फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Chunari climbed on the statue of Maa Kushmanda, cheers started

Kaithal News: मां कूष्मांडा की प्रतिमा पर चढ़ाई चुनरी, लगे जयकारे

Fri, 12 Apr 2024 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 12 Apr 2024 11:56 PM IST
विज्ञापन
Chunari climbed on the statue of Maa Kushmanda, cheers started
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कैथल। शहर के माता मंदिरों में नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। सुबह पांच बजे से ही श्रद्धालु मंदिर में पहुंचना शुरू हो गए थे। श्रद्धालुओं ने माता की प्रतिमा को नारियल चुनरी चढ़ाकर सुख शांति की कामना की।

सुबह से ही मंदिर में पूजा अर्चना के लिए लंबी कतार लग गई थी। सभी श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक दर्शन किए। श्रद्धालुओं ने कतार में खड़े खड़े माता रानी के जयघोष लगाए, जिससे मंदिर गूंज उठे। बड़ी देवी मंदिर के पुजारी विनायक भारद्वाज ने कहा कि मां कुष्मांडा की महिमा अद्वितीय है।
विज्ञापन


इनकी उपासना शांत मन से और मधुर ध्वनि के साथ करनी चाहिए। मां कुष्मांडा की पूजा से अजेय रहने का वरदान मिलता है। जब संसार में चारों ओर अंधियारा छा गया था, तब मां कुष्मांडा ने ही अपनी मधुर मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। कहते हैं देवी ने अपनी मंद मुस्कुराहट और अपने उदर से इस ब्रह्मांड को उत्पन्न किया था। देवी कुष्मांडा को समर्पित इस दिन का संबंध हरे रंग से जाना जाता है। माता रानी की आठ भुजाएं हैं, जिसमें से सात में उन्होंने कमंडल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत का कलश, चक्र और गदा लिया हुआ है। माता के आठवें हाथ में जप माला है और मां सिंह के वाहन पर सवार हैं। शनिवार को मंदिरों में मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की मंदिरों में पूजा अर्चना होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


श्रद्धालुओं को माता कुष्मांडा के बारे में विस्तार से बताया

सीवन। नगर के श्री सनातन धर्म मंदिर में नवरात्रों के पावन अवसर पर विशेष सत्संग का आयोजन किया। इस अवसर पर मंदिर के महंत महेश शर्मा ने उपस्थित श्रद्धालुओं को माता कुष्मांडा के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि शक्ति की उपासना का पर्व नवरात्रि के चौथे दिन को देवी कुष्मांडा के रूप में पूजा जाता है।

अपनी मंद, हल्की हंसी द्वारा ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण, इन्हें कुष्मांडा के नाम से पुकारा गया। प्राचीन कथा के अनुसार सृष्टि रचना के पहले हर तरफ अंधेरा ही अंधेरा था, तब देवी की हलकी सी हंसी से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए इन्हें आदि शक्ति या आदि स्वरूपा भी कहा


जाता है।

उन्होंने माता के स्वरूप के बारे में बताते हुए कहा कि आठ भुजाएं होने के कारण इन्हें अष्टभुजा भी कहा जाता है। इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा के अलावा आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इनका वाहन सिंह है। सूर्य लोक में रहने के कारण ही इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य के समान चमकती है। इस अवसर पर नरेश मुंजाल, भीषू चौधरी, राहुल कक्कड़, सोनू शर्मा, नमिता शर्मा व अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed