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Kaithal: मैरिज सर्टिफिकेट बनाने के नाम पर 20 हजार की रिश्वत लेते CSC संचालक गिरफ्तार

Mon, 29 Jun 2026 07:19 PM IST
मयूर शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Published by: मयूर शर्मा Updated Mon, 29 Jun 2026 07:19 PM IST
सार

गांव मानस निवासी प्रदीप कुमार को अपना मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना था जिसके लिए सीएससी संचालक विकास साहनी ने उनसे 22 हजार रुपये की मांग की थी लेकिन बाद में 20 हजार रुपये में सौदा तय हुआ था।
 

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CSC operator arrested in Kaithal for accepting a bribe of ₹20,000 for a marriage certificate.
सीएससी संचालक को ले जाती हुई विजिलेंस की टीम - फोटो : संवाद

विस्तार

                                
                
                
                 
                    
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विजिलेंस ब्यूरो कैथल की टीम ने सोमवार दोपहर मैरिज सर्टिफिकेट बनवाने के नाम पर 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए सीएससी संचालक को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। सचिवालय के सामने स्थित हिंद मार्केट में सीएससी चला रहे संचालक विकास साहनी को गिरफ्तार किया गया है।
गांव मानस निवासी प्रदीप कुमार की शिकायत पर विजिलेंस इंस्पेक्टर सूबे सिंह सैनी के नेतृत्व में कार्रवाई की गई। आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी गई है।
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संचालक ने मांगे थी 22 हजार की रिश्वत 

विजिलेंस के अनुसार गांव मानस निवासी प्रदीप कुमार को अपना मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना था। आरोप है कि इस काम के लिए सीएससी संचालक विकास साहनी ने पहले 22 हजार रुपये की मांग की। बाद में दोनों के बीच 20 हजार रुपये में सौदा तय हो गया। प्रदीप कुमार ने रिश्वत देने के बजाय इसकी शिकायत विजिलेंस ब्यूरो को दी। शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद ट्रैप की योजना बनाई गई।
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विजिलेंस ने शिकायतकर्ता को तय रकम के साथ भेजा। जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी को 20 हजार रुपये दिए और उसने रकम अपने कब्जे में ली, पहले से तैनात विजिलेंस टीम ने उसे मौके पर ही रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।


मामले में सरकारी कर्मचारियों के मिलीभगत होने का भी शक

विजिलेंस अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि आरोपी अकेले लोगों से अवैध वसूली करता था या इस पूरे मामले में किसी सरकारी कर्मचारी, अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भी मिलीभगत थी। विजिलेंस अधिकारियों ने कहा कि जांच में यदि किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया कि सरकारी कार्यों के नाम पर रिश्वत मांगने और अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
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