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Kaithal News: 14 महीनों में 10.27 करोड़ रुपये की साइबर ठगी, रिकवरी सिर्फ 6 प्रतिशत
Tue, 10 Mar 2026 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 10 Mar 2026 01:39 AM IST
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नरेंद्र पंडित
कैथल। बीते 14 महीनों के भीतर साइबर अपराधियों ने आम जनता की जेब से 10.27 करोड़ रुपये उड़ा लिए। यह आंकड़ा केवल दर्ज मामलों का है, जबकि वास्तविकता इससे कहीं अधिक होने का अनुमान है। पुलिस अब तक केवल 65.56 लाख रुपये ही रिकवर कर पाई है, यानी रिकवरी की दर 6 प्रतिशत से भी कम है। इस वर्ष अब तक साइबर ठगी के 24 मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 1.54 करोड़ रुपये की ठगी हुई, लेकिन रिकवरी शून्य है।
साइबर ठग अब केवल ओटीपी के जरिए नहीं, बल्कि निवेश के झांसे, वर्क फ्रॉम होम का लालच, अश्लील वीडियो कॉल, डिजिटल अरेस्ट और विदेश में बैठे रिश्तेदार बनने जैसे बहाने अपनाकर रोजाना लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। पीड़ित जब उम्मीद लेकर थाने पहुंचता है, तो एफआईआर दर्ज कर ली जाती है, लेकिन रिकवरी का कोई भरोसा नहीं होता। गत वर्ष पुलिस ने 178 मामले दर्ज कर 57 ठगों को पकड़ा था।
अपराधी पुलिस से दो कदम आगे : पुलिस का काम अधिकांशतः मामला दर्ज करने तक सीमित रह गया है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद फाइलें दफ्तरों में रखी रहती हैं। तकनीकी रूप से पिछड़ी पुलिस और संसाधनों की कमी अपराधियों के लिए आसान रास्ता बन रही है।
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जब तक पुलिस बैंक खातों को फ्रीज करने या लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश करती है, अपराधी रकम को कई लेयर्स में बांटकर निकाल चुके होते हैं। जनता के करोड़ों रुपये ठगों की जेब में चले जाते हैं, जबकि रिकवरी के नाम पर चंद लाख रुपये ही दिखाए जाते हैं। संवाद
केस-1
गांव किछाना के कुलबीर से कनाडा में रहने वाला भांजा बनकर 2.80 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। ठगों ने फर्जी ट्रांजेक्शन रसीद भेजने के साथ अस्पताल में भर्ती एक महिला की तस्वीर दिखाकर पीड़ित को जाल में फंसा लिया। फोन करने वाले ने खुद को उसका भांजा बताया। इसके बाद कहा कि भारत में अपने एक दोस्त के इलाज के लिए तुरंत पैसों की जरूरत है। उसके पास फर्जी रसीद भेजकर पैसे ट्रांसफर करा लिए।
केस-2
गांव सिसला के रोहताश पर कॉल आई कि वह उसका भांजा गौरव कनाडा से बोल रहा है। कॉलर ने बताया कि वह उसके खाते में 15 लाख रुपये भेज रहा है। भारत आकर ये रुपये वापस ले लेगा। व्हाट्सएप पर 15 लाख भेजने की रसीद भेज दी। थोड़ी देर बाद काल कर कहा कि इनमें से आठ लाख की दोस्त को जरूरत है। उसको भेज दो। फिर
अलग-अलग बार में 5.20 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।
केवल जांच जारी है, कहना समाधान नहीं : एसपी
साइबर ठग अब दूसरे राज्यों और विदेशों से नेटवर्क चला रहे हैं। बैंक भी संदिग्ध लेन-देन रोकने में उतनी तेजी नहीं दिखाते जितनी आवश्यक है। एसपी उपासना ने कहा कि केवल “जांच जारी है” का जवाब देने से समाधान नहीं होता। असली सफलता तब है जब पीड़ित का पैसा वापस उसके खाते में आए। पुलिस को अपनी आईटी सेल को मजबूत करना होगा और अपराधियों के बराबर स्मार्ट बनकर उनकी चाल समय रहते रोकनी होगी।
पुलिस लगातार साइबर ठगों पर कार्रवाई कर उनका नेटवर्क तोड़ रही है। लोगों को शिविर लगाकर जागरूक किया जा रहा है। आमजन से अपील है कि किसी भी झांसे में न आएं और सतर्क रहें। -उपासना, एसपी
साइबर क्राइम से कैसे बचें
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जागरूक बनें- साइबर सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है हमेशा जागरूक रहें।
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अपडेट रहना है जरूरी ः लैपटॉप हो या मोबाइल... प्रयोग करते समय समय-समय पर डिवाइस को अपडेट करते रहें।
n
सुरक्षित नेटवर्क रखें ः फ्री की वाईफाई हानिकर भी हो सकती है क्योंकि ये नेटवर्क हैकरों के निशाने पर भी रहते हैं
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सोशल-मीडिया का रखे ध्यान ः सोशल मीडिया मेंे प्रोफाइल को लॉक रखना बेहतर है। निजी जानकारी भी शेयर ना करें।
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अज्ञात लिंक पर क्लिक से बचें ः किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक से बचे, यह हानिकारक हो सकता है।
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मजबूत पासवर्ड रखें ः हर
एकाउंट्स का एक मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें। समय समय पर इसे बदलते भी रहें।
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कैथल। बीते 14 महीनों के भीतर साइबर अपराधियों ने आम जनता की जेब से 10.27 करोड़ रुपये उड़ा लिए। यह आंकड़ा केवल दर्ज मामलों का है, जबकि वास्तविकता इससे कहीं अधिक होने का अनुमान है। पुलिस अब तक केवल 65.56 लाख रुपये ही रिकवर कर पाई है, यानी रिकवरी की दर 6 प्रतिशत से भी कम है। इस वर्ष अब तक साइबर ठगी के 24 मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 1.54 करोड़ रुपये की ठगी हुई, लेकिन रिकवरी शून्य है।
साइबर ठग अब केवल ओटीपी के जरिए नहीं, बल्कि निवेश के झांसे, वर्क फ्रॉम होम का लालच, अश्लील वीडियो कॉल, डिजिटल अरेस्ट और विदेश में बैठे रिश्तेदार बनने जैसे बहाने अपनाकर रोजाना लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। पीड़ित जब उम्मीद लेकर थाने पहुंचता है, तो एफआईआर दर्ज कर ली जाती है, लेकिन रिकवरी का कोई भरोसा नहीं होता। गत वर्ष पुलिस ने 178 मामले दर्ज कर 57 ठगों को पकड़ा था।
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अपराधी पुलिस से दो कदम आगे : पुलिस का काम अधिकांशतः मामला दर्ज करने तक सीमित रह गया है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद फाइलें दफ्तरों में रखी रहती हैं। तकनीकी रूप से पिछड़ी पुलिस और संसाधनों की कमी अपराधियों के लिए आसान रास्ता बन रही है।
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जब तक पुलिस बैंक खातों को फ्रीज करने या लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश करती है, अपराधी रकम को कई लेयर्स में बांटकर निकाल चुके होते हैं। जनता के करोड़ों रुपये ठगों की जेब में चले जाते हैं, जबकि रिकवरी के नाम पर चंद लाख रुपये ही दिखाए जाते हैं। संवाद
केस-1
गांव किछाना के कुलबीर से कनाडा में रहने वाला भांजा बनकर 2.80 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। ठगों ने फर्जी ट्रांजेक्शन रसीद भेजने के साथ अस्पताल में भर्ती एक महिला की तस्वीर दिखाकर पीड़ित को जाल में फंसा लिया। फोन करने वाले ने खुद को उसका भांजा बताया। इसके बाद कहा कि भारत में अपने एक दोस्त के इलाज के लिए तुरंत पैसों की जरूरत है। उसके पास फर्जी रसीद भेजकर पैसे ट्रांसफर करा लिए।
केस-2
गांव सिसला के रोहताश पर कॉल आई कि वह उसका भांजा गौरव कनाडा से बोल रहा है। कॉलर ने बताया कि वह उसके खाते में 15 लाख रुपये भेज रहा है। भारत आकर ये रुपये वापस ले लेगा। व्हाट्सएप पर 15 लाख भेजने की रसीद भेज दी। थोड़ी देर बाद काल कर कहा कि इनमें से आठ लाख की दोस्त को जरूरत है। उसको भेज दो। फिर
अलग-अलग बार में 5.20 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।
केवल जांच जारी है, कहना समाधान नहीं : एसपी
साइबर ठग अब दूसरे राज्यों और विदेशों से नेटवर्क चला रहे हैं। बैंक भी संदिग्ध लेन-देन रोकने में उतनी तेजी नहीं दिखाते जितनी आवश्यक है। एसपी उपासना ने कहा कि केवल “जांच जारी है” का जवाब देने से समाधान नहीं होता। असली सफलता तब है जब पीड़ित का पैसा वापस उसके खाते में आए। पुलिस को अपनी आईटी सेल को मजबूत करना होगा और अपराधियों के बराबर स्मार्ट बनकर उनकी चाल समय रहते रोकनी होगी।
पुलिस लगातार साइबर ठगों पर कार्रवाई कर उनका नेटवर्क तोड़ रही है। लोगों को शिविर लगाकर जागरूक किया जा रहा है। आमजन से अपील है कि किसी भी झांसे में न आएं और सतर्क रहें। -उपासना, एसपी
साइबर क्राइम से कैसे बचें
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जागरूक बनें- साइबर सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है हमेशा जागरूक रहें।
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अपडेट रहना है जरूरी ः लैपटॉप हो या मोबाइल... प्रयोग करते समय समय-समय पर डिवाइस को अपडेट करते रहें।
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सुरक्षित नेटवर्क रखें ः फ्री की वाईफाई हानिकर भी हो सकती है क्योंकि ये नेटवर्क हैकरों के निशाने पर भी रहते हैं
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सोशल-मीडिया का रखे ध्यान ः सोशल मीडिया मेंे प्रोफाइल को लॉक रखना बेहतर है। निजी जानकारी भी शेयर ना करें।
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अज्ञात लिंक पर क्लिक से बचें ः किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक से बचे, यह हानिकारक हो सकता है।
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मजबूत पासवर्ड रखें ः हर
एकाउंट्स का एक मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें। समय समय पर इसे बदलते भी रहें।