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Kaithal News: श्रीराम के कहने पर भी भरत नहीं बने थे राजा
Tue, 26 Nov 2024 03:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 26 Nov 2024 03:17 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हनुमान वाटिका मंदिर में आयोजित की जा रही पांच दिवसीय श्री राम चरित मानस पाठ सोमवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। स्वामी ध्रुव चैतन्य सरस्वती ने भगवान राम के वनवास के बाद भरत मिलाप के प्रसंग का वर्णन किया। बताया कि श्रीराम जी के आह्वान करने के बावजूद भरत अयोध्या के राजा नहीं बने थे।
पाठ के कार्यक्रम के तहत मंदिर परिसर में भव्य श्री राम दरबार सजाया गया है। इस राम दरबार में श्रद्धालु काफी संख्या में पहुंच रहे हैं। स्वामी ध्रुव चैतन्य सरस्वती ने बताया कि भरत जैसे भाई में केवल प्रेम की ही भावना था। भगवान राम के वनवास जाने के बाद उन्होंने श्रीराम के आह्वान पर भी राजतिलक नहीं करवाया। इस दौरान उन्होंने भगवान श्री राम के खड़ाऊ अयोध्या की राज गद्दी पर पूरे 14 वर्ष तक रखे।
वह बोलेे- भरत को न राज का लालच था और न किसी प्रकार का द्ववेष। इस चरित्र में केवल त्याग, संयम, धैर्य और ईश्वर प्रेम की कहानी है। यह कथा दोपहर साढ़े तीन बजे शुरू होती है, जो शाम साढ़े पांच संपन्न होती है। इस मौके पर हनुमान वाटिका मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा, सोनाली, बृजेश, ईवा, सरोज, मनप्रीत, दिनेश आदि श्रद्धालुगण मौजूद रहे।
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कैथल। हनुमान वाटिका मंदिर में आयोजित की जा रही पांच दिवसीय श्री राम चरित मानस पाठ सोमवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। स्वामी ध्रुव चैतन्य सरस्वती ने भगवान राम के वनवास के बाद भरत मिलाप के प्रसंग का वर्णन किया। बताया कि श्रीराम जी के आह्वान करने के बावजूद भरत अयोध्या के राजा नहीं बने थे।
पाठ के कार्यक्रम के तहत मंदिर परिसर में भव्य श्री राम दरबार सजाया गया है। इस राम दरबार में श्रद्धालु काफी संख्या में पहुंच रहे हैं। स्वामी ध्रुव चैतन्य सरस्वती ने बताया कि भरत जैसे भाई में केवल प्रेम की ही भावना था। भगवान राम के वनवास जाने के बाद उन्होंने श्रीराम के आह्वान पर भी राजतिलक नहीं करवाया। इस दौरान उन्होंने भगवान श्री राम के खड़ाऊ अयोध्या की राज गद्दी पर पूरे 14 वर्ष तक रखे।
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वह बोलेे- भरत को न राज का लालच था और न किसी प्रकार का द्ववेष। इस चरित्र में केवल त्याग, संयम, धैर्य और ईश्वर प्रेम की कहानी है। यह कथा दोपहर साढ़े तीन बजे शुरू होती है, जो शाम साढ़े पांच संपन्न होती है। इस मौके पर हनुमान वाटिका मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा, सोनाली, बृजेश, ईवा, सरोज, मनप्रीत, दिनेश आदि श्रद्धालुगण मौजूद रहे।
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