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Kaithal News: धान का मुआवजा नहीं आया
Fri, 05 Dec 2025 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 05 Dec 2025 01:06 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। धान की फसल में हुए नुकसान का मुआवजा न मिलने के कारण जिले के किसानों में रोष और चिंता बढ़ रही है। किसान रोजाना सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई। ऐसे में उनका सब्र जवाब दे रहा है। किसानों ने सरकार से जल्द से जल्द मुआवजा राशि जारी करने की मांग की है।
क्योड़क गांव के किसान सतपाल सिंह ने बताया कि बारिश के कारण उनकी धान की फसल खराब हो गई थी। उन्होंने क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन किया था, लेकिन मुआवजा राशि न मिलने के कारण अब आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। वहीं बाता गांव के किसान सुनील ने बताया कि तीन एकड़ जमीन पर उगाई गई उनकी धान की फसल बारिश और जलभराव के कारण पूरी तरह बर्बाद हो गई, और लंबे समय बाद भी मुआवजा नहीं मिला। किसान नेता विक्रम कसाना ने कहा कि प्रति एकड़ धान की खेती में लगभग 20-25 हजार रुपये खर्च होते हैं, जबकि जमीन का ठेका 60-70 हजार प्रति वर्ष है। अब धान कम होने के कारण किसानों के हाथ कुछ नहीं आया है।
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कैथल। धान की फसल में हुए नुकसान का मुआवजा न मिलने के कारण जिले के किसानों में रोष और चिंता बढ़ रही है। किसान रोजाना सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई। ऐसे में उनका सब्र जवाब दे रहा है। किसानों ने सरकार से जल्द से जल्द मुआवजा राशि जारी करने की मांग की है।
क्योड़क गांव के किसान सतपाल सिंह ने बताया कि बारिश के कारण उनकी धान की फसल खराब हो गई थी। उन्होंने क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन किया था, लेकिन मुआवजा राशि न मिलने के कारण अब आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। वहीं बाता गांव के किसान सुनील ने बताया कि तीन एकड़ जमीन पर उगाई गई उनकी धान की फसल बारिश और जलभराव के कारण पूरी तरह बर्बाद हो गई, और लंबे समय बाद भी मुआवजा नहीं मिला। किसान नेता विक्रम कसाना ने कहा कि प्रति एकड़ धान की खेती में लगभग 20-25 हजार रुपये खर्च होते हैं, जबकि जमीन का ठेका 60-70 हजार प्रति वर्ष है। अब धान कम होने के कारण किसानों के हाथ कुछ नहीं आया है।
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