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Kaithal News: आयस्टर और बटन मशरूम की विशेषता बताई
Fri, 02 May 2025 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 02 May 2025 12:37 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आरकेएसडी कॉलेज में मशरूम उत्पादन तकनीक पर चल रहे 10 दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम में मशरूम की खेती कर कमाई करने के बारे में जानकारी दी जा रही है।
आत्मनिर्भरता की दिशा में विद्यार्थियों को प्रेरित करना इस कार्यक्रम का उद्देश्य हैै। इसमें युवाओं को मशरूम की खेती के फायदे बताने के साथ मशरूम की विभिन्न प्रजातियों जैसे व्हाइट बटन एवं ऑयस्टर मशरूम का परिचय, कंपोस्ट निर्माण की विधि, आवश्यक सामग्री, बीजारोपण की तकनीक और केसिंग मिश्रण तैयार करने की प्रक्रिया आदि की जानकारी दी गई।
गौरतलब है कि आयस्टर मशरूम और बटन मशरूम दो अलग-अलग प्रकार के मशरूम हैं। बटन मशरूम एक लोकप्रिय खाने योग्य मशरूम है जो आमतौर पर सफेद या हल्के भूरे रंग का होता है, जबकि आयस्टर मशरूम एक अलग किस्म है जो पंखे या ढींगरी के आकार में होती है और आमतौर पर सफेद, भूरे या भूरे रंग की होती है।
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प्रशिक्षण में मशरूम में लगने वाले कीड़े व मक्खियों की पहचान, रोगों की जानकारी, उनके उपचार हेतु औषधियों तथा फसल की कटाई जैसे व्यावहारिक पहलुओं को भी विस्तार से सिखाया गया। समझाया गया कि मशरूम आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन एवं प्रोटीन का उत्तम स्रोत है। कुपोषण को समाप्त करने में भी इसे विकल्प के रूप में प्रयोग किया जाता है।
डॉ. अजय शर्मा, डॉ. विशाल आनंद, डॉ. रचना सरदाना, डॉ. पूजा मित्तल के निर्देशन में चल रहे इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थी भागीदारी कर अपना ज्ञान बढ़ा रहे हैं। प्राचार्य डॉ. सत्यबीर मेहला की ओर से वाणिज्य विभाग व जुड़े प्रकोष्ठों को सतत प्रोत्साहन और मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।
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कैथल। आरकेएसडी कॉलेज में मशरूम उत्पादन तकनीक पर चल रहे 10 दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम में मशरूम की खेती कर कमाई करने के बारे में जानकारी दी जा रही है।
आत्मनिर्भरता की दिशा में विद्यार्थियों को प्रेरित करना इस कार्यक्रम का उद्देश्य हैै। इसमें युवाओं को मशरूम की खेती के फायदे बताने के साथ मशरूम की विभिन्न प्रजातियों जैसे व्हाइट बटन एवं ऑयस्टर मशरूम का परिचय, कंपोस्ट निर्माण की विधि, आवश्यक सामग्री, बीजारोपण की तकनीक और केसिंग मिश्रण तैयार करने की प्रक्रिया आदि की जानकारी दी गई।
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गौरतलब है कि आयस्टर मशरूम और बटन मशरूम दो अलग-अलग प्रकार के मशरूम हैं। बटन मशरूम एक लोकप्रिय खाने योग्य मशरूम है जो आमतौर पर सफेद या हल्के भूरे रंग का होता है, जबकि आयस्टर मशरूम एक अलग किस्म है जो पंखे या ढींगरी के आकार में होती है और आमतौर पर सफेद, भूरे या भूरे रंग की होती है।
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प्रशिक्षण में मशरूम में लगने वाले कीड़े व मक्खियों की पहचान, रोगों की जानकारी, उनके उपचार हेतु औषधियों तथा फसल की कटाई जैसे व्यावहारिक पहलुओं को भी विस्तार से सिखाया गया। समझाया गया कि मशरूम आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन एवं प्रोटीन का उत्तम स्रोत है। कुपोषण को समाप्त करने में भी इसे विकल्प के रूप में प्रयोग किया जाता है।
डॉ. अजय शर्मा, डॉ. विशाल आनंद, डॉ. रचना सरदाना, डॉ. पूजा मित्तल के निर्देशन में चल रहे इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थी भागीदारी कर अपना ज्ञान बढ़ा रहे हैं। प्राचार्य डॉ. सत्यबीर मेहला की ओर से वाणिज्य विभाग व जुड़े प्रकोष्ठों को सतत प्रोत्साहन और मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।