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Kaithal News: सावधान! दूषित हवा से स्वास्थ्य को खतरा
Thu, 26 Oct 2023 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 26 Oct 2023 12:34 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। दशहरा पर्व पर हुई आतिशबाजी के बाद एक बार फिर से वायु गुणवत्ता सूचकांक में बढ़ोत्तरी हुई है। दशहरे से पहले एक्यूआई 192 दर्ज किया गया था, जो दशहरे के एक दिन बाद ही 252 पहुंच गया। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद ही खतरनाक श्रेणी में माना जाता है।
दूसरे तरफ फसल अवशेष जलाने के मामले भी आए दिन बढ़ते जा रहे हैं। अब तक 217 मामले फसल अवशेष जलाने के आ चुके हैं। इनमें 107 मामले कृषि विभाग की हर्षक एप और 110 मामले अन्य माध्यम से मिले हैं। कृषि विभाग ने अब तक किसानों से तीन लाख 80 हजार रुपये जुर्माना वसूला है। इसके साथ ही जो किसान बार बार समझाने के बाद भी फसल अवशेष जला रहे हैं 25 किसानों पर मामला दर्ज कर लिया है।
गौरतलब है कि बीते दिन दशहरे के दिन देशभर में रावण का दहन किया और देर रात तक आतिशबाजी हुई। इसके बाद वातावरण दूषित हो गया है और वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर बढ़ गया है। जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है। इसमें स्वस्थ व्यक्ति को अपने आपको बीमार महसूस करने लगता है।
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जिले में 25 अक्तूबर तक फसल अवशेषों में आग लगाने के 217 मामले सामने का चुके है। जिसमें तीन लाख 80 रुपये किसानों पर जुर्माना लगाया जा चुका हैं। वहीं बीते वर्ष 25 अक्तूबर तक 366 फसल अवशेष जलाने के मामले में किसानों पर लगभग दो लाख 51 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया था। बीते वर्ष की अपेक्षा इस बार लगभग 150 मामले कम सामने आए हैं, लेकिन किसानों पर एक लाख 29 हजार रुपये किसानों पर जुर्माना अधिक लगा है। वहीं इस बार सरकार व प्रशासन के सख्त होने से 25 किसानों पर केस भी दर्ज किए गए हैं। जबकि बीते वर्ष सिर्फ
किसानों से जुर्माना वसूला था। सहायक कृषि अभियंता व फसल अवशेष प्रबंधन के नोडल अधिकारी जगदीश मलिक ने कहा कि इस सीजन में अब तक फसल अवशेष जलाने के 217 मामले आ चुके हैं। 217 मामलों में किसानों पर तीन लाख 80 हजार जुर्माना लगया जा चुका है। बीते वर्ष किसानों पर सिर्फ जुर्माना लगा था, केस दर्ज नहीं हुआ था।
कृषि उपनिदेशक डॉ. महावीर सिंह ने बताया कि प्रति वर्ष फसल अवशेष जलाने के मामलों में सुधार हो रहा है। बीते वर्ष 25 अक्तूबर तक 366 फसल अवशेष जलाने के मामले थे, इस बार 217 मामले मिले हैं। बीते वर्ष से 149 मामले इस बार अब तक कम हैं।
फसल अवशेष प्रबंधन के लिए एक लाख 20 हजार एकड़ भूमि का करवाया पंजीकरण
कैथल। जिले के 12,111 किसानों ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए एक लाख 20 हजार एकड़ भूमि का पंजीकरण करवाया है। इन किसानों को सरकार की तरफ से 12 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ दिया जाएगा। इस जिले में किसान 30 नवंबर 2023 तक फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अपना पंजीकरण करवा सकते है। जो किसान अपना पंजीकरण करवाएगा, वह सरकार की योजनाओं का फायदा भी उठा सकेगा। यह जानकारी डीसी प्रशांत पंवार ने दी। डीसी ने किसानों से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अपना पंजीकरण करवाने की अपील करते हुए कहा कि इस योजना का अधिक से अधिक किसानों को फायदा उठाने के लिए 30 नवंबर तक अधिक से अधिक किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए पोर्टल पर अपना पंजीकरण करवाना चाहिए। इसके लिए प्रशासन और कृषि विभाग की तरफ से गांव-गांव में जाकर किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। संवाद
एक्यूआई की स्थिति
माह
एक्यूआई
जनवरी
86
फरवरी
102
मार्च
55
अप्रैल
135
मई
55
जून
47
जुलाई
47
अगस्त
203
सितंबर
184
अक्तूबर
240
अधिकतम
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कैथल। दशहरा पर्व पर हुई आतिशबाजी के बाद एक बार फिर से वायु गुणवत्ता सूचकांक में बढ़ोत्तरी हुई है। दशहरे से पहले एक्यूआई 192 दर्ज किया गया था, जो दशहरे के एक दिन बाद ही 252 पहुंच गया। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद ही खतरनाक श्रेणी में माना जाता है।
दूसरे तरफ फसल अवशेष जलाने के मामले भी आए दिन बढ़ते जा रहे हैं। अब तक 217 मामले फसल अवशेष जलाने के आ चुके हैं। इनमें 107 मामले कृषि विभाग की हर्षक एप और 110 मामले अन्य माध्यम से मिले हैं। कृषि विभाग ने अब तक किसानों से तीन लाख 80 हजार रुपये जुर्माना वसूला है। इसके साथ ही जो किसान बार बार समझाने के बाद भी फसल अवशेष जला रहे हैं 25 किसानों पर मामला दर्ज कर लिया है।
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गौरतलब है कि बीते दिन दशहरे के दिन देशभर में रावण का दहन किया और देर रात तक आतिशबाजी हुई। इसके बाद वातावरण दूषित हो गया है और वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर बढ़ गया है। जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है। इसमें स्वस्थ व्यक्ति को अपने आपको बीमार महसूस करने लगता है।
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जिले में 25 अक्तूबर तक फसल अवशेषों में आग लगाने के 217 मामले सामने का चुके है। जिसमें तीन लाख 80 रुपये किसानों पर जुर्माना लगाया जा चुका हैं। वहीं बीते वर्ष 25 अक्तूबर तक 366 फसल अवशेष जलाने के मामले में किसानों पर लगभग दो लाख 51 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया था। बीते वर्ष की अपेक्षा इस बार लगभग 150 मामले कम सामने आए हैं, लेकिन किसानों पर एक लाख 29 हजार रुपये किसानों पर जुर्माना अधिक लगा है। वहीं इस बार सरकार व प्रशासन के सख्त होने से 25 किसानों पर केस भी दर्ज किए गए हैं। जबकि बीते वर्ष सिर्फ
किसानों से जुर्माना वसूला था। सहायक कृषि अभियंता व फसल अवशेष प्रबंधन के नोडल अधिकारी जगदीश मलिक ने कहा कि इस सीजन में अब तक फसल अवशेष जलाने के 217 मामले आ चुके हैं। 217 मामलों में किसानों पर तीन लाख 80 हजार जुर्माना लगया जा चुका है। बीते वर्ष किसानों पर सिर्फ जुर्माना लगा था, केस दर्ज नहीं हुआ था।
कृषि उपनिदेशक डॉ. महावीर सिंह ने बताया कि प्रति वर्ष फसल अवशेष जलाने के मामलों में सुधार हो रहा है। बीते वर्ष 25 अक्तूबर तक 366 फसल अवशेष जलाने के मामले थे, इस बार 217 मामले मिले हैं। बीते वर्ष से 149 मामले इस बार अब तक कम हैं।
फसल अवशेष प्रबंधन के लिए एक लाख 20 हजार एकड़ भूमि का करवाया पंजीकरण
कैथल। जिले के 12,111 किसानों ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए एक लाख 20 हजार एकड़ भूमि का पंजीकरण करवाया है। इन किसानों को सरकार की तरफ से 12 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ दिया जाएगा। इस जिले में किसान 30 नवंबर 2023 तक फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अपना पंजीकरण करवा सकते है। जो किसान अपना पंजीकरण करवाएगा, वह सरकार की योजनाओं का फायदा भी उठा सकेगा। यह जानकारी डीसी प्रशांत पंवार ने दी। डीसी ने किसानों से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अपना पंजीकरण करवाने की अपील करते हुए कहा कि इस योजना का अधिक से अधिक किसानों को फायदा उठाने के लिए 30 नवंबर तक अधिक से अधिक किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए पोर्टल पर अपना पंजीकरण करवाना चाहिए। इसके लिए प्रशासन और कृषि विभाग की तरफ से गांव-गांव में जाकर किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। संवाद
एक्यूआई की स्थिति
माह
एक्यूआई
जनवरी
86
फरवरी
102
मार्च
55
अप्रैल
135
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