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जिले में बिना फायर एनओसी के चल रहे ज्यादातर बड़े व छोटे संस्थान, सुरक्षा रामभरोसे
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कार्यालयों और उद्योगों के लिए फायर एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया है। इसके बावजूद जिला मुख्यालय सहित सभी शहरों में अधिकांश सरकारी और प्राइवेट भवनों में फायर एनओसी नहीं है। या फिर कहें कि आग से निपटने के लिए उपाय नहीं किए हैं। दिल्ली सहित देश के कई शहरों में आग लगने की बड़ी घटनाओं के बाद प्रदेश के अग्निशमन विभाग ने पत्र जारी किया है। जिसमें कहा है कि बिना एनओसी के चल रहे संस्थानों का डाटा तैयार कर विभाग को भेजें, ताकि आगामी कार्रवाई की जा सके।
मुख्यालय के इस आदेश के बाद जिले के अधिकारियों ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। जिला उद्योग केंद्र से ऐसे बड़े संस्थानों की लिस्ट मांगी गई है, जिनके पास फायर एनओसी नहीं है। उसी के बाद फायर सिस्टम लगाने और एनओसी के लिए अभियान चलाया जाएगा। पहले फेज में नोटिस जारी होंगे, अगर नोटिस के बाद भी संस्थानों द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जाता है तो उनके खिलाफ आगामी कार्रवाई भी हो सकती है।
सिर्फ 66 स्कूलों के पास है एनओसी
जिले के 1533 स्कूलों में से केवल 66 ने ही फायर एनओसी ली है। 126 सरकारी और निजी अस्पतालों में से मात्र नौ के पास ही फ एनओसी है। हालांकि निजी स्कूलों को मान्यता प्राप्त होने के साथ ही फायर एनओसी लेना अनिवार्य है। आश्चर्य की बात तो ये है कि सरकारी विभागों की 30 बड़ी इमारतें हैं, जिन्होंने अभी तक एनओसी नहीं ली है। कई हजार छोटे व बड़े उद्योगों के पास भी सुरक्षा के प्रबंध नहीं हैं। ऐसे में इन स्थानों पर आगजनी जैसी घटना होने पर लोगों की सुरक्षा राम भरोसे है।
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कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी करके चुप्पी साधी
सूरत में हुई आगजनी के बाद कोचिंग सेंटरों को अग्रिशमन विभाग न े नोटिस जारी किए थे। जिनमें कहा था कि वह जल्द से जल्द फायर एनओसी से लें। इसके बाद कुछ सेंटरों ने तो एनओसी ली लेकिन कुछ दिनों बाद ही यह मामला ठंडा पड़ गया। आज उन सेंटरों में भी आगजनी की घटना से निपटने के प्रबंध अधूरे पड़े हैं। स्थिति यह है कि 60 कोचिंग सेंटरों में से एकाध को छोड़कर किसी के पास एनओसी नहीं है।
बिल्डिंग बनाने के साथ लेनी होती है एनओसी
फायर एनओसी किसी भी बिल्डिंग के निर्माण के समय लेनी होती है, लेकिन यहां कार्य पूरा होने के बाद भी नहीं ली जा रही है। जिस समय बिल्डिंग तैयार होती है, उसी समय निर्धारित किया जाता है कि यहां सुरक्षा के दृष्टिगत क्या-क्या उपकरण उपलब्ध होने चाहिए।
उप दमकल केंद्र अधिकारी रामकरण शर्मा ने बताया कि जल्द ही एनओसी नहीं लेने वालों को नोटिस जारी किए जाएंगे और उसके बाद आगामी कार्रवाई होगी।
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मुख्यालय के इस आदेश के बाद जिले के अधिकारियों ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। जिला उद्योग केंद्र से ऐसे बड़े संस्थानों की लिस्ट मांगी गई है, जिनके पास फायर एनओसी नहीं है। उसी के बाद फायर सिस्टम लगाने और एनओसी के लिए अभियान चलाया जाएगा। पहले फेज में नोटिस जारी होंगे, अगर नोटिस के बाद भी संस्थानों द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जाता है तो उनके खिलाफ आगामी कार्रवाई भी हो सकती है।
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सिर्फ 66 स्कूलों के पास है एनओसी
जिले के 1533 स्कूलों में से केवल 66 ने ही फायर एनओसी ली है। 126 सरकारी और निजी अस्पतालों में से मात्र नौ के पास ही फ एनओसी है। हालांकि निजी स्कूलों को मान्यता प्राप्त होने के साथ ही फायर एनओसी लेना अनिवार्य है। आश्चर्य की बात तो ये है कि सरकारी विभागों की 30 बड़ी इमारतें हैं, जिन्होंने अभी तक एनओसी नहीं ली है। कई हजार छोटे व बड़े उद्योगों के पास भी सुरक्षा के प्रबंध नहीं हैं। ऐसे में इन स्थानों पर आगजनी जैसी घटना होने पर लोगों की सुरक्षा राम भरोसे है।
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कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी करके चुप्पी साधी
सूरत में हुई आगजनी के बाद कोचिंग सेंटरों को अग्रिशमन विभाग न े नोटिस जारी किए थे। जिनमें कहा था कि वह जल्द से जल्द फायर एनओसी से लें। इसके बाद कुछ सेंटरों ने तो एनओसी ली लेकिन कुछ दिनों बाद ही यह मामला ठंडा पड़ गया। आज उन सेंटरों में भी आगजनी की घटना से निपटने के प्रबंध अधूरे पड़े हैं। स्थिति यह है कि 60 कोचिंग सेंटरों में से एकाध को छोड़कर किसी के पास एनओसी नहीं है।
बिल्डिंग बनाने के साथ लेनी होती है एनओसी
फायर एनओसी किसी भी बिल्डिंग के निर्माण के समय लेनी होती है, लेकिन यहां कार्य पूरा होने के बाद भी नहीं ली जा रही है। जिस समय बिल्डिंग तैयार होती है, उसी समय निर्धारित किया जाता है कि यहां सुरक्षा के दृष्टिगत क्या-क्या उपकरण उपलब्ध होने चाहिए।
उप दमकल केंद्र अधिकारी रामकरण शर्मा ने बताया कि जल्द ही एनओसी नहीं लेने वालों को नोटिस जारी किए जाएंगे और उसके बाद आगामी कार्रवाई होगी।