बजे मंडी में खाद लेने के लिए भूखे-प्यासे लाइन में खड़े हुए थे। साढ़े 11ः30 बजे नंबर आया तो मात्र तीन कट्टे मिले। लाइन लगाने के बाद भी खाद नहीं मिल रही है।
- लाभ, किसान, बलबेहडा।
गांव में ही किसानों के लिए खाद देने की व्यवस्था होनी चाहिए। खाद लेने के लिए चीका आना पड़ता है। यहां आते हैं तो लंबी लाइन लगी होती है। पूरे दिन लाइन में खड़े-खड़े थक गए। 8 घंटे बाद खाद मिली। - संजीव, किसान, बदसुई